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Ikkis box office collection day 2: Agastya Nanda की फिल्म की रफ्तार धीमी, फिर भी 10 करोड़ क्लब में एंट्री
Sriram Raghavan की war drama Ikkis को दूसरे दिन झटका, Dhurandhar की मजबूत मौजूदगी से बढ़ी चुनौती
साल 2026 की पहली रिलीज़ रही Ikkis ने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआती दो दिनों में मिला-जुला प्रदर्शन किया है। Sriram Raghavan के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर उम्मीद से बेहतर कमाई की थी, लेकिन दूसरे दिन इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी नजर आई। इसके बावजूद फिल्म ने दो दिनों में ₹10 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है।
Sacnilk की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, Ikkis ने रिलीज़ के दूसरे दिन करीब ₹3.50 करोड़ की कमाई की। यह आंकड़ा पहले दिन के ₹7 करोड़ के मुकाबले कम जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म की दो दिन की box office collection ₹10.50 करोड़ तक पहुंच चुकी है। ट्रेड एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिल्म को मिली positive reviews ने इसकी ओपनिंग को मजबूत बनाया, हालांकि दूसरे दिन competition का असर साफ दिखा।
दरअसल, Ikkis को बॉक्स ऑफिस पर सीधी टक्कर मिल रही है Dhurandhar से, जिसमें Ranveer Singh लीड रोल में हैं। Dhurandhar ने अपने 29वें दिन भी ₹6.63 करोड़ की कमाई की और इसका कुल कलेक्शन ₹745.63 करोड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में Ikkis के लिए दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना आसान नहीं रहा।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी और भावनात्मक गहराई मानी जा रही है। Ikkis भारत के सबसे कम उम्र के Param Vir Chakra विजेता Arun Khetarpal के जीवन पर आधारित है। 1971 के Indo-Pak War की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म Arun Khetarpal के सैन्य प्रशिक्षण से लेकर युद्धभूमि तक के सफर को दिखाती है, जहां उन्होंने मात्र 21 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

फिल्म में Agastya Nanda ने Second Lieutenant Arun Khetarpal की भूमिका निभाई है, जबकि दिग्गज अभिनेता Dharmendra उनके पिता के किरदार में नजर आते हैं। यह Dharmendra का आखिरी ऑन-स्क्रीन प्रदर्शन है, जो फिल्म को भावनात्मक रूप से और भी खास बनाता है। Dharmendra का निधन फिल्म की रिलीज़ से करीब एक महीने पहले हो गया था, जिससे दर्शकों के लिए यह फिल्म एक भावुक अनुभव बन गई है।
Ikkis में Jaideep Ahlawat और Simar Bhatia भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। फिल्म को Maddock Films ने प्रोड्यूस किया है।
Hindustan Times की समीक्षा के अनुसार, Ikkis “तब सबसे ज्यादा असरदार बनती है जब वह एक पारंपरिक war film बनने की कोशिश छोड़ देती है और एक दर्दनाक सच्चाई की तरह सामने आती है। यह याद दिलाती है कि हमारी आज़ादी उन लोगों की कुर्बानी से मिली, जिन्हें अपनी ज़िंदगी जीने का मौका ही नहीं मिला।” यही वजह है कि फिल्म देखने के बाद दर्शक गर्व से ज्यादा खालीपन और भारी मन के साथ थिएटर से बाहर निकलते हैं।
अब सबकी नजरें Ikkis के वीकेंड कलेक्शन पर टिकी हैं। अगर word of mouth मजबूत रहा, तो आने वाले दिनों में फिल्म अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है।
