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“आज लोग Ranbir Kapoor को जानते हैं, राज कपूर को नहीं” — Shah Rukh Khan वाले बयान पर विवेक ओबेरॉय की सफाई
2050 में SRK की प्रासंगिकता वाले बयान पर मचा था बवाल, अब विवेक ओबेरॉय ने संदर्भ समझाते हुए कहा— शोहरत अस्थायी है, अच्छे कर्म स्थायी
बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय हाल ही में अपने एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए थे। उन्होंने यह कहकर बहस छेड़ दी थी कि साल 2050 में लोग शायद पूछें— “शाह रुख खान कौन हैं?”। इस बयान के वायरल होते ही शाह रुख खान के प्रशंसकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
अब इस पूरे विवाद पर विवेक ओबेरॉय ने खुलकर सफाई दी है और बताया है कि उनके बयान का अर्थ गलत तरीके से पेश किया गया। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने साफ कहा कि वह न सिर्फ शाह रुख खान के बड़े फैन हैं, बल्कि दशकों से उनके साथ उनका व्यक्तिगत रिश्ता भी रहा है।
“कंटेंट पहुंचा, लेकिन कॉन्टेक्स्ट गायब था”
मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. विवेक बिंद्रा और फाइनेंस इंफ्लुएंसर शरण हेगड़े के साथ एक पॉडकास्ट में विवेक ओबेरॉय ने कहा कि उनके बयान को जिस तरह फैलाया गया, उसमें संदर्भ पूरी तरह गायब था।
उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि जिसने भी इस बयान को फैलाया, उसे “वॉल्यूम के लिए 100 नंबर” मिलते हैं, लेकिन “कॉन्टेक्स्ट के लिए माइनस 100”। विवेक ने एक कहानी के ज़रिये समझाया कि कैसे संदेश वही रहता है, लेकिन अर्थ बदल दिया जाता है।
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शाह रुख खान के लिए जताया सम्मान
विवेक ओबेरॉय ने स्पष्ट किया कि वह शाह रुख खान को सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी बेहद मानते हैं। उन्होंने कहा कि SRK ने उनके कठिन समय में उनका साथ दिया, उन्हें आशीर्वाद और समर्थन दिया।
विवेक ने यह भी बताया कि वह आज भी आर्यन खान की सफलता पर उतना ही खुश होते हैं, जितना शाह रुख खान उनके काम पर। यह रिश्ता सिर्फ इंडस्ट्री तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और स्नेह पर आधारित है।
राज कपूर और रणबीर कपूर का उदाहरण
अपने बयान का संदर्भ समझाते हुए विवेक ओबेरॉय ने हिंदी सिनेमा के दिग्गज राज कपूर और आज के स्टार रणबीर कपूर का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि एक दौर था जब दिलीप कुमार और राज कपूर को सिनेमा का भगवान माना जाता था, लेकिन आज की युवा पीढ़ी उन्हें उतनी गहराई से नहीं जानती। आज के दर्शक रणबीर कपूर को जानते हैं, लेकिन राज कपूर का संदर्भ धीरे-धीरे धुंधला हो रहा है।
शोहरत नहीं, अच्छे कर्म रहते हैं ज़िंदा
विवेक ओबेरॉय ने कहा कि सुपरस्टारडम, पैसा और लोकप्रियता समय के साथ बदलती रहती है। उन्होंने जेफ बेज़ोस और एलन मस्क का उदाहरण देते हुए कहा कि आज कोई सबसे अमीर है, तो कल कोई और हो सकता है।
लेकिन अच्छे कर्म और समाज के लिए किया गया काम पीढ़ियों तक याद रखा जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने उद्योगपति जमशेदजी टाटा का नाम लिया, जिनका योगदान आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
विवेक के मुताबिक, शाह रुख खान हमारी पीढ़ी के लिए हमेशा एक लीजेंड रहेंगे। आने वाले समय में लोग उन्हें सुपरस्टार के रूप में याद रखें या नहीं, यह कहना मुश्किल है, लेकिन उनके अच्छे काम और इंसानियत ज़रूर याद रखी जाएगी।
