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फिल्म इवेंट की एक टिप्पणी कैसे बन गई पुलिस केस? Anasuya Bharadwaj पर ऑनलाइन हमले के बाद 42 नाम FIR में…
Sivaji के बयान पर विरोध ने पकड़ा तूफ़ान, Anasuya Bharadwaj ने Cyberabad Cyber Crime Police से लगाई गुहार
एक फिल्म इवेंट पर हुई विवादित टिप्पणी से शुरू हुआ मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुँच गया है। तेलुगु सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री और एंकर Anasuya Bharadwaj ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों, यौन उत्पीड़न और धमकियों की बाढ़ आ गई, जिसके बाद उन्होंने Cyberabad Cyber Crime Police से शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर 42 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
यह विवाद उस समय भड़का जब अभिनेता Sivaji ने फिल्म Dhandoraa के प्री-रिलीज़ इवेंट में महिलाओं को लेकर टिप्पणी की। सोशल मीडिया पर इसे मिसोजिनी (महिला-विरोधी भाषा) करार दिया गया और सार्वजनिक बहस तेज़ हो गई। Anasuya उन शुरुआती सार्वजनिक हस्तियों में थीं जिन्होंने इन टिप्पणियों की आलोचना की—और यहीं से उनके खिलाफ ऑनलाइन हमलों का सिलसिला शुरू हुआ।
शिकायत में क्या कहा गया?
Anasuya के मुताबिक 23 दिसंबर के बाद से उन्हें विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील टिप्पणियाँ, उम्र को लेकर तंज (age-shaming) और धमकियाँ मिलने लगीं। पुलिस ने बताया कि जिन खातों पर कार्रवाई हुई है, उनमें Bojja Sandhya Reddy, Priya Choudary Gogineni, Pavani, रेडियो जॉकी Shekhar Basha और Rajini जैसे नाम शामिल हैं। जांच एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि क्या इन पोस्ट्स के पीछे कोई संगठित समन्वय था।

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सोशल मीडिया पर Anasuya की मुखर प्रतिक्रिया
25 दिसंबर को Anasuya ने X (पूर्व में Twitter) पर तेलुगु में पोस्ट कर उम्र-शेमिंग का जवाब दिया। उन्होंने लिखा कि मुद्दे पर बात करने के बजाय उन्हें “आंटी” कहकर निशाना बनाया जा रहा है, जबकि समान उम्र के पुरुषों को सम्मान मिलता है। उन्होंने साफ़ कहा कि यह बहस महिलाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिशों पर है, न कि किसी व्यक्ति पर निजी हमला।
आगे के पोस्ट्स में Anasuya ने खुद को मज़बूती से खड़ा बताते हुए कहा कि वह लंबे समय से अनसुनी रही एक सामाजिक आवाज़ का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उनके शब्दों ने कई समर्थकों को प्रेरित किया, वहीं ट्रोलिंग और तेज़ हो गई—जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज हुई।
Sivaji की माफ़ी
विवाद बढ़ने पर Sivaji ने वीडियो जारी कर माफ़ी माँगी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था और उनका उद्देश्य किसी भी महिला का अपमान करना नहीं था। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर भाषा की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता अनिवार्य है।
कानूनी और सामाजिक संदेश
यह मामला केवल एक ऑनलाइन बहस नहीं, बल्कि डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन उत्पीड़न और सार्वजनिक विमर्श में भाषा की मर्यादा जैसे मुद्दों को सामने लाता है। साइबर अपराध इकाइयों की सक्रियता यह संकेत देती है कि सोशल मीडिया पर की गई हरकतें जवाबदेही से मुक्त नहीं हैं।
