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BCCI क्यों खत्म करने जा रहा है A+ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम? Devajit Saikia ने बताई अंदर की वजह

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भारतीय क्रिकेट में बदलाव की आहट, BCCI A+ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर कर रहा है पुनर्विचार
भारतीय क्रिकेट में बदलाव की आहट, BCCI A+ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर कर रहा है पुनर्विचार

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI एक बार फिर अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड आने वाले समय में खिलाड़ियों के लिए मौजूद A+ कॉन्ट्रैक्ट कैटेगरी को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस फैसले को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।

इस पूरे मुद्दे पर देवजीत सैकिया, जो BCCI में अहम प्रशासनिक भूमिका निभा रहे हैं, ने खुलकर बात की है। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला किसी खिलाड़ी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि क्रिकेट की बदलती जरूरतों और कार्यभार को संतुलित करने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।

A+ कॉन्ट्रैक्ट क्यों बना था खास?

अब तक A+ कॉन्ट्रैक्ट भारतीय क्रिकेट का सबसे प्रीमियम कॉन्ट्रैक्ट माना जाता था। इस कैटेगरी में वही खिलाड़ी शामिल होते थे जो तीनों फॉर्मेट — टेस्ट, वनडे और टी20 — में भारत का प्रतिनिधित्व करते थे। उन्हें सालाना सबसे ज्यादा रिटेनर फीस मिलती थी, जो उनके अनुभव और निरंतर प्रदर्शन का सम्मान मानी जाती थी।

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अब बदलाव की ज़रूरत क्यों महसूस हुई?

देवजीत सैकिया के मुताबिक, मौजूदा दौर में क्रिकेट सिर्फ तीन फॉर्मेट तक सीमित नहीं रहा। खिलाड़ियों का कैलेंडर बेहद व्यस्त हो चुका है — इंटरनेशनल मैच, IPL, फिटनेस मैनेजमेंट और ट्रैवल। ऐसे में सभी फॉर्मेट खेलना हर खिलाड़ी के लिए व्यावहारिक नहीं रह गया है।

भारतीय क्रिकेट में बदलाव की आहट, BCCI A+ कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर कर रहा है पुनर्विचार


BCCI का मानना है कि सिर्फ फॉर्मेट की संख्या के आधार पर खिलाड़ियों को आंकना अब पुराना मॉडल हो चुका है। बोर्ड अब परफॉर्मेंस, वर्कलोड मैनेजमेंट और टीम की जरूरतों को ज्यादा अहमियत देना चाहता है।

क्या सीनियर खिलाड़ियों पर पड़ेगा असर?

इस फैसले से सीनियर खिलाड़ियों को लेकर सवाल उठना लाज़मी है। हालांकि BCCI ने साफ संकेत दिए हैं कि खिलाड़ियों की कमाई या सम्मान में अचानक कोई कटौती नहीं की जाएगी। नए कॉन्ट्रैक्ट स्ट्रक्चर में खिलाड़ियों के योगदान और उपलब्धता को ज्यादा संतुलित तरीके से देखा जाएगा।

भारतीय क्रिकेट के भविष्य की सोच

BCCI का यह कदम बताता है कि बोर्ड अब भावनाओं से ज्यादा सिस्टम और लॉन्ग-टर्म प्लानिंग पर फोकस कर रहा है। आने वाले समय में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम ज्यादा लचीला और आधुनिक हो सकता है, जिससे युवा खिलाड़ियों को भी बराबरी का मौका मिल सके।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बदलाव सही तरीके से लागू हुआ, तो भारतीय क्रिकेट को लंबे समय में फायदा ही होगा।