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Delhi-NCR के बाद अब Bengaluru में भी AQI और पानी बना घर खरीदने वालों की चिंता

ट्रैफिक, बढ़ती कीमतें और जल संकट के चलते युवा कपल्स भी शहर के बाहर बसने पर कर रहे हैं विचार

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Delhi-NCR के बाद अब Bengaluru में भी AQI और पानी बना घर खरीदने वालों की चिंता
Bengaluru में घर खरीदते समय अब AQI, पानी और ट्रैफिक भी बन रहे हैं बड़े फैक्टर

अब तक घर खरीदते समय लोकेशन, कीमत और कनेक्टिविटी ही सबसे बड़े पैमाने माने जाते थे, लेकिन तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। Delhi-NCR के बाद अब Bengaluru में भी हवा की गुणवत्ता (AQI) और पानी की उपलब्धता उन अहम सवालों में शामिल हो गई है, जिन पर होमबायर्स गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

हाल ही में Reddit पर “क्या Bengaluru में शिफ्ट होना वाकई सही फैसला है?” जैसे सवालों ने इस बहस को और तेज कर दिया है। लोग अब यह पूछने लगे हैं कि 15-20 साल बाद शहर में रहना कितना सुरक्षित और टिकाऊ होगा।

AQI और पानी पर उठे बड़े सवाल

Reddit पर एक यूज़र ने लिखा,
“इतनी ऊंची जमीन की कीमतों और बढ़ते खर्चों के बीच क्या Bengaluru में शिफ्ट होना सही है? क्या 15-20 साल बाद यहां की हवा बेहतर होगी?”

Delhi-NCR के बाद अब Bengaluru में भी AQI और पानी बना घर खरीदने वालों की चिंता


यह सवाल उसी चिंता को दर्शाता है, जो हाल के महीनों में Delhi-NCR में देखने को मिली है, जहां बिगड़ते AQI ने लोगों को लंबे समय की रहने-लायक स्थिति पर सोचने को मजबूर किया है।

Central Pollution Control Board (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह दिल्ली का AQI 381 दर्ज किया गया, जो ‘Very Poor’ श्रेणी में आता है। एक दिन पहले यह आंकड़ा 427 था, यानी ‘Severe’।
वहीं दूसरी ओर, Bengaluru का AQI 178 रहा, जो ‘Moderate’ कैटेगरी में आता है।

CPCB के मुताबिक:

  • 0-50: अच्छा
  • 51-100: संतोषजनक
  • 101-200: मध्यम
  • 201-300: खराब
  • 301-400: बहुत खराब
  • 401-500: गंभीर

हर मेट्रो की अपनी परेशानी

Reddit यूज़र्स का कहना है कि कोई भी बड़ा शहर पूरी तरह “परफेक्ट” नहीं है।
एक यूज़र ने लिखा,
“Delhi में AQI की दिक्कत है, Bengaluru में ट्रैफिक और पानी की समस्या है, जबकि Mumbai में रियल एस्टेट आम आदमी की पहुंच से बाहर है।”

कुछ लोगों ने Pune को एक संभावित विकल्प बताया, जहां फिलहाल हवा अपेक्षाकृत बेहतर है और इंफ्रास्ट्रक्चर का दबाव थोड़ा कम है।

शहरों से बाहर जाने का बढ़ता ट्रेंड

Hanu Reddy Realty के वाइस प्रेसिडेंट Kiran Kumar के मुताबिक, अब सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा कपल्स भी शहर के केंद्र से दूर घर तलाश रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक पहले से ही मुख्य सड़कों और ट्रैफिक से दूर इलाकों को प्राथमिकता देते रहे हैं, लेकिन अब वही सोच युवाओं में भी दिखने लगी है।

उनके अनुसार,
“North Bengaluru के आउटर इलाकों की तरफ शिफ्ट होने का ट्रेंड बढ़ रहा है, जहां हवा साफ है, शोर कम है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर लगती है।”

सस्टेनेबिलिटी सिर्फ चेकलिस्ट नहीं

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर खरीदार अब भी प्रति वर्ग फुट कीमत को सबसे बड़ा पैमाना मानते हैं। सस्टेनेबिलिटी अक्सर सिर्फ सोलर पैनल या रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसे फीचर्स तक सीमित रह जाती है।

Delhi-NCR के बाद अब Bengaluru में भी AQI और पानी बना घर खरीदने वालों की चिंता


Ecoparadigm के मैनेजिंग डायरेक्टर और सिविल इंजीनियर Pravinjith KP का कहना है कि असली सवाल “आउटकम” का होना चाहिए।
यानी कितना पानी बच रहा है, कितनी ऊर्जा की जरूरत कम हो रही है, और क्या वास्तव में हवा की गुणवत्ता सुधर रही है—न कि सिर्फ ग्रीन टैग लगाना।

पानी और बढ़ती लागत सबसे बड़ी चिंता

Bengaluru के तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण को लेकर भी कई लोगों ने चिंता जताई है।
एक यूज़र ने लिखा,
“₹3 करोड़ देकर 3BHK खरीदने के बाद भी आपको पानी के टैंकर पर निर्भर रहना पड़ सकता है।”

पर्यावरणविद Sandeep Anirudhan के मुताबिक, शहर को Cauvery नदी से करीब 1,450 मिलियन लीटर प्रतिदिन पानी मिलता है, लेकिन मांग इससे कहीं ज्यादा है। इसी वजह से बड़ी आबादी को प्राइवेट टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।

होमबायर्स की सोच बदल रही है

विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में लोग सिर्फ नौकरी और प्रॉपर्टी वैल्यू पर नहीं, बल्कि हवा, पानी और जीवन की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देंगे।
संभावना है कि भविष्य में Tier-2 शहर और बड़े शहरों के आउटर ज़ोन ज्यादा आकर्षक विकल्प बनकर उभरें।

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