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हर गेंद पर छक्का मत मारना KL Rahul ने Harshit Rana को दी ऐसी सलाह कि मैच भारत की झोली में आ गया
न्यूजीलैंड के खिलाफ मुश्किल होते रनचेज में KL Rahul ने संभाली कमान, Harshit Rana के जोश को समझदारी में बदला
न्यूजीलैंड के खिलाफ 301 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम जब जीत के करीब पहुंचकर थोड़ी उलझन में फंसती दिखी, तब मैदान पर अनुभव और संयम की असली परीक्षा शुरू हुई। इस नाज़ुक मौके पर सीनियर बल्लेबाज़ KL Rahul ने न सिर्फ रन बनाए, बल्कि युवा ऑलराउंडर Harshit Rana को भी मैच के दबाव से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई।
पांचवां विकेट गिरने के बाद जब हरषित राणा क्रीज़ पर आए, तब भारत को अभी करीब 50 रन चाहिए थे। रन बहुत ज़्यादा नहीं थे, लेकिन विकेट गिरने से माहौल थोड़ा टाइट हो चुका था। ऐसे समय में हरषित का नैचुरल अंदाज़—हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का—मैच को कहीं भी ले जा सकता था। यही वजह थी कि ड्रेसिंग रूम में मौजूद सीनियर खिलाड़ियों की नज़रें इस साझेदारी पर टिकी थीं।
मैच के बाद JioHotstar से बातचीत में KL Rahul ने मुस्कुराते हुए उस लम्हे को याद किया। राहुल ने कहा,
“हरषित के साथ आखिरी ओवरों में बल्लेबाज़ी करना मज़ेदार था। वो खुद मुझसे कह रहा था कि मुझे बार-बार याद दिलाते रहना कि हर गेंद पर छक्का नहीं मारना है। यही उसका माइंडसेट था। मुझे उसे थोड़ा शांत करना पड़ा।”
राहुल ने माना कि वनडे क्रिकेट में हरषित अभी नए हैं और ज्यादा मैच नहीं खेले हैं। ऐसे में बड़े मंच पर खुद को साबित करने की बेचैनी स्वाभाविक है। लेकिन अनुभव यही कहता है कि हर मैच ताकत से नहीं, समझदारी से जीता जाता है।
ड्रेसिंग रूम को क्यों है हरषित पर भरोसा
KL Rahul ने आगे बताया कि टीम मैनेजमेंट और खिलाड़ी हरषित राणा की काबिलियत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। उन्होंने कहा,
“हमने ऑस्ट्रेलिया में उसे बल्लेबाज़ी करते देखा है। उसने वहां अहम पारियां खेली हैं। ड्रेसिंग रूम को उसका पोटेंशियल पता है और हम चाहते हैं कि वह खुद को एक शानदार ऑलराउंडर के रूप में विकसित करे—वैसा खिलाड़ी जिसे हर टीम अपने स्क्वॉड में चाहती है।”
हरषित राणा की पहचान सिर्फ बल्लेबाज़ी तक सीमित नहीं है। लंबा कद, करीब 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार, अलग-अलग वैरिएशन और साथ में उपयोगी बल्लेबाज़ी—यही वजह है कि टीम इंडिया उन्हें एक पैकेज खिलाड़ी के तौर पर देख रही है।

ओवरकॉन्फिडेंस या आत्मविश्वास
राहुल ने यह भी स्वीकार किया कि हरषित कभी-कभी जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास दिखाते हैं। लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बताया।
“वो थोड़ा ओवरकॉन्फिडेंट हो सकता है, लेकिन मैं अंडरकॉन्फिडेंस से बेहतर ओवरकॉन्फिडेंस को चुनूंगा। उसका एटीट्यूड शानदार है,” राहुल ने कहा।
कैसे जीता गया मैच
राहुल ने बताया कि एक-दो बाउंड्री लगते ही हरषित का आत्मविश्वास सही दिशा में आ गया।
“मैंने उसे कहा कि हम बहुत ज्यादा रन नहीं चेज़ कर रहे हैं। प्लान था—हर ओवर में एक बाउंड्री, एक सोचा-समझा रिस्क और फिर स्ट्राइक मुझे वापस देना,” राहुल ने बताया।
यही साधारण लेकिन सटीक रणनीति भारत को जीत की दहलीज़ तक ले गई। अंत में भारत ने चार विकेट से मुकाबला अपने नाम किया और यह साबित कर दिया कि बड़े मैच सिर्फ ताकत से नहीं, सोच और संवाद से भी जीते जाते हैं।
KL Rahul की यह पारी और मैदान पर दिखाई गई लीडरशिप, भारतीय टीम के लिए आने वाले मुकाबलों में भी एक मजबूत संकेत है—जहां युवा जोश को सही दिशा देने के लिए अनुभव हमेशा साथ खड़ा रहेगा।
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