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अजीत पवार के बेटे से जुड़ी पुणे की जमीन पर बवाल, सरकार की संपत्ति निकली – देवेंद्र फडणवीस ने दिए जांच के आदेश
पुणे की 40 एकड़ जमीन पर विवाद गहराया, जांच में सामने आया कि यह राज्य सरकार की संपत्ति थी; अजीत पवार के बेटे की कंपनी को हुआ सौदा अब रद्द।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर विवाद का नया अध्याय जुड़ गया है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी पुणे की 40 एकड़ जमीन अब सुर्खियों में है। यह जमीन, जो कभी बोटैनिकल गार्डन और फिर आईटी पार्क के रूप में इस्तेमाल की जानी थी, अब एक बड़े घोटाले के शक के घेरे में आ गई है।
शुक्रवार को महाराष्ट्र के संयुक्त महानिरीक्षक (पंजीकरण) राजेंद्र मुथे ने खुलासा किया कि यह पूरी जमीन राज्य सरकार की थी और किसी भी कीमत पर निजी तौर पर बेची नहीं जा सकती थी। उन्होंने बताया कि इस जमीन के स्वामित्व दस्तावेज़ — यानी 7/12 उतारा — में “मुंबई सरकार” (erstwhile Bombay Government) का नाम दर्ज है, जो यह साबित करता है कि यह सरकारी संपत्ति थी।
इस सौदे में पार्थ पवार और दिग्विजय पाटिल की साझेदारी वाली लिमिटेड लाइबिलिटी फर्म का नाम सामने आया है, जिसने यह जमीन शीटल तेजवानी नाम की महिला से खरीदी थी, जिनके पास कथित तौर पर पावर ऑफ अटॉर्नी थी। अब सवाल उठ रहा है कि जब यह जमीन सरकार की थी, तो इसे निजी तौर पर कैसे बेचा गया?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि “इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई, तो सख्त कार्रवाई होगी।” फडणवीस ने कहा कि इस सौदे को रद्द कर दिया गया है और सात दिनों में जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

राज्य सरकार ने इस प्रकरण के लिए एक विशेष जांच समिति गठित की है जो यह पता लगाएगी कि आखिर 2018 के बाद जारी प्रॉपर्टी कार्ड में नाम बदलने की प्रक्रिया कैसे हुई और किन अधिकारियों ने इसमें भूमिका निभाई। सूत्रों के अनुसार, यह जमीन पहले बोटैनिकल गार्डन प्रोजेक्ट के तहत आरक्षित थी, लेकिन समय के साथ दस्तावेजों में बदलाव किए गए और इसे निजी स्वामित्व में दिखाया गया।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा है कि “सरकार में बैठे ताकतवर लोग अपनी स्थिति का गलत फायदा उठा रहे हैं।” वहीं, अजीत पवार ने मीडिया से कहा कि “इस मामले में कोई भी गलती अगर साबित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए — चाहे वह कोई भी हो।”
यह मामला न केवल महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि इससे जमीन से जुड़ी रजिस्ट्री प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। फिलहाल प्रशासन ने विवादित जमीन पर किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री या निर्माण पर रोक लगा दी है।
राज्य के शहरी विकास विभाग ने भी इस जमीन की मौजूदा स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। वहीं, पार्थ पवार के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उन्होंने यह जमीन “कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी थी” और अगर कोई विसंगति सामने आती है, तो वे पूरी तरह से जांच में सहयोग करेंगे।
महाराष्ट्र में इससे पहले भी कई बार सरकारी जमीनों को निजी उपयोग के लिए बेचे जाने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इसमें उपमुख्यमंत्री के परिवार का नाम जुड़ा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद विधानसभा तक गूंज सकता है।
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