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3 दिन में सरेंडर नहीं किया तो अंजाम बुरा होगा ईरान ने प्रदर्शनकारियों को दिया अल्टीमेटम
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार सख्त, चेतावनी के बाद और तेज हो सकता है टकराव
मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। Iran में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने प्रदर्शनकारियों को कड़ा संदेश दिया है। सरकारी बयान में साफ कहा गया है कि अगर प्रदर्शनकारी तीन दिनों के भीतर सरेंडर नहीं करते, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में ईरान के कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सड़कों पर उतर रहे लोगों की मांगें अलग-अलग हैं, लेकिन गुस्सा प्रशासन की नीतियों को लेकर साफ दिखाई दे रहा है। इसी बीच सरकार की यह चेतावनी हालात को और गंभीर बना सकती है।
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अल्टीमेटम से क्यों बढ़ा तनाव
ईरानी प्रशासन का कहना है कि देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। इसी आधार पर सरकार ने यह अल्टीमेटम जारी किया है।
वहीं दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी आवाज़ दबाने के लिए डर का माहौल बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में कई जगहों पर सुरक्षाबलों की भारी तैनाती देखी जा सकती है।

आम लोगों की बढ़ती चिंता
ईरान में रहने वाले आम नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। बाजार, स्कूल और दफ्तरों पर इसका असर पड़ने लगा है। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर भी रोक की खबरें सामने आई हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एक स्थानीय नागरिक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “लोग डर और गुस्से के बीच फंसे हुए हैं। कोई नहीं जानता कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे।”
अंतरराष्ट्रीय नजरें भी टिकीं
ईरान की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर बनी हुई है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से संयम बरतने की अपील की है, जबकि कुछ देशों ने हालात पर चिंता जताई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले 72 घंटे बेहद अहम होंगे। अगर बातचीत का रास्ता नहीं निकला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
आगे क्या
फिलहाल, ईरान में तनाव चरम पर है। सरकार के अल्टीमेटम के बाद प्रदर्शनकारी क्या रुख अपनाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। इतना तय है कि यह मामला सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
