India News
यूके जा रही एयर इंडिया फ्लाइट में मिड-एयर इमरजेंसी पावर सिस्टम एक्टिव जांच में जुटा DGCA
अमृतसर से बर्मिंघम जा रही फ्लाइट में अचानक सक्रिय हुआ ‘राम एयर टर्बाइन’, सभी यात्री सुरक्षित, लेकिन घटना ने खड़े किए सुरक्षा पर सवाल।
भारतीय विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। एयर इंडिया की अमृतसर से बर्मिंघम जा रही फ्लाइट (AI117) में शनिवार को मिड-एयर इमरजेंसी पावर सिस्टम, जिसे राम एयर टर्बाइन (RAT) कहा जाता है, अचानक सक्रिय हो गया। आमतौर पर RAT तभी डिप्लॉय होता है जब विमान के सभी पावर सिस्टम फेल हो जाएं, लेकिन इस बार सभी सिस्टम सामान्य थे।
क्या हुआ फ्लाइट में?
एयर इंडिया के अनुसार, यह घटना फ्लाइट के बर्मिंघम एयरपोर्ट पर लैंडिंग से ठीक पहले, लगभग 500 फीट की ऊंचाई पर हुई। पायलटों ने RAT के एक्टिवेशन को नोटिस किया और लैंडिंग के बाद विमान की पूरी जांच की गई। सभी इलेक्ट्रिकल और हाइड्रोलिक पैरामीटर सामान्य पाए गए और विमान सुरक्षित उतर गया।
घटना के बाद विमान को अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया गया था। अब जांच और सेफ्टी चेक के बाद इसे फिर से ऑपरेशन में शामिल कर लिया गया है।
पिछली घटना की याद
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कुछ महीने पहले अहमदाबाद में एयर इंडिया का एक विमान उड़ान भरने के 30 सेकंड बाद ही क्रैश हो गया था। उस हादसे में 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय भी RAT डिप्लॉयमेंट की चर्चा सामने आई थी। इस वजह से मौजूदा घटना को और गंभीरता से लिया जा रहा है।

पायलट एसोसिएशन की चिंता
फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स के अध्यक्ष चरणवीर रंधावा ने कहा, “बी-787 विमान पर बिना किसी तकनीकी समस्या के RAT का एक्टिव होना बेहद चिंता का विषय है।” संगठन ने DGCA, एविएशन मंत्रालय और क्रैश जांच एजेंसी को पत्र लिखकर देश में मौजूद सभी Boeing 787 विमानों की इलेक्ट्रिकल सिस्टम जांच की मांग की है।
RAT क्यों होता है महत्वपूर्ण?
राम एयर टर्बाइन (RAT) विमान के लिए एक तरह का ‘लास्ट-रिजॉर्ट’ पावर सिस्टम है। जब विमान में पावर फेल हो जाता है, तो यह छोटे टर्बाइन से बिजली पैदा कर उड़ान नियंत्रण, नेविगेशन और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों को सक्रिय रखता है। सामान्य परिस्थितियों में इसका एक्टिव होना दुर्लभ है।
आगे की राह
DGCA ने मामले की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना किसी गहरी तकनीकी खामी की ओर इशारा कर सकती है और यदि समय रहते जांच न हुई तो यह भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि विमानन सुरक्षा में कोई भी ‘छोटी’ तकनीकी गड़बड़ी भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती।
For more Update http://www.dainikdiary.com
