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PIA की प्राइवेटाइजेशन की ऐतिहासिक डील क्या पाकिस्तान को मिलेगा अपना Air India मोमेंट

करीब 13,500 करोड़ रुपये की डील में 75% हिस्सेदारी बिकने के बाद भी सवाल कायम – क्या निजी हाथों में जाकर बदल पाएगी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की किस्मत

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PIA Privatization: क्या पाकिस्तान को मिलेगा अपना Air India Moment?
पुराने विमान बेड़े और कर्ज के बोझ से जूझती पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस अब निजी हाथों में जाने की दहलीज पर खड़ी है।

पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) एक बार फिर सुर्खियों में है। दशकों से घाटे, कर्ज और बदइंतजामी से जूझ रही इस राष्ट्रीय विमानन कंपनी को आखिरकार निजी हाथों में सौंपने का फैसला हो गया है। मंगलवार को हुए सौदे में Arif Habib Consortium (AHC) ने PIA की 75 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए करीब 480 मिलियन डॉलर (13,500 करोड़ पाकिस्तानी रुपये) की बोली जीत ली। इसके बाद पाकिस्तान सेना से जुड़ी कंपनी Fauji Fertilisers (FFC) के इस कंसोर्टियम में शामिल होने की घोषणा ने इस डील को और भी बड़ा बना दिया।

सरकार इसे एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, लेकिन विशेषज्ञ पूछ रहे हैं—क्या यह सच में पाकिस्तान का Air India मोमेंट साबित होगा या फिर PIA की समस्याएं इतनी गहरी हैं कि निजीकरण भी पर्याप्त नहीं होगा?

PIA की परेशानी Air India से कितनी अलग?

भारत की Air India को जब Tata Group ने अपने हाथों में लिया, तब एयरलाइन पर कर्ज था, लेकिन ब्रांड वैल्यू, नेटवर्क और फ्लीट की संभावनाएं मजबूत थीं। PIA की स्थिति इससे अलग है।
आज PIA के पास

  • भारी कर्ज का बोझ
  • बूढ़ा और लगातार सिकुड़ता विमान बेड़ा
  • जरूरत से कहीं ज्यादा स्टाफ
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब साख

जैसी समस्याएं हैं। कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर PIA की उड़ानें पहले ही बंद हो चुकी हैं, जिससे रेवेन्यू के बड़े स्रोत सूख गए हैं।

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नई मैनेजमेंट के सामने असली चुनौती

Arif Habib Consortium और Fauji Fertilisers के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ घाटा कम करना नहीं, बल्कि एयरलाइन को दोबारा भरोसेमंद बनाना है। एविएशन इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर फ्लीट आधुनिकीकरण, स्टाफ रेशनलाइजेशन और इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर फोकस नहीं किया गया, तो यह डील भी कागजों तक सीमित रह सकती है।

क्या सेना से जुड़ी कंपनी का दखल मदद करेगा?

FFC का शामिल होना पाकिस्तान में अलग मायने रखता है। समर्थकों का कहना है कि इससे फाइनेंशियल डिसिप्लिन और पॉलिसी सपोर्ट मिलेगा। वहीं आलोचकों को डर है कि कहीं यह निजीकरण सिर्फ नाम का न रह जाए और सरकारी हस्तक्षेप जारी रहे।

आम यात्रियों की उम्मीदें

पाकिस्तान के आम यात्रियों के लिए यह फैसला उम्मीद और शंका दोनों लेकर आया है। बेहतर सर्विस, समय पर उड़ानें और प्रतिस्पर्धी किराया—ये सब वादे पहले भी किए गए, लेकिन पूरे नहीं हुए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नई मैनेजमेंट PIA को सिर्फ बचाएगी या सच में उसे उड़ान भरने लायक बनाएगी।

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