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संयुक्त राष्ट्र में भारत को मिले उसका ‘हकदार स्थान’, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीमो स्टार्मर का बड़ा बयान
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीमो स्टार्मर ने मुंबई में पीएम मोदी के साथ मुलाकात के बाद कहा—भारत को अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए, ताकि वैश्विक व्यवस्था में वास्तविक समानता आ सके।
मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर के बीच हुई मुलाकात ने भारत की कूटनीतिक ताकत को फिर सुर्खियों में ला दिया है। इस बैठक के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में उसका “हकदार स्थान” मिलना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब विश्व राजनीति में भारत की भूमिका लगातार मज़बूत होती जा रही है।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। वर्तमान में परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं—अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और चीन। इनमें से एशिया का एकमात्र स्थायी सदस्य चीन है, जिससे भारत के संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहे हैं।
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पिछले कुछ वर्षों में भारत के इस दावे को कई देशों ने समर्थन दिया है। अमेरिका (जब राष्ट्रपति जो बाइडेन थे), फ्रांस, जर्मनी, जापान, ब्राज़ील और अफ्रीकी यूनियन जैसे देशों ने खुले तौर पर कहा है कि भारत को अब UNSC में शामिल किया जाना चाहिए ताकि यह संगठन “अधिक प्रतिनिधिक” बने।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी हाल ही में कहा था कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से अधिक प्रतिनिधित्व होना चाहिए, जिसमें भारत की भूमिका अहम है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी सितंबर 2023 में कहा था कि वे भारत की मांग को पूरी तरह समझते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सदस्य देशों को लेना होगा।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले वर्ष रूस के कज़ान में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में कहा था कि “विश्व को अब समान और न्यायपूर्ण व्यवस्था की ज़रूरत है, जिसके लिए पुरानी संस्थाओं में सुधार आवश्यक है।”
भारत-यूके साझेदारी में नया अध्याय
भारत और ब्रिटेन के बीच यह बातचीत केवल कूटनीतिक स्तर पर नहीं रही। दोनों नेताओं ने व्यापार, रक्षा, डिजिटल तकनीक, फिल्म, और खेल जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की।
जुलाई में हुए व्यापार समझौते के तहत भारत ने ब्रिटिश व्हिस्की, कॉस्मेटिक्स और मेडिकल उपकरणों पर शुल्क घटाने का निर्णय लिया है, जबकि ब्रिटेन कपड़ों, जूतों और खाद्य उत्पादों पर टैक्स कम करेगा।

दोनों देशों के बीच लगभग $54.8 बिलियन का व्यापार होता है और यह साझेदारी करीब 6 लाख नौकरियों को समर्थन देती है।
पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा, “भारत और ब्रिटेन स्वाभाविक साझेदार हैं। हम साथ मिलकर वैश्विक स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिए काम कर रहे हैं।”
स्टार्मर ने भी भारत की ‘अद्भुत विकास यात्रा’ की तारीफ की और कहा कि ब्रिटेन भारत के साथ मिलकर न केवल व्यापारिक बल्कि सांस्कृतिक रिश्तों को भी और गहरा करेगा।
वैश्विक शांति और भारत की भूमिका
दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत में यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल थे। भारत ने साफ कहा कि वह किसी भी संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से चाहता है।
भारत की यह संतुलित नीति ही उसे विश्व राजनीति में एक भरोसेमंद ताकत बनाती है। ब्रिटेन के समर्थन से भारत की UNSC सदस्यता की संभावना पहले से कहीं अधिक मज़बूत दिखाई दे रही है।
अब दुनिया यह स्वीकार करने लगी है कि यदि वैश्विक संस्थाओं को सच में “न्यायसंगत और प्रतिनिधिक” बनाना है, तो भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाना ही होगा।
