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अलविदा धर्मेंद्र: अखाड़ों से ‘शोले’ तक—89 साल में गढ़ दिया हिंदी सिनेमा का स्वर्ण इतिहास
पंजाब के नसराली गांव से निकले एक सपने ने मुंबई में छह दशक तक बॉलीवुड पर राज किया, ‘ही-मैन’ अब सिर्फ यादों में रहेंगे।
बॉलीवुड में स्टारडम अक्सर आतिशबाजी की तरह होता है—कुछ सेकेंड की चमक और फिर सन्नाटा। लेकिन धर्मेंद्र इस नियम के अपवाद थे। लगभग सात दशक तक उन्होंने परदे पर वही ऊर्जा, वही सादगी और वही जज़्बा बनाए रखा। 89 साल की उम्र में जब उनका 90वां जन्मदिन बस एक महीने दूर था, ‘ही-मैन’ ने दुनिया को अलविदा कह दिया—लेकिन उनका सिनेमाई सफर हमेशा अमर रहेगा।
पंजाब के खेतों से सपनों के शहर तक
8 दिसंबर 1935 को पंजाब के लुधियाना जिले के नसराली गांव में जन्में धर्मेंद्र, बचपन में गांव के अखाड़ों में ताकत आजमाते और दूर कहीं छिपे सपनों को निहारा करते थे। वह एक साधारण स्कूल हेडमास्टर के बेटे थे, लेकिन महत्वाकांक्षा साधारण नहीं थी।
1958 में Filmfare New Talent Hunt के एक अखबारी विज्ञापन ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी—और एक युवा जाट लड़का फोटो लेकर बॉम्बे पहुंच गया।
1960 में उन्होंने फ़िल्म Dil Bhi Tera Hum Bhi Tere से डेब्यू किया, लेकिन असली पहचान मिली Shola Aur Shabnam, Bandini और Anpadh जैसी संवेदनशील फिल्मों से।
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रोमांस का दौर—“वो चेहरा जिसे स्क्रीन प्यार करती थी”
1960 का दशक धर्मेंद्र का रोमांटिक स्वर्णकाल रहा।
Phool Aur Patthar (1966) में उनका दिलकश अंदाज़ उन्हें मैटिनी आइकन बना गया।
Haqeeqat, Mamta, Anupama—हर किरदार ने साबित किया कि वह सिर्फ एक खूबसूरत हीरो नहीं, बल्कि भावनाओं को बखूबी समझने वाले कलाकार हैं।
क्लासिक कॉमेडी Chupke Chupke में वह अमिताभ बच्चन के साथ आज भी फैंस की फेवरिट जोड़ी हैं।
जब ‘धर्म’, ‘वीरू’ बन गया—एक युग की पहचान
1970 का दशक आते-आते बॉलीवुड बदल रहा था—और धर्मेंद्र भी।
Meerā Gaon Meera Desh, Jugnu, Yaadon Ki Baarat, Dharam Veer—हर फिल्म सुर्खियों में रही।
लेकिन 1975 में शोले आई—और वीरू हमेशा के लिए भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया।
उनकी दोस्ती, मासूमियत, रोमांस और जोशीली ऊर्जा ने दर्शकों को जीत लिया। “बसंती, इन कुत्तों के सामने मत नाचना”—आज भी भारत के सबसे पहचानने योग्य संवादों में शुमार है।
नंबरों में धर्मेंद्र—वो जिसे इतिहास नहीं भूल सकता
- 300+ फिल्में
- 74 हिट
- 7 ब्लॉकबस्टर
- 13 सुपरहिट
- 6 दशक का स्टारडम
ये आंकड़े बताते हैं कि धर्मेंद्र सिर्फ चले नहीं—उन्होंने बॉक्स ऑफिस के इतिहास को आकार दिया। निजी जीवन—रिश्तों को निभाने वाला सितारा

1954 में उन्होंने प्रकाश कौर से शादी की और उनके बेटे सनी देओल व बॉबी देओल आज बॉलीवुड के बड़े नाम हैं।
1970 की फिल्म Tum Haseen Main Jawaan के सेट पर उनकी मुलाकात हेमा मालिनी से हुई, जो बाद में जीवनसाथी बनीं।
उनकी बेटियां ईशा देओल और अहाना देओल भी मनोरंजन जगत से जुड़ी रहीं।
धर्मेंद्र ने 2004 से 2009 तक बीजेपी के टिकट पर बीकानेर से लोकसभा सांसद के रूप में भी सेवा दी।
समय बदला, धर्मेंद्र नहीं
हाल के वर्षों में, वह Apne, Yamla Pagla Deewana और 2023 की Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani में नजर आए।
सोशल मीडिया पर वह अक्सर अपने फ़ार्महाउस से वीडियो शेयर करते, फैंस से बातें करते—एक बड़े सितारे की विनम्रता दिखाते।
एक युग का अंत, लेकिन जादू बाकी है
धर्मेंद्र सिर्फ एक्टर नहीं थे—वह वह एहसास थे जिसे भारत ने फिल्मों की भाषा में जिया।
उनकी मुस्कान, उनका आकर्षण, उनका देसीपन—सब मिलकर एक ऐसी विरासत बनाते हैं, जिसे कोई बदल नहीं सकता।
आज बॉलीवुड शोक में है, लेकिन भारत गर्व में—क्योंकि ही-मैन जैसा दूसरा कोई नहीं होगा।
