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Border 2 Review: Sunny Deol की दहाड़ और देशभक्ति का ज़ोरदार पैकेज, लंबाई के बावजूद असरदार
Sunny Deol और Diljit Dosanjh की दमदार मौजूदगी से सजी Border 2, युद्ध और जज़्बात का भावुक मेल
आज के दौर में जब सिनेमा CGI और ग्रीन स्क्रीन पर टिका है, तब nostalgia ही एक ऐसा इमोशन है जिसे खरीदा नहीं जा सकता। Border 2 इसी भावना को पूरी ताकत से छूती है। यह फिल्म सिर्फ एक सीक्वल नहीं, बल्कि उस दौर की याद दिलाती है जब देशभक्ति बिना झिझक, बिना irony और बिना फिल्टर के दिखाई जाती थी।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है Sunny Deol की वापसी। जैसे ही वह स्क्रीन पर आते हैं, हॉल में वही पुरानी ऊर्जा लौट आती है। Sandese Aate Hain की धुन और उनका रौबदार अंदाज़ दर्शकों को सीधे 90s में ले जाता है। लेकिन Border 2 सिर्फ nostalgia पर नहीं टिकी, इसमें कहानी, किरदार और भावनात्मक गहराई भी मौजूद है।
कहानी क्या है
Border 2 की कहानी 1971 के Indo-Pak युद्ध की पृष्ठभूमि में ही रहती है, लेकिन इस बार इसे तीन अलग-अलग सेनाओं के नज़रिए से दिखाया गया है। Varun Dhawan भारतीय सेना के Major Hoshiar Singh Dahiya के रोल में हैं, Diljit Dosanjh भारतीय वायुसेना के Fg Offr Nirmal Jit Singh के रूप में नजर आते हैं, जबकि Ahan Shetty भारतीय नौसेना के Lt Cdr MS Rawat बने हैं। इन तीनों के ऊपर वरिष्ठ अधिकारी Lt Col Fateh Singh Kaler के रूप में Sunny Deol हैं।
फिल्म का पहला हिस्सा सैनिकों की ट्रेनिंग, उनका परिवार और उनकी निजी ज़िंदगी दिखाने में खर्च होता है, जो दर्शकों को किरदारों से जोड़ता है। दूसरा हिस्सा पूरी तरह युद्ध पर केंद्रित है।
युद्ध दृश्य और निर्देशन
दूसरे हाफ में फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है। युद्ध के दृश्य बड़े पैमाने पर दिखाए गए हैं, लेकिन कई जगह वे दोहराव का एहसास देते हैं। हालांकि क्लाइमैक्स फिल्म को संभाल लेता है और अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है। धैर्य रखने वालों को आख़िर में भावनात्मक संतुष्टि मिलती है।
अभिनय कैसा है
Sunny Deol पूरी फिल्म की रीढ़ हैं। एक अनुभवी सैनिक और पारिवारिक व्यक्ति—दोनों रूपों में वे प्रभावी लगते हैं। Varun Dhawan ने भी उम्मीद से बेहतर काम किया है। उनका Haryanvi लहजा कभी-कभी डगमगाता है, लेकिन ईमानदारी साफ झलकती है। Medha Rana के साथ उनकी केमिस्ट्री फिल्म को भावनात्मक मजबूती देती है।
Diljit Dosanjh अपने रोल में बेहद सहज दिखते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस और आत्मविश्वास फिल्म को हल्का लेकिन प्रभावी बनाता है। Sonam Bajwa के साथ उनकी जोड़ी अच्छी लगती है। Ahan Shetty की कहानी सबसे कमजोर जरूर है, लेकिन वे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहते हैं। Mona Singh का अभिनय खास तौर पर सराहनीय है।
संगीत और बैकग्राउंड स्कोर
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर John Stewart Eduri का है, जो युद्ध और भावनाओं दोनों को उभारता है। संगीत में Anu Malik, Mithoon, Vishal Mishra, Sachet Parampara और Gurmoh का योगदान फिल्म को और प्रभावशाली बनाता है।
अंतिम फैसला
Border 2 अपनी कमियों के बावजूद दिल से बनी फिल्म है। यह उस दौर की याद दिलाती है जब देशभक्ति को खुलकर महसूस किया जाता था। लंबी होने के बावजूद फिल्म कई जगह आपको खड़ा होकर सलाम करने का मन करवा देती है। यह फिल्म थिएटर में, अंधेरे हॉल में, तालियों और भावनाओं के बीच देखे जाने के लिए बनी है।
