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Kis Kis Ko Pyaar Karoon 2 Review: Kapil Sharma की कॉमेडी हंसाती भी है और थकाती भी
पुराने फॉर्मूले पर टिकी Kapil Sharma की यह फिल्म कुछ हिस्सों में मज़ेदार है, लेकिन खिंचाव इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है
बॉलीवुड में सीक्वल बनाने का एक अलिखित नियम है—अगर पहला पार्ट चल गया, तो दूसरे में ज्यादा प्रयोग मत करो। Kis Kis Ko Pyaar Karoon 2 इसी नियम को पूरी ईमानदारी से फॉलो करती है। Kapil Sharma की यह नई फिल्म अपने पहले हिस्से के कॉन्सेप्ट को लगभग जस का तस दोहराती है, फर्क बस इतना है कि इस बार कहानी में धर्म और शादी का एंगल और ज्यादा उलझाया गया है।
कहानी क्या है?
फिल्म की कहानी फिर से भोपाल के रहने वाले Mohan Sharma (Kapil Sharma) के इर्द-गिर्द घूमती है। मोहन अपनी गर्लफ्रेंड Sanya (Hira Warina) से शादी करना चाहता है, लेकिन अलग-अलग धर्म होने की वजह से परिवार इस रिश्ते के खिलाफ है। शादी के लिए मोहन धर्म परिवर्तन तक को तैयार हो जाता है, लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि वह एक नहीं, दो नहीं बल्कि चार शादियां कर बैठता है।

पहले वह Ruhi (Ayesha Khan) से शादी करता है, फिर परिवार के दबाव में Meera (Tridha Choudhary) से, और जब वह Sanya से शादी की कोशिश करता है तो हनीमून पर Jenny (Parul Gulati) से भी शादी हो जाती है। इसी बीच पुलिस उसके पीछे पड़ी होती है, क्योंकि वह खुद अपने कई शादियों के राज़ का खुलासा कर देता है।
पहली फिल्म की तरह ही यहां भी गलतफहमियां, भागदौड़ और पहचान छुपाने की कॉमेडी भरी हुई है, बस इस बार मज़ाक का दायरा थोड़ा और बड़ा कर दिया गया है।
क्या काम करता है?
फिल्म की शुरुआत हल्की-फुल्की और फ्रेश लगती है। शुरुआती हिस्सों में कुछ सीन वाकई हंसा देते हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म सस्ते डबल मीनिंग या बॉडी शेमिंग जैसे हथकंडों से बचती है। Kapil Sharma का नैचुरल कॉमिक टाइमिंग यहां सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है।
Manjot Singh, जो मोहन के दोस्त Hubby बने हैं, Kapil के साथ अच्छी केमिस्ट्री बनाते हैं। दोनों की नोकझोंक और टाइमिंग फिल्म को संभालती है। दिवंगत अभिनेता Asrani की मौजूदगी फिल्म को एक नॉस्टैल्जिक टच देती है—80 की उम्र पार करने के बावजूद वह स्क्रीन पर असर छोड़ते हैं।
सपोर्टिंग रोल्स में Akhilendra Mishra और Vipin Sharma भी कहानी को मजबूती देते हैं। वहीं Tridha Choudhary, Ayesha Khan और Parul Gulati अपने-अपने किरदारों में फिट बैठती हैं।
कहां चूक जाती है फिल्म?
इंटरवल के बाद फिल्म की रफ्तार ढीली पड़ने लगती है। जो जोक्स पहले ताज़ा लगते हैं, वही बाद में दोहराव का शिकार हो जाते हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि निर्देशक Anukalp Goswami को शायद यह तय करने में परेशानी होती है कि फिल्म को खत्म कहां करना है।

क्लाइमेक्स के बाद कहानी को बेवजह खींचा गया है। एक क्यूट कैमियो जोड़ने की कोशिश भले नेक हो, लेकिन तब तक दर्शकों का धैर्य जवाब देने लगता है।
म्यूज़िक भी फिल्म का कमजोर पक्ष है। कम से कम तीन गाने ऐसे हैं, जो कहानी को आगे नहीं बढ़ाते और सिर्फ रनटाइम बढ़ाते हैं।
Verdict
Kis Kis Ko Pyaar Karoon 2 अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करती। इसमें हंसाने वाले पल हैं, कलाकारों की मेहनत दिखती है, लेकिन गैरज़रूरी खिंचाव इसे पूरी तरह उड़ान नहीं भरने देता।
अगर आप फैमिली के साथ हल्की-फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है—बस बहुत ज़्यादा उम्मीदें न रखें।
रेटिंग: ★★½
