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विदेश में जब लोग आपको टेस्ट क्रिकेटर कहते हैं तो अलग ही सुकून मिलता है Dhruv Jurel ने 2026 की श्रीलंका सीरीज को लेकर दिए संकेत

विजय हजारे ट्रॉफी में धमाकेदार फॉर्म में चल रहे ध्रुव जुरेल ने साफ किया कि भले ही सीमित ओवरों में चर्चा कम हो लेकिन उनका असली सपना टेस्ट क्रिकेट में खुद को स्थापित करना है

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विजय हजारे ट्रॉफी में बड़ौदा के खिलाफ 160 रन की शानदार पारी खेलते हुए ध्रुव जुरेल

भारतीय क्रिकेट में जब भी किसी युवा बल्लेबाज़ की बात होती है, तो अक्सर चर्चा टी20 या वनडे प्रदर्शन तक सीमित रह जाती है। लेकिन ध्रुव जुरेल उन चुनिंदा नामों में शामिल हैं, जो खुद को इस भीड़ से अलग सोच के साथ देखते हैं। विजय हजारे ट्रॉफी में उनके हालिया प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह बल्लेबाज़ लंबी रेस का घोड़ा है।

उत्तर प्रदेश की ओर से खेलते हुए बड़ौदा के खिलाफ जुरेल की 160 रनों की पारी सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, बल्कि उनके क्रिकेटिंग मिज़ाज की झलक भी थी। संयम, धैर्य और हालात के मुताबिक खेलना—ये सभी गुण उनकी बल्लेबाज़ी में साफ नजर आए। इसी पारी की बदौलत यूपी ने टूर्नामेंट में अपनी जीत की लय बरकरार रखी।

हाल ही में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेली गई दो मैचों की घरेलू टेस्ट सीरीज में टीम मैनेजमेंट ने जुरेल को एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ के तौर पर आज़माया। भले ही यह सीरीज भारत के लिए यादगार न रही और जुरेल के आंकड़े भी खास नहीं दिखे, लेकिन चयनकर्ताओं का भरोसा अपने आप में बड़ी बात है। टेस्ट क्रिकेट में मौके अक्सर आंकड़ों से ज्यादा भरोसे पर मिलते हैं।

जुरेल खुद भी इस बात को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि जब आप विदेश दौरे पर जाते हैं और लोग आपको “टेस्ट क्रिकेटर” कहकर पहचानते हैं, तो वह एहसास किसी भी व्यक्तिगत रिकॉर्ड से बड़ा होता है। यही सोच उन्हें बाकी युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है।

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हालांकि 2026 टी20 वर्ल्ड कप की योजनाओं में उनका नाम फिलहाल शामिल नहीं है, लेकिन इससे जुरेल का फोकस डगमगाया नहीं है। वह जानते हैं कि हर खिलाड़ी का रास्ता अलग होता है। किसी के लिए टी20 सीढ़ी बनता है, तो किसी के लिए टेस्ट क्रिकेट असली मंज़िल होता है।

जुरेल पहले से ही 2026 में होने वाली श्रीलंका टेस्ट सीरीज को लेकर मन ही मन तैयारी शुरू कर चुके हैं। उपमहाद्वीप की परिस्थितियों में खेलने का अनुभव, लंबे स्पैल तक टिके रहना और स्पिन के खिलाफ धैर्य—ये सभी चीजें उनके पक्ष में जाती हैं।

विजय हजारे ट्रॉफी में लगातार रन बनाकर वह यह संदेश साफ दे रहे हैं कि टेस्ट क्रिकेट के लिए जरूरी मानसिक मजबूती और तकनीक उनके पास है। भारतीय टीम में जगह बनाना आसान नहीं, लेकिन जुरेल की सोच और मेहनत यह इशारा करती है कि आने वाले समय में लाल गेंद के क्रिकेट में उनका नाम और मजबूत होगा।

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