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ईरानी महिला फुटबॉलरों की जान खतरे में Donald Trump बोले: “ऑस्ट्रेलिया इन्हें वापस मत भेजो, वरना अमेरिका देगा शरण”

राष्ट्रगान के दौरान चुप्पी साध लेना इन खिलाड़ियों को महंगा पड़ सकता है — ईरानी सरकारी मीडिया ने इन्हें “देशद्रोही” कहा, अब दुनिया इनकी जान बचाने की कोशिश में जुटी है।

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AFC Women's Asian Cup 2026 में ईरान की महिला फुटबॉल टीम — जिनकी राष्ट्रगान के दौरान खामोशी ने पूरी दुनिया को हिला दिया।

मैदान पर खेल खत्म हो गया था, लेकिन असली जंग अभी शुरू हुई थी।

ऑस्ट्रेलिया के Gold Coast में AFC Women’s Asian Cup 2026 खेला जा रहा था। ईरान की महिला फुटबॉल टीम भी इसमें हिस्सा लेने आई थी। लेकिन टूर्नामेंट के पहले ही मैच में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया — दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच से पहले जब ईरान का राष्ट्रगान बजा, तो इन लड़कियों ने गाने से इनकार कर दिया। बस खड़ी रहीं — खामोश।

यह खामोशी किसी आवाज़ से कम नहीं थी।

“देशद्रोही” का ठप्पा और मौत का डर

ईरानी सरकारी टेलीविज़न पर एक सुरक्षा प्रस्तुतकर्ता मोहम्मद रज़ा शहबाज़ी ने इन खिलाड़ियों को “युद्धकालीन देशद्रोही” करार दिया और कहा कि इनके साथ वैसा ही व्यवहार होना चाहिए। बस इतने से ही इन लड़कियों की ज़िंदगी खतरे में आ गई।

ईरान और उसके आसपास के क्षेत्र में 28 फरवरी से जंग छिड़ी हुई है, जब अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनई की भी मौत हो गई। यानी यह टीम उस वक्त विदेश में थी जब उनका देश जल रहा था।

और भी पढ़ें : ईरान की आक्रामक कार्रवाई पर सऊदी अरब भड़का, खाड़ी देशों की संप्रभुता के उल्लंघन पर कड़ी चेतावनी

टीम फिलीपींस से 2-0 से हार गई और टूर्नामेंट से बाहर हो गई। अब वापसी तय थी — लेकिन वापस जाना मतलब शायद मौत।

जब ट्रम्प मैदान में उतरे

सोमवार सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने Truth Social अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी जो दुनियाभर में वायरल हो गई।

“ऑस्ट्रेलिया एक भयानक मानवीय गलती कर रहा है — ईरान की महिला फुटबॉल टीम को वापस ईरान भेजने से उन्हें मार दिया जाएगा। ऐसा मत करो, प्रधानमंत्री जी — इन्हें शरण दो। अगर आप नहीं देंगे, तो अमेरिका देगा।”

यह वो ट्रम्प थे जिन्होंने दुनिया को चौंका दिया — वही ट्रम्प जो ईरान पर बमबारी कर रहे थे, वही ईरानी महिलाओं की जान बचाने के लिए आगे आए।

5 खिलाड़ियों ने होटल छोड़ा — पुलिस की सुरक्षा में

The Athletic की रिपोर्ट के अनुसार, पाँच टीम सदस्यों ने टीम से अलग होकर ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस की सुरक्षा में एक सेफ हाउस में शरण ली।

बाद में ट्रम्प ने एक और पोस्ट लिखी जिसमें उनका लहजा नरम था — “He’s on it!” यानी ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री Anthony Albanese इस मामले पर काम कर रहे हैं।

ट्रम्प ने बताया कि पाँच खिलाड़ियों का इंतज़ाम हो चुका है, और कुछ अपनी मर्ज़ी से वापस जाना चाहती हैं — क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वो नहीं लौटीं, तो ईरान में उनके परिवारों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

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यह वो दर्द है जो सिर्फ वही समझ सकते हैं जिनके अपने किसी तानाशाही हुकूमत के हाथों में बंधक हों।

राष्ट्रगान — विरोध या मजबूरी?

दूसरे मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इन्हीं खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान गाया और सलामी भी दी — जिसे देखकर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को शक हुआ कि शायद उन पर दबाव डाला गया।

मैदान के बाहर ईरानी समर्थकों ने 1979 से पहले का ईरानी झंडा लहराया, राष्ट्रगान का विरोध किया और टीम की बस को रोकने की कोशिश की — “Save our girls!” के नारे लगाए।

दुनिया ने उठाई आवाज़

Australian Iranian Council ने एक ऑनलाइन पिटीशन शुरू की जिस पर 74,000 से ज़्यादा लोगों ने दस्तखत किए — मांग थी कि किसी भी खिलाड़ी को तब तक ऑस्ट्रेलिया से न जाने दिया जाए जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित न हो।

हैरी पॉटर की लेखिका J.K. Rowling से लेकर ईरानी शाही परिवार के वारिस Reza Pahlavi तक — सबने इन लड़कियों के लिए आवाज़ उठाई।

ऑस्ट्रेलिया की सतर्क चुप्पी

ऑस्ट्रेलिया के सहायक विदेश मंत्री Matt Thistlethwaite से जब पूछा गया कि क्या इन खिलाड़ियों को शरण दी जाएगी, तो उन्होंने कहा कि वो “निजता के कारणों से” व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते।

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया ईरानी महिला टीम के साथ एकजुटता में खड़ा है और इस शासन ने ईरानी महिलाओं पर बेरहमी से अत्याचार किए हैं।

एक मैच से बड़ी लड़ाई

यह सिर्फ फुटबॉल की कहानी नहीं है। यह उन लड़कियों की कहानी है जो एक मैदान पर गईं — खेलने के लिए — और लौटकर आई तो उन्हें अपने ही देश में दुश्मन बना दिया गया। उनका जुर्म? बस कुछ सेकंड की खामोशी।

दुनिया देख रही है। सवाल यह नहीं कि ट्रम्प ने क्या कहा या ऑस्ट्रेलिया क्या करेगा — सवाल यह है कि क्या इन लड़कियों को इंसाफ मिलेगा?