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Amazon को देना होगा 2.5 अरब डॉलर का जुर्माना प्राइम मेंबरशिप में ग्राहकों को फंसाने का आरोप
अमेरिकी FTC का दावा Amazon ने प्राइम सब्सक्रिप्शन रद्द करना ग्राहकों के लिए बनाया मुश्किल कंपनी करेगी करोड़ों को रिफंड
दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी Amazon एक बड़े विवाद में फंस गई है। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने ग्राहकों को जानबूझकर प्राइम मेंबरशिप में फंसाया और जब वे इसे रद्द करना चाहते थे तो प्रक्रिया बेहद जटिल बना दी।
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इस मामले में Amazon ने ऐतिहासिक समझौते के तहत 2.5 अरब डॉलर (करीब 21 हजार करोड़ रुपये) चुकाने का फैसला किया है। इसमें से 1 अरब डॉलर सिविल पेनाल्टी के रूप में जाएगा, जबकि 1.5 अरब डॉलर उन ग्राहकों को लौटाया जाएगा, जो बिना मंशा के प्राइम मेंबरशिप में शामिल हो गए थे या जिन्होंने रद्द करने की कोशिश की मगर कर नहीं पाए।
क्या है पूरा मामला?
FTC के अनुसार Amazon की “सिंगल पेज चेकआउट” जैसी प्रक्रियाओं में ग्राहक को यह साफ जानकारी नहीं दी जाती थी कि वे खरीदारी के साथ प्राइम मेंबरशिप में भी शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा सब्सक्रिप्शन रद्द करने के लिए तीन पेज तक क्लिक करना पड़ता था, जिसे कंपनी के अंदरूनी तौर पर “Iliad” नाम दिया गया था – ग्रीक साहित्य की लंबी जंग से प्रेरित।
ग्राहकों को मिलेगा रिफंड
FTC ने बताया कि 23 जून 2019 से 23 जून 2025 के बीच प्राइम मेंबरशिप में शामिल हुए ऐसे ग्राहकों को, जिन्होंने अनजाने में सब्सक्रिप्शन लिया, उन्हें ऑटोमैटिक रिफंड मिलेगा। इस रिफंड की राशि $51 तक हो सकती है। अनुमान है कि करीब 30 मिलियन ग्राहक इस दायरे में आएंगे।

Amazon का पक्ष
कंपनी के प्रवक्ता मार्क ब्लैफकिन ने कहा –
“Amazon और हमारे एग्जीक्यूटिव्स हमेशा कानून का पालन करते आए हैं। यह समझौता हमें आगे बढ़ने और ग्राहकों के लिए इनोवेशन पर ध्यान देने का मौका देगा।”
कंपनी ने यह भी कहा कि प्राइम को साइन अप या कैंसिल करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाया गया है।
क्यों अहम है प्राइम?
Amazon Prime कंपनी की सबसे मजबूत सेवाओं में से एक है। इसके 200 मिलियन से ज्यादा सदस्य हैं। सब्सक्रिप्शन से कंपनी को 2025 की दूसरी तिमाही में ही 12 अरब डॉलर से ज्यादा का राजस्व मिला। इसमें फास्ट शिपिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग, Whole Foods पर डिस्काउंट और ई-बुक्स जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
FTC की सख्ती और तुलना
FTC के निदेशक क्रिस मुफारिगे ने कहा –
“Amazon को एहसास हो गया कि वह यह केस हार जाएगा। इसलिए कंपनी ने कुछ ही दिनों में समझौते पर हामी भर दी।”
गौरतलब है कि इससे पहले Meta (Facebook) पर 2019 में प्राइवेसी उल्लंघन के लिए 5 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि यह Amazon पर FTC द्वारा लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा पेनाल्टी है।
आगे के नियम
समझौते के बाद Amazon पर यह शर्त लागू हुई है कि—
- सब्सक्रिप्शन की शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए।
- ऑटो-रिन्यूअल को साफ शब्दों में दिखाना होगा।
- कैंसिलेशन प्रक्रिया तेज, आसान और पारदर्शी होनी चाहिए।
- ग्राहक से प्राइम लेने के लिए सीधे “Yes” और “No” विकल्प देना होगा।
नतीजा
यह मामला इस बात की मिसाल है कि बड़ी टेक कंपनियों को भी उपभोक्ताओं के अधिकारों की अनदेखी करने पर भारी कीमत चुकानी पड़ती है। एक तरफ जहां यह समझौता ग्राहकों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर Amazon अब अपनी साख बचाने और भरोसा कायम रखने की चुनौती का सामना करेगा।

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