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Goa नाइटक्लब आग कांड के बाद हाईकोर्ट सख्त, अवैध नाइटक्लब्स पर लिया suo motu संज्ञान
Bombay High Court at Goa ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, जनवरी में होगी अगली सुनवाई
गोवा के Arpora इलाके में हुए भीषण नाइटक्लब अग्निकांड के बाद अब न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। Bombay High Court at Goa ने सोमवार को राज्य में अवैध रूप से संचालित नाइटक्लब्स के मामले में suo motu cognisance लेते हुए गोवा सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला अब एक जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज किया गया है, जिस पर अगली सुनवाई जनवरी की शुरुआत में होगी।
यह सख्ती उस भयावह हादसे के बाद आई है, जिसमें 6 दिसंबर की रात करीब 11:45 बजे Birch by Romeo Lane नामक नाइटक्लब में लगी आग से 25 लोगों की मौत हो गई थी और 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। यह नाइटक्लब उत्तर गोवा के Arpora गांव में स्थित था।
हाईकोर्ट में यह मामला मूल रूप से Pradeep Ghadi Amonkar और Sunil Diukar द्वारा दायर एक रिट याचिका के जरिए सामने आया था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उनकी कई शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने इस नाइटक्लब के अवैध संचालन के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

अदालत की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई कर रही Justice Sarang Kotwal और Justice Ashish Chavan की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह सिर्फ एक क्लब का मामला नहीं, बल्कि पूरे गोवा में अवैध निर्माण और बेतरतीब ढंग से लाइसेंस जारी करने की गंभीर समस्या को उजागर करता है।
अदालत ने टिप्पणी की कि कई मामलों में स्थानीय निकायों के पास कार्रवाई करने के अधिकार होते हुए भी कानून सिर्फ “कागजों में जिंदा” रह जाता है। कई बार अवैध ढांचों पर गिराने के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन अपीलीय प्राधिकरणों द्वारा उन पर रोक लगा दी जाती है। इसका फायदा उठाकर ऐसे अवैध ढांचों में व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहती हैं।
बेंच ने यह भी कहा कि कुछ मामलों में ढांचे अवैध होते हुए भी उनमें व्यवसाय चलाने के लिए लाइसेंस दे दिए जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अब वक्त आ गया है कि सभी संबंधित विभाग एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की बजाय मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। अदालत ने माना कि इस तरह की घटनाओं का समाज पर व्यापक असर पड़ता है और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है।
इसी गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस मामले में suo motu PIL दर्ज करने का आदेश दिया और वरिष्ठ अधिवक्ता Rohit Bras de Sa को amicus curiae नियुक्त किया। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वह पूरे गोवा राज्य में अवैध नाइटक्लब्स, स्थानीय निकायों और अपीलीय प्राधिकरणों की भूमिका पर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करें।
राज्य सरकार से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने गोवा सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस suo motu PIL में अपना जवाब दाखिल करे और बताए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या किसी अधिकारी या प्राधिकरण को इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

इस मामले में Arpora village panchayat भी जांच के घेरे में है। इसी पंचायत द्वारा 2023 में जारी ट्रेड लाइसेंस के आधार पर अन्य विभागों—जैसे Goa State Pollution Control Board, Food and Drugs Administration और Excise Department—ने अनुमति दी थी। हालांकि यह लाइसेंस मार्च 2024 में समाप्त हो चुका था।
शिकायत मिलने के बाद पंचायत ने क्लब के खिलाफ डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किया था, लेकिन बाद में Deputy Director of Panchayats ने अपील पर उस आदेश पर रोक लगा दी थी।
यह संरचना कथित तौर पर Surinder Kumar Khosla की थी, जिसे Being GS Hospitality Goa Arpora LLP को लीज पर दिया गया था। यह कंपनी Saurabh Luthra और Gaurav Luthra की बताई जा रही है।
अब इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सख्ती से गोवा में अवैध नाइटलाइफ और प्रशासनिक लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
