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जितेश शर्मा या संजू सैमसन? इरफ़ान पठान ने खोला राज—‘टीम इंडिया को अब एक ही रास्ते पर चलना होगा’

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत की प्लेइंग-XI में बदलाव ने बड़ा सवाल खड़ा किया—क्या फ़िनिशर की भूमिका के लिए संजू नहीं, बल्कि जितेश ही सही विकल्प हैं?

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Irfan Pathan on Jitesh vs Sanju: Why Team India Must Stick to One Finisher
जितेश शर्मा को मिली बढ़त, इरफ़ान पठान बोले—टीम इंडिया को अब फ़िनिशर की भूमिका पर टिके रहना होगा।

टी20 क्रिकेट में हर पोज़िशन की अपनी चुनौती होती है, लेकिन फ़िनिशर का रोल सबसे कठिन माना जाता है। तेज़ गेंदबाज़ों के बीच, डेथ ओवर्स का दबाव और रन रेट की मांग—सबकुछ एकदम अलग मानसिकता की माँग करता है। इसी भूमिका को लेकर अब इंडिया बनाम ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ में बहस तेज़ हो गई है, जहाँ जितेश शर्मा को संजू सैमसन के ऊपर तरजीह दी गई है।

पूर्व भारतीय ऑल-राउंडर इरफ़ान पठान का कहना है कि यह फैसला बिल्कुल सही दिशा में उठाया गया कदम है।
उनके शब्दों में:
“यह एक फेयर कॉल है… संजू सैमसन को पूरी करियर टॉप-3 में बल्लेबाज़ी मिली है। नीचे आकर खेलना बिल्कुल अलग चुनौती है। टीम इंडिया को अब एक ही योजना पर टिके रहना चाहिए।”


इरफ़ान पठान ने क्यों कहा—‘जितेश पर भरोसा रखना होगा’?

इरफ़ान ने स्टार स्पोर्ट्स पर चर्चा के दौरान साफ़ कहा कि—

  • सैमसन का ज्यादातर करियर टॉप-ऑर्डर में बीता है।
  • नीचे आकर खेलना उनकी नैचुरल गेम के ख़िलाफ़ जाता है।
  • वहीं जितेश शर्मा घरेलू क्रिकेट और IPL में स्पेशलिस्ट फ़िनिशर के रूप में स्थापित हैं।

उन्होंने चेतावनी भी दी:
“अगर आप बार-बार बदलाव करेंगे तो आगे मुश्किलें बढ़ेंगी। टीम को एक दिशा चुननी होगी।”

बिल्कुल सही भी है—टी20 वर्ल्ड कप से पहले टीम इंडिया ने पहले ही यह तय कर लिया है कि डेथ ओवरों में तेज़ रन बनाने के लिए जितेश जैसा बल्लेबाज़ ज़रूरी है, जो पहली गेंद से आक्रमण कर सके।


संजू सैमसन का रोल क्यों बदलना पड़ा?

जब शुभमन गिल चोट से उबरकर वापसी करते हुए ओपनिंग में लौटे, सैमसन को लाइन-अप में नीचे भेजा गया।
लेकिन

  • मिडिल ऑर्डर में उनका स्ट्राइक रेट गिरा,
  • उनकी नेचुरल टाइमिंग वाली गेमप्ले को स्पिन और स्लॉग-ओवर प्रेशर में वही धार नहीं मिली।

वहीं जितेश शर्मा को मौका मिला और उन्होंने अपनी ताकत—पहली गेंद से अटैक—के साथ प्रभावित किया।


जितेश बोले—“संजू भैया मेरे बड़े भाई जैसे हैं”

टीम के अंदर प्रतिस्पर्धा के बावजूद कोई कड़वाहट नहीं है।
भारत-दक्षिण अफ्रीका मैच के बाद जितेश ने कहा:

“संजू भैया मेरे बड़े भाई जैसे हैं। उनकी मौजूदगी से सीखने को मिलता है। अच्छी प्रतियोगिता ही असली प्रतिभा बाहर लाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें संजू जैसे बड़े खिलाड़ी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना है, तो उन्हें हमेशा अपनी A-game लानी होगी।

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टीम इंडिया की सोच क्या हो सकती है?

टी20 वर्ल्ड कप नज़दीक है और भारत एक स्थिर संयोजन चाहता है।
ऐसे में:

  • टॉप ऑर्डर में गिल, सूर्यकुमार और तिलक वर्मा
  • मिडिल में हार्दिक पांड्या और ऋतुराज की फ्लोटिंग भूमिका
  • और फ़िनिशर के रूप में जितेश शर्मा

—यह संरचना काफी बैलेंस्ड दिखाई देती है।

सैमसन बड़े मैच विनर हैं, लेकिन वे शायद फ़्लेक्सिबल फ़िनिशर की टीम मांग में फिट न बैठ रहे हों।
टीम मैनेजमेंट शायद यही कारण है कि एक ही रोल के लिए दो खिलाड़ियों को परीक्षण में रखकर अस्थिरता नहीं चाहता।


निष्कर्ष

इरफ़ान पठान की टिप्पणी सिर्फ़ चयन पर राय नहीं, बल्कि टीम इंडिया की दीर्घकालिक रणनीति की ओर इशारा है।
टी20 क्रिकेट में भूमिकाएँ स्पष्ट होना सबसे ज़रूरी है—और फिलहाल जितेश शर्मा उस भूमिका में अधिक सहज और तैयार दिखते हैं।

सवाल अब यह है कि आने वाली सीरीज़ में यह भरोसा स्थायी बनता है या सैमसन एक बार फिर अपनी क्लास का परिचय देकर भूमिका वापस हथिया लेते हैं।

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