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अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप, 20 की मौत और 320 से ज्यादा घायल
मजार-ए-शरीफ के पास आया भीषण झटका, ऐतिहासिक ‘ब्लू मस्जिद’ को नुकसान, सैकड़ों घायल — बचाव दल जुटे राहत कार्यों में।
अफगानिस्तान एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। सोमवार सुबह देश के उत्तरी हिस्से मजार-ए-शरीफ के पास आए 6.3 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचा दी। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, 20 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 320 से ज्यादा लोग घायल हैं। स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी दी है कि मौत का आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई दूरदराज़ के गांवों तक राहत दल अभी नहीं पहुंच पाए हैं।
ऐतिहासिक ब्लू मस्जिद को नुकसान
भूकंप का केंद्र मजार-ए-शरीफ से लगभग 28 किलोमीटर गहराई में था। इस झटके ने शहर की ब्लू मस्जिद (Blue Mosque) को भी नुकसान पहुंचाया है, जो अफगानिस्तान का सबसे पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है। यह मस्जिद पैगंबर मोहम्मद के दामाद और चचेरे भाई अली इब्न अबी तालिब के दफन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। 15वीं सदी में बनी इस मस्जिद के आंगन में पत्थर और टाइलें बिखरी हुई देखी गईं, हालांकि मुख्य ढांचा सुरक्षित बताया जा रहा है।
मलबे में चल रहा बचाव अभियान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर वायरल हुए कई वीडियो में राहतकर्मी मलबे में फंसे लोगों को निकालते नजर आ रहे हैं। कुछ फुटेज में स्थानीय नागरिकों को हाथों से मलबा हटाते और शवों को बाहर निकालते देखा जा सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शरफत ज़मान ने कहा,

“हमारी बचाव और स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंच चुकी हैं। सभी नज़दीकी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि घायलों का तुरंत इलाज हो सके।”
बिजली गुल, संचार बाधित
राष्ट्रीय बिजली आपूर्तिकर्ता दा अफगानिस्तान बरेशना कंपनी के अनुसार, भूकंप के बाद देशभर में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है, जिसमें राजधानी काबुल भी शामिल है। वहीं, दूरसंचार व्यवस्था भी कई इलाकों में ठप पड़ी है, जिससे बचाव कार्यों में कठिनाई हो रही है।
भूकंप की जड़ में सक्रिय फॉल्ट लाइनें
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, अफगानिस्तान दो सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर स्थित है, जहां से आए झटके बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में पहले भी कई विनाशकारी भूकंप आ चुके हैं। हाल ही में अगस्त 2025 में आए एक शक्तिशाली भूकंप में 2,200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।
तालिबान सरकार के लिए नई चुनौती
पहले से ही विदेशी सहायता में कटौती, शरणार्थियों की वापसी और आर्थिक संकट से जूझ रही तालिबान सरकार के सामने यह आपदा नई चुनौती बनकर आई है। राहत कार्यों में देरी और सीमित संसाधनों के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

“यह भूकंप सिर्फ एक आपदा नहीं, बल्कि अफगानिस्तान के लिए फिर से उठ खड़े होने की परीक्षा है,” एक स्थानीय पत्रकार ने कहा।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने मदद की पेशकश की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही है।
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Rafat Ali Khan
November 4, 2025 at 7:14 am
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