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घड़साना में मामा-भांजी की दर्दनाक मौत: पानी की डिग्गी बनी काल, गांव में मचा कोहराम

श्रीगंगानगर के 7 एमएलडी गांव में सिंचाई के दौरान हुआ हादसा, परिजनों ने शवों का किया पोस्टमार्टम से इनकार, प्रशासन ने एक घंटे की समझाइश के बाद माने

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ChatGPT Image Jun 25 2025 09 02 44 PM
घड़साना में हादसे के बाद घटनास्थल पर जुटे ग्रामीण, गम और गुस्से का मिला-जुला माहौल (Image: ChatGPT)

श्रीगंगानगर/घड़साना:
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र में बुधवार को एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 7 एमएलडी गांव के वाटर वर्क्स में एक गहरी डिग्गी में डूबने से 40 वर्षीय रशीद खां और उसकी 15 वर्षीय भांजी रहमत की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा तब हुआ जब दोनों खेत की सिंचाई के लिए ट्रैक्टर से जुड़े ड्रम में पानी भर रहे थे।

दर्दनाक मोड़ तब आया जब फिसल गया पैर:
स्थानीय लोगों के अनुसार, ड्रम भरते समय अचानक रशीद खां का पैर फिसल गया और वह सीधे डिग्गी में जा गिरा। अपनी जान बचाने के लिए वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी भांजी रहमत उसे बचाने के लिए दौड़ी और वह भी डिग्गी में गिर गई। जब तक आसपास मौजूद लोग पहुंचे, तब तक दोनों की सांसें थम चुकी थीं।

गांव में पसरा मातम, टूटे परिजनों ने किया पोस्टमार्टम से इनकार:
घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया। हर आंख नम थी और लोगों की भीड़ पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने जुट गई। लेकिन दुख की इस घड़ी में जब शवों को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की बात आई, तो परिजनों ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि वे अपने प्रियजनों को बिना किसी देरी के सुपुर्द-ए-खाक करना चाहते हैं।

प्रशासनिक टीम ने संभाली स्थिति:
हालात बिगड़ते देख मौके पर तहसीलदार बबीता ढिल्लो और थाना प्रभारी महावीर बिश्नोई पहुंचे। उन्होंने गमजदा परिवार से करीब एक घंटे तक बातचीत की और आखिरकार उन्हें पोस्टमार्टम के लिए मनाया गया। इसके बाद दोनों शवों को घड़साना सीएचसी भेजा गया।

अब सवाल उठता है—कब जागेगा प्रशासन?
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डिग्गी के चारों ओर सुरक्षा रेलिंग होती, चेतावनी बोर्ड लगे होते या निगरानी की कोई व्यवस्था होती, तो यह हादसा टल सकता था। अब ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी वाटर वर्क्स डिग्गियों के चारों ओर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

एक परिवार उजड़ गया, एक गांव रो पड़ा, और एक सवाल अब भी बाकी है—क्या अब भी हम सचेत नहीं होंगे?

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