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Malaika Arora का दिल से कबूलनामा: “शादी के लिए खुद को वक्त देना बहुत ज़रूरी है”
प्यार, दूसरी शुरुआत और सही समय पर लिए गए फैसलों पर Malaika Arora ने खोले दिल के राज
ज़िंदगी के शुरुआती बीसवें दशक को याद करें, तो कई महिलाओं को एहसास होता है कि उस उम्र में उनसे कितनी जल्दी बड़े फैसले लेने की उम्मीद की जाती है—खासतौर पर शादी जैसे फैसले। हाल ही में यही सोच एक बातचीत के दौरान सामने आई, जब बॉलीवुड एक्ट्रेस Malaika Arora ने प्यार, दूसरी मौके और सही समय की अहमियत पर खुलकर बात की।
अपने पूर्व पति Arbaaz Khan से अलग होने के बाद दोबारा प्यार मिलने की संभावना पर Malaika ने कहा कि वह आज भी प्यार में यकीन रखती हैं। उनके शब्दों में, “Never say never. मैं एक हार्डकोर रोमांटिक हूं और प्यार पर पूरा भरोसा करती हूं।” उनका यह नजरिया उन तमाम लोगों से जुड़ता है, जो रिश्तों में बदलाव के बाद भी उम्मीद और भावनात्मक जुड़ाव को ज़िंदा रखते हैं।
Malaika ने यह भी साझा किया कि अगर उन्हें अपने छोटे उम्र के खुद से कुछ कहने का मौका मिले, तो वह क्या सलाह देंगी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शादी जैसे बड़े फैसले में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, “थोड़ा काम करना, ज़िंदगी की जर्नी को समझना और फिर शादी का फैसला लेना बेहतर होता है।” Malaika खुद मानती हैं कि वह काफी कम उम्र में शादी के बंधन में बंध गई थीं।
यह सोच आज के दौर में कई महिलाओं और पुरुषों की भावनाओं को आवाज़ देती है, जहां करियर, आत्मनिर्भरता और खुद को समझना उतना ही ज़रूरी माना जा रहा है जितना रिश्ते।

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इस विषय पर Dr. Anitha B, जो Cadabams Hospitals से जुड़ी एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं, बताती हैं कि बहुत कम उम्र में शादी करने से व्यक्ति की पहचान बनने की प्रक्रिया अधूरी रह सकती है। शुरुआती वयस्क जीवन वह समय होता है जब इंसान अपने मूल्य, भावनात्मक सीमाएं और करियर की दिशा समझता है। अगर इस दौर में शादी हो जाए, तो कई बार व्यक्ति खुद को एक स्वतंत्र इंसान के बजाय सिर्फ रिश्ते के जरिए परिभाषित करने लगता है।
उनका मानना है कि जो लोग थोड़ी देर से शादी करते हैं, वे भावनात्मक रूप से ज्यादा स्थिर होते हैं क्योंकि उन्होंने खुद को समझने का समय लिया होता है। ऐसे रिश्तों में संवाद, समझ और संतुलन बेहतर देखने को मिलता है।
शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार होने के संकेतों पर बात करते हुए Dr. Anitha कहती हैं कि भावनात्मक जागरूकता, संघर्ष को सुलझाने की क्षमता और जिम्मेदारी लेने की समझ बेहद ज़रूरी है। जो लोग शादी को अकेलेपन या सामाजिक दबाव से बचने का जरिया नहीं, बल्कि एक साझेदारी के रूप में देखते हैं, वही इसके लिए सच में तैयार होते हैं।
Malaika Arora की यह सोच आज की पीढ़ी को एक अहम संदेश देती है—प्यार ज़रूरी है, लेकिन खुद को समझना और सही समय का इंतज़ार करना उससे भी ज़्यादा अहम है।
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