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रणजी ट्रॉफी में अनोखी घटना! मणिपुर के अजॉय सिंह को ‘दो बार बल्ला लगाने’ पर आउट, फैंस बोले—“ये तो गली क्रिकेट वाला नियम है”

मेघालय के खिलाफ मैच में लामाबम अजॉय सिंह को दुर्लभ तरीके से आउट दिया गया—उमांग बढ़ा, लेकिन खिलाड़ी ने बिना विरोध फैसला स्वीकार किया।

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Ranji Trophy: Ajay Singh Given Out for Hitting Ball Twice in Rare Dismissal | Dainik Diary
“लामाबम अजॉय सिंह को ‘दो बार बल्ला लगाने’ पर आउट—रणजी मैच में दुर्लभ dismissal।”

सूरत — क्रिकेट में हर दिन कुछ नया देखने को मिलता है, लेकिन बुधवार को रणजी ट्रॉफी प्लेट लीग में जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। मणिपुर के बल्लेबाज़ लामाबम अजॉय सिंह को मेघालय के खिलाफ मैच में उस तरीके से आउट दिया गया, जिसे आम लोग मज़ाक में “गली क्रिकेट का नियम” कहते हैं—हिटिंग द बॉल ट्वाइस, यानी गेंद को दो बार मारना

यह घटना मेघालय के गेंदबाज़ आर्यन बोरा की एक डिलीवरी पर हुई। अजॉय ने पहली बार गेंद को डिफेंड किया, लेकिन गेंद हल्की सी घूमकर वापस स्टंप्स की ओर बढ़ने लगी। उस पल उन्होंने स्वाभाविक रूप से अपनी क्रीज़ बचाने के लिए बल्ला दोबारा गेंद पर लगा दिया।

फैसला चौंकाने वाला, लेकिन खिलाड़ी ने दिखाया खेलभावना

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि अजॉय सिंह या मणिपुर टीम ने इस फैसले पर कोई विरोध नहीं किया।
हालाँकि कई दर्शक और ऑनलाइन फैंस मान रहे थे कि खिलाड़ी के पास नॉट आउट होने का मजबूत आधार था।

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क्रिकेट के MCC नियमों के मुताबिक खुद को चोट या स्टंप्स बचाने के लिए बल्लेबाज गेंद को दूसरी बार हिट कर सकता है—लेकिन यह शर्त है कि वह रन लेने की कोशिश न करे। हालांकि रेफरी का मानना था कि बल्लेबाज की दूसरी हिट “अनावश्यक” थी, और इसलिए उन्हें आउट दिया गया।

फैंस की प्रतिक्रिया—“ऐसी चीजें तो सिर्फ मोहल्ले के मैचों में होती हैं!”

जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, फैंस ने कमेंट्स की बौछार लगा दी।
किसी ने लिखा— “यह आउट तो हमने बचपन में ही देखा है!”
एक यूज़र ने मज़ाक में कहा— “अगर ऐसे आउट देने लगे तो आधे बल्लेबाज़ तो नेट प्रैक्टिस में ही आउट हो जाएँ!”

रणजी में ऐसे दुर्लभ फैसले कम ही देखने को मिलते हैं

क्रिकेट इतिहास में “हिट द बॉल ट्वाइस” dismissal बहुत कम हुआ है। इंटरनेशनल क्रिकेट में भी यह घटना बेहद दुर्लभ है।
लेकिन इस फैसले ने एक बार फिर मैदान पर मौजूद अंपायरों और MCC नियमों की बारीकियों को चर्चा में ला दिया है।

यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ी कितनी शालीनता से नियमों का सम्मान करते हैं। अजॉय सिंह का शांत रवैया कई क्रिकेटरों के लिए सीख है कि खेलभावना जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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