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दिल्ली हाई कोर्ट का केंद्र को नोटिस, प्रोफेसर निताशा कौल की ब्लैकलिस्टिंग पर बड़ा सवाल
OCI स्टेटस रद्द होने और भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ निताशा कौल की याचिका पर कोर्ट ने मांगा जवाब, बीमार मां से मिलने की अनुमति की भी मांग
भारतीय मूल की प्रोफेसर और लेखिका निताशा कौल को भारत में प्रवेश से रोकने और उनका ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस रद्द करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
निताशा कौल ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर दावा किया है कि केंद्र का यह निर्णय बिना किसी उचित आधार, प्रमाण या कानूनी प्रक्रिया के लिया गया है। उन्होंने ब्लैकलिस्टिंग और OCI निरस्तीकरण को मनमाना बताते हुए इसे संविधान के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
कोर्ट की कार्यवाही
जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने केंद्र से जवाब मांगा है और साथ ही कौल की अंतरिम मांग पर भी विचार करने को कहा है, जिसमें उन्होंने तीन सप्ताह के लिए भारत आने की अनुमति मांगी है ताकि वह अपनी बीमार मां से मिल सकें।
इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 जनवरी को होगी।

याचिका में क्या कहा गया?
अपनी याचिका में कौल ने कहा है कि:
- मार्च 6 का OCI कैंसिलेशन ऑर्डर
- और कथित ब्लैकलिस्टिंग ऑर्डर
किसी कानूनी या तथ्यात्मक आधार पर नहीं टिकते।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने वह सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।
याचिका के अनुसार, यह फैसला:
- प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ
- संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन
- नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के विपरीत
- विदेशी अधिनियम 1946 की प्रक्रिया का उल्लंघन
बताया गया है, जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना जरूरी है।
“मनोमानी और बिना प्रमाण के निर्णय”
याचिका में कहा गया कि केंद्र द्वारा उनके खिलाफ “एंटी-इंडिया गतिविधियों” का आरोप सामान्य और अस्पष्ट है। आरोप है कि उनकी पत्रकारिता और शोध गतिविधियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
याचिका में यह भी कहा गया कि:

“यह आदेश बिना किसी तर्क, तथ्य या विस्तृत स्पष्टीकरण के जारी किया गया है। शो कॉज नोटिस के जवाब में 10 मई 2024 को भेजे गए विस्तृत उत्तर पर विचार भी नहीं किया गया।”
फरवरी 2024 की डेपोर्टेशन को भी चुनौती
याचिका में दावा किया गया कि फरवरी 2024 में जिस कथित ब्लैकलिस्टिंग के आधार पर उन्हें भारत आने से रोका गया था, वह आदेश उस समय जारी हुआ जब उनका OCI कार्ड वैध था और यह भी बिना शो कॉज नोटिस के किया गया।
मामला क्यों महत्वपूर्ण?
यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि:
- पहली बार किसी प्रोफेसर और शोधकर्ता को इस तरह ब्लैकलिस्ट किया गया
- फैसले की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं
- यह मामला OCI धारकों के अधिकारों और सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है
