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2025 में बॉलीवुड ने क्लासिक्स को दिया नया बीट सिंथ पॉप और रैप के साथ धुरंधर ने खेल पलट दिया
आदित्य धर की फिल्म धुरंधर में ‘इश्क़ जलाकर – कारवां’ ने साबित कर दिया कि पुराने गीतों की आत्मा को छुए बिना भी उन्हें नई पीढ़ी का एंथम बनाया जा सकता है
साल 2025 बॉलीवुड म्यूज़िक के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर उभरा। लंबे समय से जिस बात की शिकायत हो रही थी—कि क्लासिक गानों के नाम पर सिर्फ़ आलसी रिमिक्स परोसे जा रहे हैं—उस पर इस साल आखिरकार ब्रेक लगा। पुराने दौर की रूहानी धुनों को नए ज़माने की धड़कन के साथ पेश करने का साहस कई फिल्मों ने दिखाया, लेकिन इस बदलाव की सबसे दमदार मिसाल बनी धुरंधर।
निर्देशक आदित्य धर की इस स्पाई थ्रिलर में इस्तेमाल किया गया गाना “इश्क़ जलाकर – कारवां” महज़ एक रीमिक्स नहीं, बल्कि म्यूज़िकल रिवाइवल का मास्टरक्लास है। यह गाना 1960 की फिल्म बरसात की रात की मशहूर क़व्वाली “ना तो कारवां की तलाश है” से प्रेरित है, लेकिन उसकी आत्मा को नुकसान पहुँचाए बिना उसे आज के सिनेमा की भाषा में ढाल देता है।

जहाँ ओरिजिनल क़व्वाली में सूफियाना ठहराव और शायरी की गहराई थी, वहीं धुरंधर का वर्ज़न उसे ग्रिटी सिनेमैटिक स्वेल, सिंथ-पॉप बीट्स और रैप के एलिमेंट्स के साथ पेश करता है। यह गाना सिर्फ़ बैकग्राउंड स्कोर बनकर नहीं रह जाता, बल्कि फिल्म की टोन, उसके किरदारों और कहानी की बेचैनी को आवाज़ देता है।
2025 में यही ट्रेंड बार-बार देखने को मिला। 60s से लेकर 90s तक की मेलोडीज़ को लो-फाई, इलेक्ट्रॉनिक और हिप-हॉप के साथ नए सिरे से गढ़ा गया। इन गानों ने अलग-अलग पीढ़ियों—बूमर्स से लेकर Gen Z और Gen Alpha—सबको एक ही प्लेलिस्ट पर ला खड़ा किया। यही वजह है कि ये गाने सिर्फ़ थिएटर तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सोशल मीडिया पर रील्स, पार्टी प्लेलिस्ट और वायरल ट्रेंड्स का हिस्सा बन गए।
धुरंधर का “इश्क़ जलाकर – कारवां” इस बदलाव का प्रतीक बन गया। यह गाना बताता है कि क्लासिक को दोबारा जिंदा करने के लिए उसे तोड़ना ज़रूरी नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को समझना ज़रूरी है। शायद यही वजह है कि 2025 को बॉलीवुड म्यूज़िक के लिए वह साल माना जा रहा है, जब इंडस्ट्री ने आखिरकार रीमिक्स से आगे सोचने की हिम्मत दिखाई।
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