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मुंबई के रेस्टोरेंट्स में ‘बिना आग’ का खाना: LPG संकट से बदला किचन का पूरा सिस्टम

गैस सिलेंडर की कमी के चलते मुंबई के कई मशहूर रेस्टोरेंट अब इलेक्ट्रिक स्टोव और हॉट प्लेट पर खाना बनाने को मजबूर, समय और मेन्यू दोनों पर पड़ा असर

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मुंबई के रेस्टोरेंट में LPG संकट के कारण गैस की जगह इलेक्ट्रिक कॉइल स्टोव पर खाना बनाते शेफ।

देश की आर्थिक राजधानी Mumbai इन दिनों एक अलग तरह के संकट से जूझ रही है। यह संकट न तो बारिश का है और न ही ट्रैफिक का, बल्कि यह सीधे शहर के किचन से जुड़ा है। दरअसल, हाल ही में LPG सिलेंडर की सप्लाई में आई बाधा ने मुंबई के कई मशहूर रेस्टोरेंट्स की रसोई का पूरा सिस्टम बदल दिया है।

गैस की कमी का असर इतना ज्यादा है कि कुछ जगहों पर खाना अब गैस की तेज आंच पर नहीं बल्कि इलेक्ट्रिक कॉइल और इंडक्शन स्टोव पर पकाया जा रहा है। इससे खाना बनाने में पहले से कहीं ज्यादा समय लग रहा है और कई लोकप्रिय डिशेज को फिलहाल मेन्यू से हटाना पड़ा है।

गैस की जगह इलेक्ट्रिक कॉइल पर बन रहा खाना

दादर ईस्ट में स्थित 66 साल पुराने रेस्टोरेंट Great Punjab की रसोई इन दिनों पूरी तरह बदल चुकी है। यहां के हेड शेफ राम प्रसाद शर्मा, जो लगभग तीन दशक से इस रेस्टोरेंट में काम कर रहे हैं, अब पहली बार गैस की जगह इलेक्ट्रिक कॉइल स्टोव पर खाना बना रहे हैं।

उनका कहना है कि पहले जो चना ग्रेवी 20-25 मिनट में तैयार हो जाती थी, अब उसे बनाने में 40 मिनट से ज्यादा समय लग रहा है। कारण साफ है—इलेक्ट्रिक कॉइल को पहले गर्म होने में समय लगता है, उसके बाद ही खाना पकाना शुरू होता है।

शर्मा बताते हैं कि पहले वे तेज आंच पर जल्दी-जल्दी कई डिश तैयार कर लेते थे, लेकिन अब हर डिश में ज्यादा समय लग रहा है। यही वजह है कि रेस्टोरेंट के किचन का पूरा टाइमटेबल बदल गया है।

अचानक आया संकट और बढ़ा खर्च

रेस्टोरेंट के मालिक ध्रुवीर गांधी के मुताबिक, सरकार की ओर से 5 मार्च को जारी एक सर्कुलर के बाद स्थिति अचानक बदल गई। इसमें कहा गया कि LPG की सप्लाई प्राथमिक रूप से घरेलू इस्तेमाल के लिए होगी। इसके बाद कई रेस्टोरेंट्स को गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया।

स्थिति से निपटने के लिए गांधी को तुरंत कई इलेक्ट्रिक स्टोव खरीदने पड़े। उन्होंने अलग-अलग क्षमता के पांच स्टोव खरीदे, जिनकी कीमत लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक थी। इसके अलावा किचन की वायरिंग और बिजली सिस्टम को भी बदलना पड़ा, जिस पर करीब 25 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च आया।

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क्रॉफर्ड मार्केट में भी बदला किचन

मुंबई के Crawford Market इलाके में स्थित मशहूर Hotel Sadanand की रसोई में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।

यह रेस्टोरेंट खासतौर पर अपने साउथ इंडियन खाने—इडली, डोसा और सांभर—के लिए जाना जाता है। लेकिन गैस की कमी के कारण यहां भी अब इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, इंडक्शन स्टोव और इलेक्ट्रिक इडली स्टीमर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

रेस्टोरेंट के संचालक अभिषेक शेट्टी के अनुसार, पहले उन्हें रोजाना सात गैस सिलेंडर मिलते थे, लेकिन हाल ही में यह संख्या घटकर सिर्फ दो रह गई। ऐसे में उन्हें मजबूरन पूरा किचन इलेक्ट्रिक उपकरणों पर शिफ्ट करना पड़ा।

मेन्यू में भी करना पड़ा बदलाव

गैस की कमी का असर सिर्फ किचन के उपकरणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर रेस्टोरेंट के मेन्यू पर भी पड़ा है।

कई ऐसी डिशेज, जिन्हें बनाने में ज्यादा समय और तेज आंच की जरूरत होती है, फिलहाल मेन्यू से हटा दी गई हैं। उदाहरण के लिए मसाला डोसा तो बन रहा है, लेकिन मैसूर डोसा, रवा डोसा और उत्तपम जैसी डिशेज को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।

शेफ बताते हैं कि पहले एक साथ चार डोसे बन जाते थे, लेकिन अब इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट पर एक या दो ही बन पाते हैं।

बढ़ रही है इलेक्ट्रिक उपकरणों की कीमत

मुंबई के कई रेस्टोरेंट मालिकों के मुताबिक, अचानक बढ़ी मांग के कारण इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।

कुछ सप्लायरों के अनुसार, 3.5 किलोवाट इंडक्शन स्टोव की कीमत कुछ ही घंटों में लगभग 9,500 रुपये से बढ़कर 12,000 रुपये तक पहुंच गई।

इसके अलावा एक और बड़ी समस्या सामने आई है—रेस्टोरेंट्स की बिजली क्षमता। कई जगहों पर नए उपकरण लगाने के बाद सर्किट ब्रेकर बार-बार ट्रिप होने लगे हैं, क्योंकि बिजली का लोड अचानक बढ़ गया है।

पूरे शहर के रेस्टोरेंट प्रभावित

यह समस्या सिर्फ दो रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। मुंबई के छोटे-बड़े कई होटल और खाने-पीने के ठिकाने इस संकट से प्रभावित हुए हैं।

कुछ जगहों पर मेन्यू छोटा कर दिया गया है, कुछ ने इलेक्ट्रिक उपकरण अपना लिए हैं, जबकि कुछ रेस्टोरेंट्स ने फिलहाल अस्थायी रूप से काम बंद कर दिया है।

आगे क्या होगा?

रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही LPG की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। लेकिन तब तक मुंबई के कई किचन में बिना आग के खाना बनाने का दौर जारी रह सकता है।

यह संकट यह भी दिखाता है कि गैस जैसी मूलभूत चीज़ पर निर्भरता कितनी ज्यादा है और अचानक सप्लाई रुकने पर पूरी इंडस्ट्री कैसे प्रभावित हो सकती है।

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