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आख़िरकार हटा अमिताभ बच्चन की साइबर क्राइम कॉलर ट्यून सोशल मीडिया पर मना जश्न इंसानियत ज़िंदा है
कई यूज़र्स ने इसे बताया अनचाहा और असंवेदनशील लोगों ने शेयर कीं अपनी परेशानियां और राहत की सांस ली
26 जून 2025 को आखिरकार वह दिन आ ही गया जब लाखों मोबाइल यूज़र्स को राहत मिली। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज़ में चल रही साइबर क्राइम अवेयरनेस कॉलर ट्यून को सरकार ने हटा दिया। इस कॉलर ट्यून को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि यह आपात स्थिति में कॉल करने में बाधा बन रही है।
हालांकि जब इस कॉलर ट्यून को पहली बार शुरू किया गया था, तो उसका उद्देश्य था — लोगों को साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करना। लेकिन समय के साथ यह अवेयरनेस मैसेज, यूज़र्स के लिए परेशानी का सबब बन गया। शोले अभिनेता की आवाज़ में चेतावनी भरा यह संदेश ना सिर्फ़ स्किप करना मुश्किल था, बल्कि उसे किसी भी इमरजेंसी कॉल के दौरान भी सुना जाना ज़रूरी था — जो कि कई यूज़र्स के लिए जानलेवा स्थिति बन चुका था।
एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा थैंक गॉड इसे हटा दिया गया। इतनी इरिटेटिंग थी कि चाहकर भी स्किप नहीं कर सकते थे।
वहीं एक और यूज़र ने मजाकिया लहजे में कहा 2025 में कुछ तो अच्छा हुआ। इंसानियत अभी बाकी है मतलब।
इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली प्रतिक्रिया एक महिला यूज़र की रही जिन्होंने लिखा, “पिछले हफ्ते मेरा एक्सीडेंट हो गया था, मुझे अस्पताल ले जाया जा रहा था। मैंने मम्मी को कॉल करने की कोशिश की लेकिन कॉलर ट्यून सुनकर ऐसा लगा कि मोबाइल फेंक दूं।
कौनसी चेतावनी थी?
सावधान रहें! साइबर अपराध से बचें यह संदेश आपको भारत सरकार की ओर से दिया जा रहा है। इस लाइन के साथ अमिताभ बच्चन की गंभीर आवाज़ सुनने को मिलती थी, जो कि हर बार कॉल से पहले बजती थी।
कई लोगों ने जताई राहत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जैसे ही इसकी हटने की खबर आई, लोगों ने मीम्स, पोस्ट और वीडियो के ज़रिए अपनी खुशी जाहिर की। एक यूज़र ने तो मजाक में ये तक कहा अब कॉलर ट्यून से नहीं, सीधा इंसान से बात हो सकेगी।
क्या है सरकार की अगली योजना?
सूत्रों के मुताबिक अब सरकार जन-जागरूकता अभियान के लिए नए और कम इंट्रूज़िव तरीकों पर विचार कर रही है। विज्ञापन डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाना प्राथमिकता होगी।
इस कदम को कई डिजिटल नीति विशेषज्ञों ने सही बताया है जो मानते हैं कि ऐसे संदेश जबरन थोपे जाने की बजाय उपयोगकर्ता की सहमति से सुनाए जाने चाहिए।
