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Iran का Strait of Hormuz पर Toll Tax, Donald Trump ने दी चेतावनी, International Law क्या कहता है?
$2 Million की वसूली और UNCLOS का उल्लंघन — दुनिया की 20% Energy Supply खतरे में, India भी है प्रभावित
[New Delhi / Tehran / Washington] — समुद्र के बीच एक ऐसी लड़ाई छिड़ी हुई है जो सिर्फ US और Iran के बीच नहीं है, बल्कि इसकी आंच पूरी दुनिया तक पहुंच रही है। Strait of Hormuz, जो दुनिया की सबसे व्यस्त और सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारों में से एक है, अब एक नए विवाद का केंद्र बन गई है। Iran ने इस strait से गुजरने वाले commercial shipping vessels से $2 million तक का toll वसूलना शुरू कर दिया है, और US President Donald Trump ने इसके खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है।
क्या कहता है International Law?
यह मामला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी है। UN Convention on the Law of the Sea यानी UNCLOS के Articles 38 और 44 साफ तौर पर कहते हैं कि किसी भी international strait से सभी देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने का अधिकार है। इसे “transit passage” कहा जाता है। यह passage continuous और expeditious होना चाहिए और किसी भी bordering state को इसे impede करने का अधिकार नहीं है।
Iran ने UNCLOS पर 1982 में signature तो किया, लेकिन कभी ratify नहीं किया। इसका मतलब है कि वो technically इसकी सभी provisions से directly bound नहीं है। हालांकि, naval law और treaty experts का कहना है कि UNCLOS से अलग, customary international law भी Iran को इस तरह की वसूली से रोकता है।
Hindustan Times से बात करते हुए एक senior official ने कहा, “US और Israel के अलावा किसी ने Iran पर बमबारी नहीं की, तो फिर international channel से गुजरने के लिए Tehran को toll क्यों दिया जाए? यह कोई man-made canal नहीं है, यह एक Strait है। आज Iran ऐसा कर रहा है, कल China, Taiwan और South China Sea में ऐसा करने लगे तो?”
कहां है यह Strait और क्यों है इतना अहम?
Strait of Hormuz के उत्तर में Iran और दक्षिण में Oman का territorial sea है। इसका सबसे narrow point करीब 21 nautical miles का है, जहां दोनों देशों के territorial waters आपस में overlap करते हैं। इस छोटी सी गलियारे से दुनिया की 20% energy supply गुजरती है। एक सामान्य दिन में करीब 135 tankers यहां से निकलते हैं।
IRGC का कब्जा और IMO की आलोचना
26 March को Iran ने Strait of Hormuz में एक de facto IRGC controlled shipping corridor बना दिया, जिसमें सिर्फ “approved vessels” को ही Iranian waters से गुजरने की इजाजत दी जा रही है। IRGC की military facilities Qeshm Island पर हैं, जो इसी strait के भीतर है। International Maritime Organization यानी IMO ने Iran के इस कदम की आलोचना की है, लेकिन स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

International Maritime Organization का regional Traffic Separation Scheme यानी TSS दशकों से इस strait में tanker traffic को manage कर रहा था और Iran पहले इसका सम्मान करता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
Ceasefire के बाद भी राहत नहीं
US और Iran के बीच Wednesday को ceasefire का ऐलान हुआ, लेकिन इसके बावजूद Iran ने सिर्फ अपने 8 cargo vessels को ही strait से गुजरने दिया। यह कदम न सिर्फ discriminatory है, बल्कि global commercial shipping के लिए एक बड़े खतरे का संकेत भी है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर oil, LPG और LNG की कीमतों पर पड़ रहा है। Global market sentiments भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। India जैसे देश, जो इस route पर अपनी energy imports के लिए निर्भर हैं, उन्हें इस गतिरोध से सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एक खतरनाक नजीर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Iran की इस हरकत को unchallenged छोड़ दिया गया, तो यह दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी एक खतरनाक precedent बन सकता है। समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता, जो सदियों से international customary law का हिस्सा रही है, उसे इस तरह की unilateral वसूली से गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
Strait of Hormuz कोई किसी एक देश की संपत्ति नहीं है, यह दुनिया की साझी जीवनरेखा है।
