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“IndiGo पर नई FDTL नियमों की बड़ी मार—एक दिन में 200 फ्लाइटें कैसे रद्द हुईं? असली वजहें अब सामने!”
नई Flight Duty Time Limitation (FDTL) नियम सभी एयरलाइनों पर लागू हुए, लेकिन सबसे ज़्यादा झटका IndiGo को लगा। आखिर क्यों? जानिए कैसे क्रू की कमी, नाइट फ़्लाइट्स और हाई-फ्रीक्वेंसी नेटवर्क ने हालात बिगाड़ दिए।
पिछले कुछ दिनों में एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का जो नज़ारा देखने को मिला, उसकी वजह एक ही नाम था—IndiGo। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, जो घरेलू यात्रियों के 60% से अधिक ट्रैफिक को संभालती है, अचानक भारी फ्लाइट कैंसिलेशन के संकट में फंस गई।
बुधवार को अकेले लगभग 200 उड़ानें रद्द होने से यात्रियों में नाराज़गी चरम पर पहुँच गई। सोशल मीडिया पर लंबी कतारों, घंटों के इंतज़ार और महंगे वैकल्पिक टिकटों को लेकर ग़ुस्सा साफ दिखा।
लेकिन बड़ा सवाल है—
नई FDTL नियम तो सभी एयरलाइनों पर लागू हुए… फिर IndiGo ही क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित हुई?
नई FDTL नियम क्या हैं और क्यों बढ़ा संकट?
नई Flight Duty Time Limitation (FDTL) नॉर्म्स को दो चरणों में लागू किया गया—जुलाई और नवंबर 2025। इन नियमों के तहत:
- पायलटों की साप्ताहिक आराम अवधि 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दी गई।
- नाइट लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2 कर दी गई।
- “नाइट आवर्स” की परिभाषा भी एक घंटे बढ़ा दी गई।
- थकान (fatigue) कम करने के उद्देश्य से duty hours पर और कड़े नियम लागू हुए।
ये बदलाव एविएशन सेफ्टी के लिए ज़रूरी थे, लेकिन कई एयरलाइनों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि लागू होते ही अधिक पायलटों की आवश्यकता पड़ेगी।
IndiGo क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित? उड़ान मॉडल ही बना बड़ी समस्या
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार इसके चार बड़े कारण हैं:
1. IndiGo का ऑपरेशन बहुत बड़ा—हर छोटी गड़बड़ी का बड़ा असर
IndiGo के पास 400 से अधिक विमान हैं और यह 2,300+ उड़ानें रोज़ उड़ाती है।
ऐसे में
- 10% फ्लाइट रद्द भी हों तो
- 230 से अधिक उड़ानें प्रभावित हो जाती हैं।
जबकि Air India, जो दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन है, उतनी उड़ानें ऑपरेट ही नहीं करती।

2. नाइट फ्लाइट्स पर सबसे ज्यादा निर्भरता
IndiGo का नेटवर्क हाई-फ्रीक्वेंसी है, जिसमें लेट-नाइट और ‘रेड-आई’ फ्लाइट्स की संख्या सबसे अधिक है।
लेकिन नई FDTL नियमों ने नाइट ऑपरेशन को सीमित कर दिया।
इसका सीधा असर पड़ा—
शेड्यूल, क्रू प्लानिंग और ड्यूटी आवर्स सब बिगड़ गए।
3. Lean Crew Model—कम पायलट, ज्यादा उड़ानें
IndiGo लंबे समय से
- कम स्टाफ,
- ज्यादा विमानों का उपयोग
करने वाले मॉडल पर काम करती है।
यह मॉडल तब तक कारगर है जब तक नियम सख्त नहीं होते।
लेकिन नए FDTL नियमों में अधिक पायलट और बैकअप क्रू की जरूरत पड़ी—जिसके लिए IndiGo तैयार नहीं थी।
4. अन्य एयरलाइनों के पास ‘स्पेयर क्रू’ ज्यादा था
Air India, Vistara, Akasa जैसी एयरलाइंस अभी
- नए विमानों की डिलीवरी में देरी
- रखरखाव के कारण कई विमान ग्राउंडेड
से जूझ रही हैं।
इस वजह से वे अपने पायलटों का उतना उपयोग नहीं कर पातीं—
मतलब उनके पास क्रू उपलब्ध था।
IndiGo के पास यह सुविधा नहीं थी।
यात्रियों की मुश्किलें—महंगे टिकट, बदलती फ्लाइटें
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत कई शहरों के एयरपोर्ट्स पर:
- घंटों लंबी कतारें
- देर रात फंसे हुए यात्री
- आखिरी समय पर कैंसिलेशन
- दूसरे कैरियर्स की महंगी टिकटें
इन सबने यात्रा अनुभव को बेहद कठिन बना दिया।
DGCA की सख़्ती: IndiGo को स्पष्टीकरण देना होगा
DGCA ने IndiGo को नोटिस देते हुए “पूरी स्थिति का विवरण” और मिटिगेशन प्लान जमा करने को कहा है।
नवंबर के आंकड़े चौंकाते हैं:
- कुल 1,232 फ्लाइट कैंसिलेशन में से
- 755 FDTL और क्रू मुद्दों के कारण
- 258 एयरस्पेस समस्याओं से
- 92 ATC फेलियर से
- 127 अन्य कारणों से
On-Time Performance (OTP) भी
- अक्टूबर में 84% → नवंबर में 67.7%
- दिसंबर में तो 20% तक गिर गया
IndiGo का बयान—“Unforeseen Challenges”
एयरलाइन ने कहा कि उन्हें सामना करना पड़ा:
- टेक्निकल गड़बड़ियों
- विंटर शेड्यूल बदलाव
- मौसम खराब होने
- एयर ट्रैफिक कंजेशन
- और नए FDTL नियमों के प्रभाव
से।
IndiGo का दावा है कि वह अब Crew Rostering, ATC Coordination और Turnaround Time सुधारने के लिए तेज़ी से काम कर रही है।
पायलट संघों का आरोप—“IndiGo ने तैयारी ही नहीं की”
ALPA और FIP दोनों ने इंडिगो पर गंभीर आरोप लगाए:
- पायलटों की हायरिंग फ्रीज़
- लीव कोटा कम करना
- पायलटों का ‘लीव बायबैक’
- क्रू कम रखकर लागत घटाने की कोशिश
- प्रबंधन की “100% तक वेतन वृद्धि” लेकिन पायलटों का वेतन ठप
FIP ने तो यहां तक कहा कि:
“IndiGo स्लॉट्स को ब्लॉक कर रही है, DGCA तुरंत इन्हें Air India और Akasa जैसी एयरलाइनों को दे।”
अब आगे क्या? क्या उड़ानें सामान्य होंगी?
IndiGo ने वादा किया है कि
- शेड्यूल को “कैलिब्रेट” किया जा रहा है,
- कुछ फ्लाइटें रद्द की जाएंगी,
- क्रू उपलब्धता के अनुसार नए शेड्यूल लागू होंगे।
उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि स्थिति
10–15 दिनों में धीरे-धीरे सुधरेगी,
लेकिन दिसंबर—जो एयर ट्रैवल का पीक सीजन है—यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है।
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