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“मन का हो तो अच्छा… न हो तो और भी अच्छा”: अमिताभ बच्चन की वह सीख जिसने लाखों को टूटने से पहले संभाला
बिग बी ने पिता हरिवंश राय बच्चन की जिस लाइन को जीवन-सूत्र बनाया, वही आज असफलता, डर और अनिश्चितता में डूबे लोगों के लिए सबसे बड़ी रोशनी बन गई है।
भागदौड़ से भरी इस दुनिया में जहाँ हर कोई अपनी मनचाही मंज़िल को पकड़ने में लगा है, वहीं अमिताभ बच्चन जैसी महान हस्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि जीवन सिर्फ जीत और नियंत्रण का नाम नहीं है—कभी-कभी हार, ठहराव और मोड़ ही हमें वहाँ ले जाते हैं जहाँ हमें जाना चाहिए।
हाल ही में एक बातचीत में बिग बी ने वह जीवन-दर्शन साझा किया, जो उन्हें उनके पिता—प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन—से मिला था। वे कहते हैं:
“मन का हो तो अच्छा है, न हो तो और भी अच्छा।”
पहली बार सुनने पर यह वाक्य किसी पहेली जैसा लगता है। आखिर जो चीज हमारी इच्छा के अनुसार न हो, वह बेहतर कैसे हो सकती है?
अमिताभ बताते हैं—वे भी इसे तुरंत नहीं समझ पाए थे। लेकिन जैसे-जैसे जीवन ने ऊँच-नीच दिखाए—फिल्मों की असफलता, आर्थिक झटके, स्वास्थ्य संघर्ष, और लोगों की अपेक्षाओं का भारी दबाव—यह वाक्य उनके लिए ढाल बन गया।
“ना” में छुपा हुआ एक बड़ा “हाँ”
बिग बी कहते हैं—कई बार जब जीवन हमारी मनमर्जी का रास्ता बंद करता है, वो हमें धक्का देकर किसी ऐसे रास्ते पर डाल रहा होता है जो आगे चलकर बेहतर साबित होता है।
यही वजह है कि जब चीजें बिगड़ती हैं, वे इसे असफलता नहीं, बल्कि Redirect—नई दिशा के रूप में देखते हैं।
उदाहरण के तौर पर, 90 के दशक में जब अमिताभ की फिल्मों ने लगातार फ्लॉप देना शुरू किया, वह उनके करियर का सबसे कठिन समय था। लेकिन यही दौर आगे चलकर ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की ओर ले गया—एक ऐसा शो जिसने उन्हें नए युग का सुपरस्टार बना दिया।
जब जीवन जमीन पर गिरा देता है—“Lifequake” का सच
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट प्रियम्वदा तेंडुलकर इस अनुभव को “Lifequake” कहती हैं—एक ऐसा झटका जो हमें भीतर तक हिला देता है।
वह कहती हैं:
“हम जन्म से ही कुछ ऐसे तौर-तरीके सीखते हैं जो हमें बचाते तो हैं, लेकिन धीरे-धीरे वही बोझ बन जाते हैं। जब यह बोझ हमें तोड़ देता है, तब जीवन हमें बदले बिना नहीं छोड़ता।”
यही अंधेरा, यह टूटना—कई बार वही मौका होता है जहाँ से हमारी असली यात्रा शुरू होती है।
और बिल्कुल पौराणिक नायकों की तरह—हम नीचे गिरकर ही ऊपर उठना सीखते हैं।
असली ‘हम’ का जन्म—घायल लेकिन पूरे
तेंडुलकर मानती हैं कि जब हम जीवन की क्रूर सच्चाइयों से टकराते हैं, तभी हमारा सच्चा स्वरूप प्रकट होता है।
यह वही मोड़ है जहाँ:
- नक़ाब उतरते हैं
- झूठी उम्मीदें टूटती हैं
- और हम पहली बार खुद को साफ-साफ देखते हैं
चाहे हम थके हों, टूटे हों—लेकिन यही वह पल है जब हम सच में पूरे बनते हैं।
बिग बी का संदेश—“संघर्ष खत्म नहीं होगा, लेकिन कल हमेशा नया होगा”
अमिताभ बच्चन कहते हैं:
“जब तक जीवन है, संघर्ष रहेगा। लेकिन कल नया दिन है—नई चुनौती, पर नई उम्मीद भी।”
वह स्वीकार करते हैं कि बीती असफलताएँ आज भी उन्हें डराती हैं।
लेकिन वह फिर भी आगे बढ़ते हैं—क्योंकि अब वे जानते हैं कि हर रुकावट, हर मोड़ का कोई न कोई उद्देश्य होता है।
जीवन का सबसे बड़ा सबक—रुकना नहीं, बहना सीखना है
बच्चन की यह फिलॉसफी और तेंडुलकर की समझ हमें एक ही बात सिखाती है:
ज़मीन पर गिरना अंत नहीं—यह वह जगह है जहाँ से उठने की शुरुआत होती है।
कई बार जो रास्ता हम चाहते हैं वह नहीं खुलता,
क्योंकि जीवन हमें उससे भी बेहतर रास्ते पर ले जाना चाहता है।
और यही “ना हो तो और भी अच्छा” का चमत्कार है।
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