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दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: पुलवामा के डॉक्टर उमर उन नबी पर शक, फरीदाबाद से जुड़ा आतंक नेटवर्क
रेड फोर्ट के पास हुए धमाके की जांच में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को मिला सुराग, कश्मीर के डॉक्टर उमर उन नबी पर शक — बताया जा रहा है कि वही कार चला रहा था जो धमाके में उड़ गई।
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास सोमवार शाम हुए भयानक विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। अब इस मामले में जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़ा खुलासा किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि विस्फोटक से भरी हुंडई i20 कार को पुलवामा निवासी डॉक्टर उमर उन नबी चला रहा था।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, उमर नबी का नाम पहले से ही एक आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा हुआ सामने आया है, जिसका कनेक्शन हाल ही में हरियाणा के फरीदाबाद में पकड़े गए बड़े विस्फोटक जखीरे से है। इस मॉड्यूल के तहत जम्मू-कश्मीर के दो और डॉक्टर — मुझम्मिल शाकिल और आदिल अहमद राथर — पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

कैसे पहुंची पुलिस उमर तक
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच की शुरुआत उस कार से हुई जो धमाके में तबाह हो गई थी। i20 कार पहले एक व्यक्ति सलमान के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसने बताया कि उसने कार देवेन्द्र को बेच दी थी। देवेन्द्र ने आगे बताया कि उसने इसे तारिक नाम के शख्स को बेचा, और वहीं से पुलिस का सुराग सीधा डॉ. उमर उन नबी तक पहुंचा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया — “हम जब तारिक की तलाश में थे, तब हमें पता चला कि कार आखिरी बार उमर के पास थी। हमें सबूत मिले हैं कि धमाके के समय वही कार चला रहा था और संभव है कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई हो।”
‘दोस्तों की गिरफ्तारी के बाद रची साजिश’
स्पेशल सेल के दूसरे अधिकारी ने खुलासा किया कि उमर ने अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद इस विस्फोट की योजना बनाई थी। उनके अनुसार, उमर, आदिल और मुझम्मिल एक ही नेटवर्क में सक्रिय थे और आतंकी सामग्री के परिवहन में शामिल थे।
बताया गया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने पिछले हफ्ते करीब 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जब्त किया था, जो इसी मॉड्यूल से जुड़ा माना जा रहा है।

विस्फोट का मकसद क्या था?
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि धमाका जानबूझकर किया गया था या गलती से कार में मौजूद विस्फोटक सामग्री के कारण हुआ। प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया पदार्थ अमोनिया जेल या इसी प्रकार का कोई उच्च तीव्रता वाला विस्फोटक था।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस मामले में यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की हत्या, हत्या के प्रयास और विस्फोटक अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
फिलहाल दिल्ली पुलिस, एनआईए और आईबी की टीमें मिलकर इस रेड फोर्ट ब्लास्ट की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि “सभी सबूत यह संकेत देते हैं कि यह एक संगठित आतंकी मॉड्यूल था जो दिल्ली तक सक्रिय था।”

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