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Google का दावा – Android फोन iPhone से ज्यादा सुरक्षित, मोबाइल स्कैम रोकने में AI तकनीक ने बदला खेल

Google के नए सर्वे में खुलासा हुआ है कि Android उपयोगकर्ताओं को iPhone यूज़र्स की तुलना में कम फ्रॉड कॉल्स और मैसेज मिलते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि Pixel डिवाइस वाले यूज़र्स को सबसे बेहतर सुरक्षा मिल रही है।

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Google का दावा — “Android यूज़र्स को iPhone की तुलना में 58% कम स्कैम मैसेज और कॉल मिलते हैं।”
Google का दावा — “Android यूज़र्स को iPhone की तुलना में 58% कम स्कैम मैसेज और कॉल मिलते हैं।”

टेक्नोलॉजी की दुनिया में हमेशा से Android बनाम iPhone की जंग चलती रही है — लेकिन अब इसमें एक नया मोड़ आया है। Google ने दावा किया है कि उसका Android ऑपरेटिंग सिस्टम मोबाइल स्कैम रोकने में Apple के iOS से कहीं अधिक प्रभावी है। कंपनी के अनुसार, उसके AI-आधारित सुरक्षा फीचर्स हर महीने 10 अरब से ज्यादा फ्रॉड कॉल्स और मैसेज ब्लॉक करते हैं।

Google का बड़ा दावा: “Android ज्यादा स्मार्ट, ज्यादा सुरक्षित”

Google ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि उसका उद्देश्य मोबाइल स्कैम्स से दुनिया भर के यूज़र्स को बचाना है — जो हर साल करीब 400 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाते हैं।
कंपनी ने कहा,

Google का दावा — “Android यूज़र्स को iPhone की तुलना में 58% कम स्कैम मैसेज और कॉल मिलते हैं।”

“हमारे AI टूल्स और मशीन लर्निंग सिस्टम अब दुनिया के सबसे बड़े सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा बन चुके हैं, जो यूज़र्स को धोखाधड़ी और अनचाहे संचार से बचाते हैं।”

सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े

Google ने YouGov के साथ मिलकर 5,000 स्मार्टफोन यूज़र्स पर सर्वे किया। नतीजे बताते हैं कि Android यूज़र्स iPhone यूज़र्स की तुलना में कहीं कम स्कैम कॉल्स और मैसेज झेलते हैं।

  • Android उपयोगकर्ता 58% अधिक संभावना रखते हैं कि उन्हें पिछले सप्ताह कोई भी स्कैम टेक्स्ट नहीं मिला।
  • वहीं, Pixel फोन यूज़र्स के लिए यह आंकड़ा 96% तक पहुंच गया — यानी लगभग दोगुना सुरक्षित।
  • इसके विपरीत, iPhone यूज़र्स में 65% अधिक संभावना थी कि उन्हें हफ्ते में तीन या उससे अधिक फ्रॉड मैसेज मिले।
  • और 150% अधिक iPhone यूज़र्स ने माना कि उनका फोन स्कैम रोकने में “बिलकुल भी प्रभावी नहीं” है।

Pixel डिवाइस बने ‘सिक्योरिटी शील्ड’

Google ने कहा कि उसकी बढ़त का मुख्य कारण AI-आधारित डिटेक्शन सिस्टम हैं —

  • Messages ऐप का स्पैम फिल्टर संदिग्ध मैसेज को तुरंत पहचान लेता है।
  • On-device Scam Detection तकनीक रियल टाइम में फर्जी बातचीत को पहचानती है।
  • जबकि Call Screen फीचर किसी कॉल को यूज़र के उठाने से पहले ही फिल्टर कर देता है।

Google के अनुसार, ये सिस्टम लगातार नई धोखाधड़ी तकनीकों को पहचानने और रोकने के लिए अपडेट होते रहते हैं।

Google का दावा — “Android यूज़र्स को iPhone की तुलना में 58% कम स्कैम मैसेज और कॉल मिलते हैं।”


रिसर्च रिपोर्ट्स ने भी दिया Google को समर्थन

कंपनी ने अपने दावे के समर्थन में दो स्वतंत्र संस्थाओं — Counterpoint Research और Leviathan Security Group — की रिपोर्ट्स का हवाला दिया।

  • Counterpoint की रिपोर्ट में बताया गया कि Android में AI-आधारित सुरक्षा 9 प्रमुख क्षेत्रों में सक्रिय है, जबकि iOS में केवल 2 क्षेत्रों तक सीमित है।
  • Leviathan की रिपोर्ट के अनुसार, Android खासकर Google Pixel डिवाइस, डिफ़ॉल्ट रूप से iPhone की तुलना में बेहतर स्कैम प्रोटेक्शन देता है और इसके लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप की जरूरत नहीं होती।

Apple की सुरक्षा पर उठे सवाल

यह रिपोर्ट Apple की उस छवि को चुनौती देती है जो लंबे समय से “सबसे सुरक्षित मोबाइल इकोसिस्टम” के रूप में जानी जाती रही है। Google ने डेटा साझा करते हुए बताया कि उसकी AI सुरक्षा परतें नए स्कैम पैटर्न को ऑटोमेटिक तरीके से पहचानकर ब्लॉक कर देती हैं — जबकि Apple का सिस्टम मुख्यतः यूज़र इनपुट पर निर्भर है।

हालांकि Apple ने हाल के वर्षों में ‘Screen Unknown Callers’ और iMessage सुरक्षा अपडेट्स जैसे फीचर्स जोड़े हैं, लेकिन Google का कहना है कि Android की “मल्टी-लेयर AI प्रोटेक्शन” फिलहाल कहीं आगे है।

Google का दावा — “Android यूज़र्स को iPhone की तुलना में 58% कम स्कैम मैसेज और कॉल मिलते हैं।”


वैश्विक स्कैम खतरा और भविष्य की रणनीति

मोबाइल स्कैम अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक साइबरक्राइम का सबसे बड़ा जाल बन चुके हैं। Google का कहना है कि आने वाले समय में उसके AI सिस्टम न केवल कॉल और मैसेज बल्कि फिशिंग लिंक, फ्रॉड वेबसाइट्स और फेक ऐप्स को भी रियल टाइम में ब्लॉक करेंगे।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा,

“हमारी प्राथमिकता यूज़र ट्रस्ट और सुरक्षा है। हम मानते हैं कि तकनीक तभी सार्थक है जब वह लोगों को सुरक्षित रखे।”

निष्कर्ष

Google की यह रिपोर्ट साफ दिखाती है कि अब स्मार्टफोन सिक्योरिटी की जंग में Android आगे निकलता दिख रहा है
जहां Apple गोपनीयता और यूज़र नियंत्रण पर केंद्रित है, वहीं Google अपने AI नेटवर्क और डेटा विश्लेषण की ताकत से रियल-टाइम स्कैम डिफेंस में बढ़त बना चुका है।
इस प्रतिस्पर्धा का फायदा अंततः यूज़र्स को ही मिलेगा — क्योंकि सुरक्षा की इस दौड़ में दोनों दिग्गज कंपनियां अब पहले से ज्यादा सतर्क और उन्नत बन रही हैं।

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