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US की Pax Silica पहल से बाहर भारत: क्या रणनीतिक चूक बन रही है इंडिया-US दूरी?
क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर बने अमेरिकी गठबंधन में भारत की गैरमौजूदगी पर सवाल
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर बड़े दावे होते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई Pax Silica नाम की अहम वैश्विक पहल से भारत को बाहर रखा गया है, जिसने दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक कूटनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है Pax Silica पहल?
अमेरिकी सरकार के मुताबिक, Pax Silica एक US-लीड रणनीतिक गठबंधन है, जिसका उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा संसाधनों, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित और स्थिर बनाना है। यह पहल खास तौर पर चीन पर निर्भरता कम करने और भरोसेमंद देशों के साथ टेक्नोलॉजी नेटवर्क मजबूत करने पर केंद्रित है।
भारत क्यों है बाहर?
सबसे अहम सवाल यही है कि जब भारत खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर हब के रूप में पेश कर रहा है, तो उसे इस गठबंधन में जगह क्यों नहीं मिली। जानकारों का मानना है कि India-US trade deal का अब तक अंतिम रूप न ले पाना इसकी एक बड़ी वजह हो सकता है। कई दौर की बातचीत और उच्च स्तरीय बैठकों के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अब भी अधर में लटका है।

QUAD देशों में भारत की गैरमौजूदगी चौंकाती है
दिलचस्प बात यह है कि QUAD के अन्य सदस्य—जैसे जापान और ऑस्ट्रेलिया—इस पहल का हिस्सा हैं, जबकि भारत को बाहर रखा गया है। यह स्थिति भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी के दावों के उलट नजर आती है।
रणनीतिक संकेत या अस्थायी दूरी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक संकेत भी हो सकता है। अमेरिका उन देशों को प्राथमिकता दे रहा है, जिनके साथ उसके व्यापार और सप्लाई-चेन समझौते पहले से मजबूत हैं। भारत के मामले में नीतिगत स्पष्टता और तेज फैसलों की कमी एक बाधा बन सकती है।
भारत के लिए क्या दांव पर है?
क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर आने वाले दशक की वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जा रहे हैं। ऐसे में Pax Silica से बाहर रहना भारत के लिए मौका चूकने जैसा माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि भारत के पास अब भी अपने वैकल्पिक गठबंधन और द्विपक्षीय समझौते मजबूत करने का मौका है।
आगे की राह
फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि क्या यह दूरी अस्थायी है या फिर भारत-US संबंधों में किसी बड़े बदलाव का संकेत।
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