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Gautam Gambhir का फूट पड़ा गुस्सा! ‘डोमेन में रहो’—स्प्लिट कोचिंग वाली बहस पर भड़के, कहा– कप्तान के बिना कैसे जीतते?
टेस्ट सीरीज में मिली करारी हार के बाद आलोचनाओं से तिलमिलाए गौतम गंभीर, IPL टीम ओनर को दिया कड़ा जवाब—ODI जीत को बताया असली जवाब
दक्षिण अफ्रीका दौरे से लौटते ही टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर फिर सुर्खियों में हैं—लेकिन इस बार वजह टीम की ODI जीत नहीं, बल्कि उनके तीखे तेवर हैं। टेस्ट सीरीज में 0-2 से मिली हार के बाद जिस तरह गंभीर की रणनीति और कोचिंग स्टाइल पर सवाल उठे, उन्होंने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी आलोचनाओं का सीधा जवाब दिया।
भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज 2-1 से अपने नाम की और यह गंभीर के लिए राहत की जीत साबित हुई। लेकिन टेस्ट सीरीज में जो हुआ, उसने आलोचना की आग को और भड़का दिया। कोलकाता टेस्ट में 124 रन का आसान सा लक्ष्य न पीछा कर पाने पर भारतीय टीम घिर गई। इसके बाद गुवाहाटी टेस्ट में 408 रन की शर्मनाक हार—यह गंभीर के कोच रहते दूसरा टेस्ट व्हाइटवॉश था। ऐसे में चारों तरफ सवाल उठने लगे कि क्या गंभीर रेड-बॉल क्रिकेट के लिए सही कोच हैं?
लेकिन गंभीर ने इस आलोचना के पीछे की “अधूरी कहानी” सामने रखी।
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“कप्तान ही नहीं था… ये बात किसी ने क्यों नहीं बताई?”
गंभीर ने बताया कि पहले टेस्ट में टीम इंडिया ने बिना कप्तान खेले, और इस तथ्य को किसी ने भी प्रमुखता से नहीं उठाया।
शुभमन गिल, जो पिछले सात टेस्ट में लगभग 1000 रन बना चुके हैं, पहले टेस्ट में गर्दन की चोट के कारण दोनों पारियों में बल्लेबाजी नहीं कर सके।
गंभीर ने कहा:
“कप्तान नहीं खेला, पर किसी मीडिया ने यह नहीं लिखा। तीन रन का फर्क था और एक इन-फॉर्म कप्तान मैदान पर नहीं था। मैं बहाने नहीं बनाता, इसका मतलब यह नहीं कि आप सच दुनिया को न बताएं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीम अभी संक्रमण काल से गुजर रही है और युवा खिलाड़ियों का रेड-बॉल अनुभव सीमित है।
स्प्लिट कोचिंग का सुझाव—और गंभीर का तगड़ा पलटवार
टेस्ट सीरीज हारने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हुई कि भारत को व्हाइट-बॉल और रेड-बॉल टीमों के लिए अलग-अलग कोच रखने चाहिए। इसी दौरान दिल्ली कैपिटल्स के को-ओनर पार्थ जिंदल की स्प्लिट कोचिंग वाली टिप्पणी ने विवाद को और हवा दे दी।

गंभीर यह बात आते ही भड़के:
“जिन लोगों का क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं, वो भी टिप्पणी कर रहे हैं। एक IPL टीम ओनर भी स्प्लिट कोचिंग की बात कर रहा था। लोगों को अपने डोमेन में रहना चाहिए। हम उनके काम में दखल नहीं देते, तो उन्हें भी हमारे काम में दखल देने का कोई हक नहीं।”
गंभीर के इस जवाब ने साफ कर दिया कि वह टीम इंडिया की कोचिंग में बाहरी हस्तक्षेप को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ODI सीरीज जीत—क्या यह गंभीर की रणनीति की वापसी है?
टेस्ट की हार के बावजूद ODI में भारत ने मजबूत वापसी की। युवा खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, गेंदबाजी में संयम दिखा और बल्लेबाजों ने जिम्मेदारी निभाई। गंभीर ने इस सीरीज को “टीम के आत्मविश्वास के लिए जरूरी जीत” बताया।
उन्होंने कहा कि आलोचना खेल का हिस्सा है, लेकिन टीम को समझने और समर्थन देने की भी जिम्मेदारी सभी की है।
आगे क्या?
भारत का अगला रेड-बॉल असाइनमेंट बेहद महत्वपूर्ण होगा। गंभीर के सामने अब दो चुनौतियाँ हैं—
- टेस्ट टीम को स्थिर करना
- लगातार बदलते फ़ॉर्मेट में संतुलन बनाना
लेकिन एक बात साफ है—गौतम गंभीर अब बैकफुट पर नहीं, पूरी तरह आक्रामक मोड में हैं। और उनकी बॉडी लैंग्वेज यही कह रही है कि वे आलोचना से नहीं, केवल नतीजों से जवाब देंगे।
