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6 रुपये के लंच से करोड़ों के निवेश तकJohn Abraham की संघर्ष से सफलता की असली कहानी
मॉडलिंग से फिल्मों और फिर बिज़नेस इन्वेस्टमेंट तक — John Abraham ने कैसे बदली अपनी किस्मत
बॉलीवुड की चमक-धमक के पीछे कई सितारों की ऐसी कहानियां छुपी होती हैं, जो प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है जॉन अब्राहम की। आज करोड़ों की संपत्ति और बड़े-बड़े निवेशों के लिए पहचाने जाने वाले जॉन कभी ऐसे दौर से गुज़रे हैं, जब उनका लंच सिर्फ 6 रुपये में होता था।
हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जॉन अब्राहम ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि करियर की शुरुआत में पैसे की तंगी थी और हर खर्च सोच-समझकर करना पड़ता था। लेकिन वही दौर उन्हें मजबूत बना गया।
6 रुपये का लंच और बड़े सपने
जॉन ने बताया कि मुंबई में शुरुआती दिनों में उनका बजट बेहद सीमित था। वह एक साधारण कैंटीन में 6 रुपये में लंच करते थे।
“उस समय मेरे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे, लेकिन मेरे सपने बड़े थे,” जॉन ने कहा।
यह वही दौर था जब वह मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। मेहनत रंग लाई और धीरे-धीरे उन्हें विज्ञापनों और फिल्मों के ऑफर मिलने लगे।
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फिल्मों में पहचान
जॉन अब्राहम को असली पहचान मिली फिल्म जिस्म से। इसके बाद उन्होंने धूम, गरम मसाला, और मद्रास कैफे जैसी फिल्मों में अपनी अलग छाप छोड़ी।
खास बात यह रही कि जॉन ने सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने गंभीर और देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों में भी काम किया, जिससे उनकी छवि एक जिम्मेदार अभिनेता की बनी।
बड़े निवेश और बिज़नेस माइंड
जॉन अब्राहम सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक समझदार निवेशक भी हैं। उन्होंने कई स्टार्टअप्स और स्पोर्ट्स फ्रेंचाइज़ी में निवेश किया है।
वह फुटबॉल और फिटनेस से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी सक्रिय हैं। उनका मानना है कि कलाकार को अपने करियर के साथ-साथ आर्थिक भविष्य की भी योजना बनानी चाहिए।

“मैंने संघर्ष के दिन देखे हैं, इसलिए आज मैं हर फैसले में सतर्क रहता हूं,” जॉन ने कहा।
फिटनेस और अनुशासन
जॉन अब्राहम का नाम फिटनेस के साथ जुड़ा हुआ है। वह अपनी अनुशासित जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं।
उनका मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। संघर्ष, अनुशासन और सही दिशा में मेहनत ही असली पूंजी है।
संघर्ष से मिली सीख
जॉन की कहानी हमें यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है।
6 रुपये के लंच से लेकर करोड़ों के निवेश तक का सफर सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और दूरदर्शिता का भी है।
निष्कर्ष
आज जॉन अब्राहम एक सफल अभिनेता, निर्माता और निवेशक हैं। लेकिन उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भुलाया।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी से घबराते हैं।
सफलता रातों-रात नहीं मिलती — इसके पीछे वर्षों की मेहनत और धैर्य छुपा होता है।
