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Hema Malini का चौंकाने वाला खुलासा शादी से पहले जिस मुंबई बंगले में रहीं वहां कोई उन्हें दबोचता था
दिग्गज अभिनेत्री हेमा मालिनी ने बताया कि 1970 के दशक में मुंबई के एक बंगले में रहते हुए उन्हें हर रात घुटन और किसी अदृश्य ताकत द्वारा गला दबाने जैसा अनुभव होता था।
बॉलीवुड की “ड्रीम गर्ल” कही जाने वाली हेमा मालिनी का नाम सुनते ही खूबसूरत किरदार, हरे-भरे घर और सादगी भरी जिंदगी की तस्वीर उभरती है। लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी निजी ज़िंदगी से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया जिसने फिल्मी दुनिया के साथ-साथ उनके प्रशंसकों को भी हैरान कर दिया। हेमा जी के मुताबिक, विवाह से पहले मुंबई के जिस बंगले में वह रहीं, वहां उन्हें महीनों तक डरावनी घुटन महसूस होती रही। उनका कहना है, “मुझे हर रात लगता था कि कोई मुझे दबोच रहा है, सांस लेना मुश्किल हो जाता था।”
दक्षिण से मुंबई तक का सफर
हेमा मालिनी का बचपन चेन्नई और दिल्ली जैसे शहरों में बीता, जहां उनका परिवार बड़े और खुले बंगले में रहता था। पेड़ों से घिरा वह घर उन्हें हमेशा सुकून देता था। यही वजह थी कि जब वह काम के सिलसिले में मुंबई आईं और अपार्टमेंट संस्कृति से सामना हुआ, तो उन्हें वह माहौल रास नहीं आया। 1972 में फिल्म सीता और गीता की शूटिंग के दौरान उन्होंने पहली बार अपना खुद का बंगला खरीदने का सपना देखा।
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1972 में ही हेमा के पिता ने साउथ मुंबई के वालकेश्वर इलाके में उनके लिए समुद्र-मुखी एक विशाल फ्लैट खरीद लिया। सेट पर फोन कर उन्होंने पूछा, “बेटा, तुम्हें यह घर पसंद है?” तब हेमा जी ने पहली बार खुलकर कहा कि उन्हें फ्लैट में रहना अच्छा नहीं लगता; वह उसी तरह का घर चाहती हैं जैसा चेन्नई में था—ढेर सारे पेड़ों वाला बंगला। यहीं से उनके पिता ने जुहू में बंगलों की तलाश शुरू की।
बांद्रा और बांद्रा से बांद्रा का छोटा पड़ाव
अपने हिंदी डेब्यू सपनों का सौदागर में राज कपूर के साथ काम करते हुए हेमा मालिनी एक छोटे से बांद्रा अपार्टमेंट में भी रहीं। वह जगह असल में कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर भानु अथैया द्वारा ड्रेस ट्रायल के लिए इस्तेमाल होती थी। उस तंग स्पेस ने हेमा जी के भीतर खुली हवा वाले घर की चाहत और बढ़ा दी। लेकिन इसके बाद जब वह एक किराये के बंगले में शिफ्ट हुईं, तो असली परेशानी शुरू हुई।

वह बंगला जो डर का दूसरा नाम बन गया
किताब हेमा मालिनी बियॉन्ड द ड्रीम गर्ल में दर्ज संस्मरणों का हवाला देते हुए हेमा मालिनी ने बताया कि शुरुआती दिनों में जिस बंगले में वह रहीं, वह कथित तौर पर “भुतहा” था। उन्हें लगातार असहजता, भारीपन और अदृश्य मौजूदगी का एहसास होता था। हेमा जी कहती हैं—
“हर रात मुझे ऐसा लगता जैसे कोई मेरे सीने पर बैठा है और मेरा गला दबा रहा है। मैं ठीक से सो नहीं पाती थी, कई बार डॉक्टरों को भी दिखाया, मगर कोई शारीरिक कारण नहीं मिला।”
बंगले में महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। घर हरा-भरा जरूर था, लेकिन हेमा जी के लिए वह हरियाली भी डर के साये में डूब गई। परिवार के सदस्यों ने जब उनकी हालत देखी तो उस घर को छोड़ने का फैसला किया गया।
जूहू का सुकून और धर्मेंद्र से रिश्ता
इसके बाद हेमा मालिनी स्थायी तौर पर जुहू के अपने बंगले में आ गईं, जहां उन्हें वास्तविक शांति मिली। 1980 में उन्होंने अभिनेता धर्मेंद्र से विवाह किया और उसी घर में नई जिंदगी की शुरुआत की। हेमा जी ने बताया कि शादी के बाद उन्हें कभी वैसी घुटन महसूस नहीं हुई।
क्या सच में कोई उन्हें दबोचता था?
इस मुद्दे पर मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक डर और घुटन का अनुभव “स्लीप पैरालिसिस” या नए शहर में एडजस्टमेंट तनाव से भी जुड़ा हो सकता है। लेकिन हेमा मालिनी इसे आध्यात्मिक और अलौकिक घटना मानती हैं। उनके अनुसार यह कोई सामान्य भय नहीं, बल्कि वास्तविक अनुभूति थी।
1970 का दशक और हेमा मालिनी का स्टारडम
दिलचस्प यह है कि यह वही दौर था जब हेमा मालिनी सीता और गीता, शोले और सपनों का सौदागर जैसी फिल्मों से शीर्ष पर थीं। उस चमकते करियर के पीछे एक डरी-सहमी लड़की भी थी जो हर रात अपने कमरे में अनजान साये से लड़ती थी।
हरियाली से प्रेम, पर फ्लैट से दूरी
हेमा मालिनी आज भी मानती हैं कि उन्हें अपार्टमेंट में रहने से घुटन होती है। वह खुली छत, बगीचे और पेड़ों वाले घर को ही असली सुख मानती हैं। शायद इसी सोच ने उन्हें हमेशा बंगलों का समर्थक बनाए रखा।
