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विदाई में भावुक हुए CJI गवई, बोले– आज जिस मुकाम पर हूं, उसका श्रेय सिर्फ संविधान और डॉ. आंबेडकर को

रिटायरमेंट से पहले आयोजित विदाई समारोह में CJI डीवाई गवई ने बचपन की यादों से लेकर अपने ‘सेक्युलर विचारों’ तक खुलकर बातें कीं, कहा— “मैं सभी धर्मों में आस्था रखने वाला व्यक्ति हूं।”

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विदाई समारोह के दौरान भावुक हुए CJI डीवाई गवई ने कहा— “मेरी सफलता का श्रेय संविधान और डॉ. आंबेडकर को जाता है।”
विदाई समारोह के दौरान भावुक हुए CJI डीवाई गवई ने कहा— “मेरी सफलता का श्रेय संविधान और डॉ. आंबेडकर को जाता है।”

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई गवई 23 नवंबर को रिटायर होने जा रहे हैं। रिटायरमेंट से दो दिन पहले बार एसोसिएशनों द्वारा आयोजित उनके विदाई समारोह में माहौल बेहद भावुक हो गया। मंच पर खड़े CJI गवई ने अपने जीवन, अपने विचारों और संविधान की ताकत को याद करते हुए ऐसी बातें कहीं, जिसने पूरे हॉल को तालियों से गूंजा दिया।

“मैं जो भी हूं, सिर्फ संविधान और डॉ. आंबेडकर की वजह से हूं”

कार्यक्रम में संबोधित करते हुए CJI गवई ने कहा कि एक छोटे कस्बे के सरकारी स्कूल में जमीन पर बैठकर पढ़ने वाला बच्चा आज देश की सर्वोच्च न्यायिक कुर्सी तक पहुंच गया—यह सिर्फ भारतीय संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के कारण संभव हो पाया।

विदाई समारोह के दौरान भावुक हुए CJI डीवाई गवई ने कहा— “मेरी सफलता का श्रेय संविधान और डॉ. आंबेडकर को जाता है।”


उन्होंने कहा,
“मेरी यात्रा इसकी मिसाल है कि इस देश में मेहनत और समान अवसर के दम पर कोई भी बच्चा ऊंचाई हासिल कर सकता है।”

“मैं खुद को सच्चा सेक्युलर व्यक्ति मानता हूं”

अपने विदाई भाषण में CJI गवई ने बताया कि उनका सेक्युलर नजरिया उन्हें अपने पिता से मिला, जो आंबेडकरवादी विचारों का गहरा अनुसरण करते थे।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा,
“बचपन में जब पिता जी राजनीतिक कार्यक्रमों में जाते थे, लोग हमें दरगाहों, गुरुद्वारों और मंदिरों में भी ले जाते थे। मैंने उसी माहौल में हर धर्म के प्रति सम्मान सीखा।”

कार्यक्रम में गूंजा संवैधानिक मूल्यों का संदेश

CJI गवई ने कहा कि उन्होंने हमेशा भारतीय संविधान के चार बुनियादी स्तंभ—
न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—को अपने काम और व्यवहार में उतारने की कोशिश की है।

विदाई समारोह के दौरान भावुक हुए CJI डीवाई गवई ने कहा— “मेरी सफलता का श्रेय संविधान और डॉ. आंबेडकर को जाता है।”


उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी एक पद या व्यक्ति पर केंद्रित होकर नहीं चल सकता।
“सुप्रीम कोर्ट तभी मजबूत रहता है, जब न्यायाधीश, बार और रजिस्ट्री—तीनों एकजुट होकर काम करें।”

SCBA और SCAORA का भी किया धन्यवाद

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और SCAORA से जुड़े वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि न्यायपालिका जनता का भरोसा तब ही जीतती है, जब सभी इकाइयाँ एक टीम की तरह काम करें।

न्याय के प्रति समर्पण की सराहना

कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत सहित कई वरिष्ठ जजों और वकीलों ने CJI गवई के कार्यकाल की प्रशंसा की।
SCAORA अध्यक्ष शिवम नारायण ने कहा कि CJI गवई ने कठिन परिस्थितियों में भी न्याय और पारदर्शिता को सबसे ऊपर रखा और एजेंसियों द्वारा की जा रही जाँचों पर भी सख्त टिप्पणियाँ करके लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा की।

विदाई समारोह में मौजूद कई वकीलों ने भी माना कि CJI गवई का कार्यकाल अदालत की कार्यशैली में पारदर्शिता बढ़ाने और असमानता के मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने के लिए याद रखा जाएगा।