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IndiGo की अफरातफरी के बीच स्टाफ की शांत प्रतिक्रिया वायरल—’Maine apne aap ko train kar liya hai’, यात्री बोले: ऐसे लोग ही सिस्टम संभालते हैं
10 घंटे की देरी, गुस्से में यात्री—लेकिन इंडिगो स्टाफर की मुस्कान और परिपक्व जवाब ने इंटरनेट का दिल जीत लिया।
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों भारी देरी और कैंसिलेशन के कारण सुर्खियों में है। लंबी कतारें, नाराज़ यात्री और 7–8 घंटे की उड़ानों में देरी अब आम हो चुकी है। लेकिन इसी अफरातफरी के बीच एक स्टाफ सदस्य के शांत, विनम्र और असाधारण जवाब ने सोशल मीडिया पर इंसानियत की एक खुशनुमा लहर ला दी।
यह कहानी सामने आई LinkedIn यूज़र प्रतीक मलपानी की पोस्ट से, जिन्होंने बताया कि उनकी 7 बजे रात की दिल्ली उड़ान करीब 10 घंटे लेट हुई और सुबह 5 बजे उड़ान भर सकी। इस दौरान गुस्सा, बेचैनी और शिकायतों से भरे माहौल में एक युवा IndiGo ग्राउंड स्टाफ सदस्य पूरे धैर्य और संयम के साथ यात्रियों की नाराज़गी झेलती रही।

“Sir, maine apne aap ko train kar liya hai…” — जिसने इंटरनेट का दिल जीत लिया
जब प्रतीक मलपानी ने दो घंटे तक माहौल देखते हुए उस कर्मचारी से कहा कि वह यात्रियों का गुस्सा दिल पर न ले, तो उसका जवाब सुनकर वे हैरान रह गए। उसने मुस्कुराते हुए कहा—
“Sir, maine toh apne aap ko train kar liya hai — bade daant rahe ho toh samjhenge maa-baap daant rahe hain, chhote daantenge toh samjhenge bhai-behen se ladai ho rahi है. Aur kya kar sakte hain?”
उसने आगे कहा—
“Thode din baad aap phir se aaoge, hum phir bolenge ‘IndiGo mein aapka swagat hai.’ Life will be normal again.”
यह जवाब न सिर्फ परिपक्वता दिखाता है बल्कि सर्विस इंडस्ट्री के उन कर्मचारियों की मजबूरी भी, जिन्हें ऑपरेशनल समस्याओं का भार खुद पर झेलना पड़ता है, जबकि वे किसी भी परिस्थिति के लिए सीधे ज़िम्मेदार नहीं होते।
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया सम्मान और सहानुभूति का इज़हार
यह पोस्ट कुछ ही घंटों में वायरल हो गई। LinkedIn पर लोगों ने स्टाफर के धैर्य, मानसिक शक्ति और “कस्टमर सर्विस की असली भावना” की तारीफ की।
एक यूज़र ने लिखा—
“मैंने कभी नहीं समझा कि लोग वेटस्टाफ पर क्यों चिल्लाते हैं। इससे समस्या हल नहीं होती।”
दूसरे ने कहा—
“Kindness isn’t soft. It’s a strength that calms situations. आवाज़ उठाने से नहीं, समझदारी दिखाने से सिस्टम चलता है।”
तीसरे यूज़र ने सच्चाई कही—

“चीखते-चिल्लाते लोगों के बीच शांत रहना हर किसी के बस की बात नहीं।”
एक अन्य व्यक्ति ने लिखा—
“इंडिगो के ग्राउंड स्टाफ की पेशेवराना शांति और मेहनत को सलाम।”
IndiGo संकट—स्टाफ ही बन रहे ‘मानव ढाल’
फ्लाइटों की देरी ने यात्रियों का धैर्य खो दिया है। लेकिन असलियत यह है कि ग्राउंड स्टाफ और फ्रंटलाइन कर्मचारी ही सबसे ज़्यादा भावनात्मक और मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
- वे कारण नहीं हैं,
- वे समाधान नहीं निकाल सकते,
- फिर भी सबसे ज़्यादा गुस्सा उन्हीं पर निकलता है।
इस घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि हम सर्विस सेक्टर के कर्मचारियों से कैसे पेश आते हैं—और क्यों “सहानुभूति” कभी पुरानी नहीं पड़ती।
एक छोटी मुस्कान, एक बड़ा सबक
IndiGo स्टाफर का जवाब हमें यह याद दिलाता है कि—
थोड़ी सी इंसानियत किसी भी तनावपूर्ण स्थिति को हल्का कर सकती है।
और कभी-कभी, ठीक उसी समय जब सिस्टम फेल हो रहा हो, कोई एक शांत आवाज़ ही स्थिति को संभाल लेती है।
