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408 रन की सबसे बड़ी शर्मनाक हार! भारत टेस्ट क्रिकेट के सबसे निचले स्तर पर? जानें क्या गलत हुआ

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भारत की सबसे बड़ी 408 रन की हार! दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से सीरीज जीती – क्या खत्म हुआ घरेलू वर्चस्व?
दक्षिण अफ्रीका की ऐतिहासिक 408 रन की जीत के बाद मायूस भारतीय खिलाड़ी

टीम इंडिया का टेस्ट क्रिकेट में घरेलू वर्चस्व टूट चुका है। गुवाहाटी में मिली 408 रन की करारी हार सिर्फ एक मैच का परिणाम नहीं, बल्कि उस मजबूत किले के ढहने की आवाज है जिसे भारत ने सालों तक अपने घरेलू मैदानों पर बनाया था। दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से सीरीज जीतकर इतिहास रच दिया और भारत के लिए यह हार कई कड़वे सवाल छोड़ गई।

यह पहली बार है जब किसी टीम ने भारत को टेस्ट मैच में 400 रन से ज्यादा के अंतर से हराया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2004 में ऑस्ट्रेलिया के पास था, जब नागपुर में भारत को 342 रन से हार झेलनी पड़ी थी।

दक्षिण अफ्रीका के लिए यह जीत दो दशक बाद भारत की धरती पर पूर्ण टेस्ट सीरीज जीत है। आखिरी बार उन्होंने 2000-01 में ऐसा किया था। उस टीम का हिस्सा जैक्स कैलिस और शॉन पोलक जैसे दिग्गज थे, और अब 2025 में इस उपलब्धि को दोहराया गया है।

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भारत की सबसे बड़ी हारें (रनों के आधार पर)

408 रन vs दक्षिण अफ्रीका (2025)
342 रन vs ऑस्ट्रेलिया (2004)
341 रन vs पाकिस्तान (2006)
337 रन vs ऑस्ट्रेलिया (2007)
333 रन vs ऑस्ट्रेलिया (2017)

कैसे ढह गई भारत की बल्लेबाज़ी?

549 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की शुरुआत ही खराब रही। पहले ही दिन यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल सस्ते में आउट हो गए। चौथे दिन टीम 27/2 पर थी, और पांचवें दिन पूरी भारतीय बल्लेबाज़ी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।

बी. साई सुदर्शन ने 139 गेंदों पर केवल 14 रन बनाकर ड्रा की कोशिश भले की, लेकिन यह संघर्ष टीम को बचा नहीं पाया।
रविंद्र जडेजा ने फिफ्टी लगाई, पर वह भी सिर्फ सांत्वना साबित हुई।

दक्षिण अफ्रीका की जीत का असली हथियार – स्पिन जाल

दक्षिण अफ्रीका के ऑफ स्पिनर साइमन हार्मर ने भारत की बल्लेबाज़ी पर ऐसी पकड़ बनाई कि बल्लेबाज क्रीज पर टिक ही नहीं पाए। उन्होंने दूसरी पारी में 6 विकेट झटके, जबकि केशव महाराज और सेनुरन मुथुसामी ने लगातार दबाव बनाकर विकेट गिराए।

पहली पारी में तेज गेंदबाज़ मार्को यानसन की 6/48 की घातक गेंदबाज़ी ने भारत की उम्मीदें उसी समय खत्म कर दी थीं।

भारत की सबसे बड़ी 408 रन की हार! दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से सीरीज जीती – क्या खत्म हुआ घरेलू वर्चस्व?


भारत कहाँ पिछड़ गया?

विशेषज्ञों और प्रशंसकों के मुताबिक भारत की हार के कारण:

तकनीकी कमजोरियाँ
रिवर्स स्पिन खेलने में कठिनाई
खराब शॉट चयन
मानसिक दृढ़ता की कमी
टीम योगदान का अभाव

दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका के किसी खिलाड़ी ने शतक नहीं लगाया, फिर भी टीम ने सामूहिक प्रयास से जीत दर्ज की। यह वैसा ही मॉडल है जैसा 2023 में इंग्लैंड ने एशेज में अपनाया था, जहां छोटे-छोटे योगदानों ने मैच पलट दिए थे।

भारत इसके उलट व्यक्तिगत प्रदर्शन पर निर्भर दिखा।

क्या यह चेतावनी है?

यह हार उस तरह की है जिसने 2011 में इंग्लैंड में 4-0 क्लीन स्वीप के बाद टीम इंडिया को बदलाव करने पर मजबूर किया था। उसी बदलाव ने आगे चलकर 2018 और 2021 में विदेशी जीतों के रास्ते खोले थे।

अब वही मोड़ फिर सामने है।

आगे क्या?

ODI सीरीज से पहले टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा:

  • क्या बल्लेबाजी क्रम में बदलाव होगा?
  • क्या युवा खिलाड़ियों को मौका मिलेगा?
  • क्या टीम नई स्पिन रणनीति अपनाएगी?

कोच राहुल द्रविड़ पर भी सवाल उठ रहे हैं कि टीम मानसिक रूप से क्यों तैयार नहीं दिखी।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा छाई हुई है, कई फैंस ने लिखा:
“घरेलू किले की दीवारें गिर चुकी हैं। बदलाव जरूरी है!”

यह हार सिर्फ एक मैच नहीं, एक चेतावनी है। अगर भारत ने सीख नहीं ली, तो आने वाले महीनों में टेस्ट क्रिकेट में और गिरावट देखने को मिल सकती है।