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Virat Kohli की कप्तानी पर फिर बहस तेज़: ऊंची उम्मीदें, लेकिन नतीजों में रह गई कमी?
Vijay Hazare Trophy में शतक से धमाकेदार वापसी के बीच Tom Moody और Harbhajan Singh ने Kohli की कप्तानी के दौर को बताया विरोधाभासों से भरा
जिस दिन Virat Kohli ने सीमित ओवरों की घरेलू क्रिकेट में शानदार शतक जड़कर सबका ध्यान अपनी बल्लेबाज़ी पर खींच लिया, उसी दिन उनकी कप्तानी को लेकर पुरानी बहस भी फिर से ज़ोर पकड़ने लगी। Vijay Hazare Trophy 2025–26 में दिल्ली की ओर से खेलते हुए Kohli ने आंध्र प्रदेश के खिलाफ शतक जमाया, लेकिन क्रिकेट जगत की निगाहें उनके कप्तानी दौर के मूल्यांकन पर भी टिक गईं।
Kohli की कप्तानी: शुरुआत उम्मीदों से भरी
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर Tom Moody ने Kohli की कप्तानी को एक ऐसे दौर के रूप में देखा, जहां अपेक्षाएं आसमान पर थीं। Moody के मुताबिक, Kohli के आक्रामक नेतृत्व, फिटनेस कल्चर और जीत की भूख ने टीम इंडिया को नई पहचान दी, लेकिन बड़े ICC टूर्नामेंटों में ट्रॉफी न जीत पाना उस दौर की सबसे बड़ी कमी बन गया।
उनका मानना है कि Kohli की कप्तानी में टीम अक्सर मजबूत दिखी, लेकिन निर्णायक मौकों पर वह आखिरी कदम नहीं उठा सकी।
Harbhajan Singh का संतुलित नजरिया
पूर्व भारतीय स्पिनर Harbhajan Singh ने Kohli के पक्ष और विपक्ष—दोनों को एक साथ रखा। Harbhajan के अनुसार, Kohli ने भारतीय क्रिकेट को मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत बनाया, खासकर विदेशी दौरों पर। टेस्ट क्रिकेट में भारत की आक्रामकता और जीत का आत्मविश्वास Kohli की कप्तानी की बड़ी उपलब्धि रही।
हालांकि, Harbhajan यह भी मानते हैं कि सीमित ओवरों के फॉर्मेट में टीम से जो उम्मीदें थीं, वे पूरी तरह ज़मीन पर उतरती नहीं दिखीं।

बल्लेबाज़ी और कप्तानी का अंतर
कई विशेषज्ञों का मानना है कि Kohli एक बल्लेबाज़ के तौर पर जितने निरंतर और भरोसेमंद रहे, कप्तान के तौर पर उतनी ही जटिल चुनौतियों से घिरे रहे। कप्तानी के दबाव में कई बार उनकी व्यक्तिगत बल्लेबाज़ी भी चर्चा में आई, हालांकि उनके जज़्बे और इंटेंसिटी पर कभी सवाल नहीं उठा।
AB de Villiers की टिप्पणी भी चर्चा में
इस बहस में Kohli के करीबी दोस्त और पूर्व दक्षिण अफ्रीकी कप्तान AB de Villiers का नाम भी जुड़ा। de Villiers पहले भी कह चुके हैं कि Kohli ने हमेशा टीम को खुद से ऊपर रखा और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत भी बनी और कभी-कभी कमजोरी भी।
शतक ने फिर याद दिलाया असली पहचान
दिल्ली के लिए विजय हज़ारे ट्रॉफी में लगाया गया शतक यह याद दिलाने के लिए काफी था कि Kohli की असली पहचान उनकी बल्लेबाज़ी है। कप्तानी के आंकड़े चाहे जैसे भी हों, रन बनाते वक्त Kohli आज भी उतने ही खतरनाक और प्रेरणादायक हैं।
निष्कर्ष
Virat Kohli की कप्तानी को एक शब्द में परिभाषित करना आसान नहीं। यह एक ऐसा दौर रहा जहां आक्रामक सोच, ऊंची उम्मीदें और ऐतिहासिक विदेशी जीतें थीं—लेकिन साथ ही ICC ट्रॉफी की कमी भी। शायद यही वजह है कि Kohli की कप्तानी को लेकर बहस आज भी खत्म नहीं होती।
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