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टी20 वर्ल्ड कप की तैयारी पर बवाल, ‘ज़ीरो प्लानिंग’ कहकर अगर्कर पर बरसे Mohammad Kaif
शुभमन गिल को आख़िरी वक्त पर बाहर करने से मची अव्यवस्था, कैफ बोले—इस उथल-पुथल की क़ीमत अक्षर पटेल ने चुकाई
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारतीय टीम की रणनीति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर Mohammad Kaif ने चयन समिति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “ज़ीरो प्लानिंग” करार दिया है। कैफ का कहना है कि Ajit Agarkar की अगुवाई वाली चयन समिति ने आख़िरी समय में ‘प्रोजेक्ट Shubman Gill’ से यू-टर्न लिया, जिससे टीम की सोच में भ्रम साफ झलका—और इसका सीधा नुकसान Axar Patel को हुआ।
हाल ही में घोषित टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड में शुभमन गिल का नाम न होना सबसे बड़ा सरप्राइज़ रहा। सितंबर में टी20 फॉर्मेट में वापसी के बाद गिल को लगातार मौके मिले, लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इस दौरान उन्होंने कई मैच खेले, पर एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज़ में 4, 0 और रन-ए-बॉल 28 जैसे स्कोर ने चयनकर्ताओं का धैर्य तोड़ दिया।
अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कैफ ने कहा कि टी20 फॉर्मेट में गिल को इतने लंबे समय तक आज़माना ही गलत था। उनके मुताबिक, इस अवधि में Yashasvi Jaiswal, Sanju Samson और Jitesh Sharma जैसे खिलाड़ियों पर निवेश किया जा सकता था, जो इस फॉर्मेट के लिए ज़्यादा मुफ़ीद माने जाते हैं।

कैफ की नाराज़गी सिर्फ गिल तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अक्षर पटेल के नेतृत्व रोल में बार-बार बदलाव को भी गलत ठहराया। पहले अक्षर को उपकप्तान बनाया गया, फिर गिल की वापसी के साथ उन्हें हटाकर गिल को Suryakumar Yadav का डिप्टी बनाया गया। अब गिल के बाहर होने पर अक्षर को फिर से उपकप्तान बना दिया गया। कैफ का मानना है कि इस उठा-पटक में अक्षर को दो-तीन महीने का अहम नेतृत्व अनुभव गंवाना पड़ा।
उन्होंने कहा, “अगर अक्षर लगातार उपकप्तान रहते, तो टीम मीटिंग्स और नेतृत्व की तैयारी में उनका योगदान बढ़ता। मान लीजिए कप्तान को चोट लगती है, तो उस स्थिति में अक्षर कहीं बेहतर तरीके से तैयार होते। यह मौका उनसे छीन लिया गया।”
अंत में कैफ ने स्वीकार किया कि गिल को बाहर करना सही फैसला है, लेकिन यह बहुत देर से लिया गया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यह सब ‘प्लानिंग’ के नाम पर समय की बर्बादी है—न सिर्फ टीम के लिए, बल्कि उन खिलाड़ियों के लिए भी, जिन्हें मौके मिलने चाहिए थे।
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