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दुबई एयरपोर्ट पर हज़ारों यात्री फंसे, 346 उड़ानें रद्द — ईरान-इज़राइल युद्ध ने दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डे को किया ठप

सैन फ्रांसिस्को जा रही फ्लाइट चार घंटे हवा में घूमती रही, लैंडिंग स्लॉट नहीं मिला — एक यात्री ने बताया, “यह तो अफरातफरी की परिभाषा है।”

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दुबई एयरपोर्ट ठप — 346 उड़ानें रद्द, हज़ारों यात्री फंसे, ईरान-इज़राइल युद्ध का असर | Dainik Diary
दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फंसे हज़ारों यात्री — ईरान-इज़राइल तनाव के चलते 346 से ज़्यादा उड़ानें रद्द, हर तरफ अफरातफरी का माहौल।

सोचिए — आप दुबई एयरपोर्ट पर बैठे हैं, फ्लाइट बोर्ड पर सिर्फ “Delayed” और “Cancelled” लिखा है, पास में हर देश के हज़ारों यात्री हैं, और कोई नहीं जानता कि अगली उड़ान कब होगी। यही हाल था शनिवार को दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक — दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का।

ईरान और इज़राइल के बीच मिसाइलों का आदान-प्रदान शुरू होते ही पूरे मध्य-पूर्व का हवाई क्षेत्र अस्त-व्यस्त हो गया। और इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी दुबई पर — क्योंकि दुबई वो शहर है जहां से यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका — हर तरफ की उड़ानें जाती हैं।

चार घंटे आसमान में घूमती रही फ्लाइट

NDTV से बात करते हुए दुबई में फंसे यात्री जॉर्ज कोशी ने जो बताया, वो किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है — लेकिन यह हकीकत थी।

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कोशी दुबई से सैन फ्रांसिस्को जा रहे थे। सुबह करीब 8.50 बजे उनकी फ्लाइट ने उड़ान भरी। लेकिन जैसे ही विमान आगे बढ़ा, रास्ते बंद मिले। कैप्टन ने एक के बाद एक कई रूट आज़माए — यूरोप होकर, दूसरे देशों के ऊपर से — लेकिन हर तरफ से मना।

“करीब चार घंटे विमान हवा में चक्कर लगाता रहा। फिर लैंडिंग के लिए स्लॉट ढूंढने में 40 मिनट और लगे” — कोशी ने बताया।

यह कुछ वैसा ही था जैसे मुंबई से दिल्ली जाते वक्त रास्ते में पता चले कि इंदिरा गांधी एयरपोर्ट बंद है, अब लखनऊ उतरो — और लखनऊ में भी जगह नहीं।

346 उड़ानें ज़मीन पर, लाखों यात्री बेबस

कोशी के मुताबिक एयरपोर्ट पर उतरते ही अफरातफरी का नज़ारा था। करीब 346 उड़ानें ज़मीन पर खड़ी थीं। और यात्रियों की संख्या? इससे दोगुनी-तिगुनी।

हर देश के यात्री — भारतीय, अमेरिकी, यूरोपीय, अफ्रीकी — सब एक ही छत के नीचे, एक ही सवाल के साथ: “हमारी अगली फ्लाइट कब है?”

इमिग्रेशन की लाइनें लंबी थीं। होटल और रहने की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गई। अधिकारी हालात संभालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हज़ारों लोगों की ज़रूरतें एक साथ पूरी करना आसान नहीं था।

“कोई नहीं जानता अगली उड़ान कब होगी”

सबसे बड़ी परेशानी थी अनिश्चितता। न कोई आधिकारिक घोषणा, न कोई समय-सीमा।

“कोई नहीं बता रहा कि हवाई क्षेत्र कब खुलेगा। यह तो अफरातफरी की सीधी परिभाषा है” — कोशी के ये शब्द उस वक्त लाखों यात्रियों की भावना थे।

दुबई क्यों है इतना अहम?

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है। एमिरेट्स एयरलाइन यहीं से दुनिया के 150 से ज़्यादा देशों में उड़ान भरती है। जब यह हब रुकता है तो असर सिर्फ दुबई पर नहीं — पूरी दुनिया की हवाई यातायात व्यवस्था पर पड़ता है।

ईरान-इज़राइल युद्ध का यह असर बता रहा है कि आधुनिक युद्ध सिर्फ मिसाइलों और बमों तक सीमित नहीं रहता — वो आम इंसान की ज़िंदगी को भी उतना ही प्रभावित करता है।

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