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2024 में सड़क हादसों में 1.77 लाख मौतें! हर दिन 485 जानें गईं—संसद में चौंकाने वाला खुलासा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया—2023 की तुलना में 2.5% बढ़ी सड़क दुर्घटनाओं में मौतें। विशेषज्ञों ने कहा—तेज़ रफ़्तार, खराब रोड इंजीनियरिंग और कमज़ोर सुरक्षा मानकों से बिगड़ी स्थिति।
भारत में सड़क सुरक्षा की स्थिति 2024 में और खराब होती दिखी है। संसद में गुरुवार को पेश किए गए आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि सड़क दुर्घटनाओं का संकट सिर्फ जारी ही नहीं है, बल्कि लगातार बढ़ भी रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि वर्ष 2024 में सड़क हादसों में 1,77,177 लोगों की मौत हुई, जो 2023 के 1,72,890 के आंकड़े से 2.5% अधिक है।
इसका मतलब है—
हर दिन औसतन 485 लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा रहे हैं।
यह आंकड़ा न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि देश की तेज़ सड़क निर्माण गति सुरक्षा मानकों से कहीं आगे निकल चुकी है।
“भारत अभी उस सेचुरेशन पॉइंट पर नहीं पहुंचा”—CRRI विशेषज्ञ
सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के प्रमुख वैज्ञानिक एस. वेलमुरुगन ने कहा कि भारत अभी भी सड़क सुरक्षा के उस मुकाम पर नहीं पहुंचा है जहां दुर्घटनाओं के आंकड़े स्थिर होने लगते हैं।

उन्होंने बताया—
- विकसित देशों में 1990 के दशक में रोड फैटलिटीज़ स्थिर होने लगी थीं
- भारत में वाहन तेजी से बढ़ रहे हैं
- हाईवे लगातार बन रहे हैं
- लेकिन सुरक्षा मानकों का ज़मीनी स्तर पर पालन नहीं हो रहा
उनके अनुसार—
“हम 40 किमी प्रतिदिन की रफ़्तार से हाईवे बना रहे हैं, पर कागज़ पर मौजूद सुरक्षा सुविधाएँ फील्ड पर दिखाई नहीं देतीं।”
स्पीडिंग और खराब इंजीनियरिंग—भारत की सबसे बड़ी समस्या
CRRI विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों में दो कारक सबसे बड़ा रोल निभाते हैं—
- ओवरस्पीडिंग
- फॉल्टी रोड इंजीनियरिंग
वेलमुरुगन का कहना है कि कई हाईवे ऐसे हैं जो बस्तियों को चीरते हुए निकलते हैं, लेकिन वहां पैदल यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं होतीं—ज़ेब्रा क्रॉसिंग, अंडरपास, फुटओवर ब्रिज आदि का अभाव सीधे तौर पर हादसों की वजह बनता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि—
“स्पीड पकड़ने के लिए एक ही कैमरा अब कारगर नहीं है। ड्राइवर सिर्फ कैमरा देखकर धीमे हो जाते हैं। सेक्शनल स्पीड मॉनिटरिंग—यानी हर टोल प्लाज़ा के बीच गति मापना—ज़रूरी है।”
गडकरी का जवाब: 2030 तक 50% कमी का लक्ष्य
सड़क हादसों पर संसद में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि—
- 2020 में स्टॉकहोम डिक्लेरेशन ऑन रोड सेफ्टी के तहत 2030 तक सड़क हादसों और चोटों में 50% की कमी का लक्ष्य तय किया गया है
- भारत इस समझौते का हिस्सा है
उन्होंने यह भी बताया कि—
- भारत में प्रति लाख जनसंख्या पर सड़क दुर्घटना मृत्यु दर 11.89 है
- तुलना में:
- चीन—4.3
- अमेरिका—12.76
भारत की स्थिति अमेरिका से बेहतर नहीं, लेकिन चीन से बहुत पीछे है।
कितने लोगों को मिला निशुल्क इलाज?
एक अन्य प्रश्न के जवाब में गडकरी ने बताया—
- 5,480 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को Motor Vehicle Accident Fund के तहत कैशलेस इलाज मिला
- देशभर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 32,557 अस्पताल इस योजना के तहत पंजीकृत हैं
यह योजना गंभीर हादसा पीड़ितों को गोल्डन ऑवर के भीतर उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

भारत के लिए सबक—सुरक्षा के बिना तेज़ी बेकार
2024 के आंकड़े साफ चेतावनी दे रहे हैं—
- सड़कें भले बेहतर बन रही हों
- देश हाइवे निर्माण में दुनिया के टॉप देशों में शामिल हो चुका है
- लेकिन सुरक्षा उपायों के बिना यह विकास अधूरा है
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत को 2030 का लक्ष्य पाना है,
तो—
- इंजीनियरिंग सुधरनी होगी
- स्पीड मॉनिटरिंग सख्त करनी होगी
- जनजागरूकता बढ़ानी होगी
- और नियमों का बेहिचक पालन कराना होगा
वरना हर साल बढ़ते ये आंकड़े भारत के लिए सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल सकते हैं।
