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पुदुच्चेरी क्रिकेट का ‘गुप्त बाज़ार’… फर्जी पते, नकली आईडी और पैकेज! BCCI की नाक के नीचे कैसे चल रहा है बड़ा खेल?
Dainik Diary की रिपोर्ट: करोड़ों की क्रिकेट दुनिया में ‘लोकल प्लेयर’ बनने के लिए कैसे बिक रही है पहचान, कैसे टूट रहा है युवा प्रतिभाओं का भरोसा।
भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, एक सपना है—और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) उस सपने का सबसे बड़ा संरक्षक माना जाता है। लेकिन पुदुच्चेरी से सामने आई जांच ने इस भरोसे में गहरी दरार डाल दी है।
यह कहानी सिर्फ फर्जी दस्तावेज़ों या कुछ खिलाड़ियों की नहीं है—यह उस सिस्टम की है जिसने मेहनत, प्रतिभा और निष्पक्षता के भरोसे को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
‘लोकल प्लेयर’ बनने का शॉर्ट-कट: बस पैसा दो और पत्ता बदल लो
जांच में सामने आया कि कई निजी क्रिकेट कोच और अकादमियां खिलाड़ियों को पुदुच्चेरी में ‘लोकल’ दिखाने का पूरा पैकेज ऑफर करती हैं।
इस पैकेज में शामिल है—
- फर्जी Aadhaar पता
- बैकडेटेड कॉलेज एडमिशन
- फर्जी जॉब रिकॉर्ड
- एक साल के ‘रेज़िडेंसी’ नियम को कागजों पर पूरा करने की व्यवस्था
कहने को यह सब CAP यानी Cricket Association of Pondicherry की निगरानी में होता है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे उलट है।
उदाहरण: एक ही घर, 17 खिलाड़ी!
मुथिलाल नगर, मूलकलम की एक दो-मंज़िला इमारत पुदुच्चेरी की क्रिकेट कहानी का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई है।
17 खिलाड़ी—8 राज्यों से—अपने आधार कार्ड पर एक ही पते का इस्तेमाल करते मिले।
घर की मालकिन ने स्पष्ट कहा: “हमने तो सिर्फ 4 लड़कों को किराये पर रखा था… बाकी 11 कौन हैं, हमें नहीं पता!”
यह कोई एक मामला नहीं। कई अन्य पते भी इसी तरह खिलाड़ियों के ‘अस्थायी ठिकाने’ बन चुके हैं।
क्यों बिक रही है ‘लोकल’ पहचान? जवाब: करोड़ों की कमाई!
पुदुच्चेरी टीम में खेलते ही मिलते हैं:
- 11.2 लाख तक सिर्फ मैच फीस
- Syed Mushtaq Ali Trophy और Vijay Hazare Trophy से IPL में जाने का रास्ता
- सरकारी और निजी सेक्टर में स्पोर्ट्स कोटा वाली नौकरियां
और यही कारण है कि खिलाड़ी, एजेंट और निजी कोच इस “शॉर्टकट मार्केट” का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
पिछले पाँच साल में सिर्फ पाँच पुदुच्चेरी जन्मे खिलाड़ी रणजी में टीम का हिस्सा बने हैं। बाकी लगभग सभी “लोकल” बनाए गए बाहरी खिलाड़ी थे।

U-19 और Ranji टीमों में स्थानीय खिलाड़ियों की जगह क्यों खाली?
इस सीज़न के U-19 Vinoo Mankad Trophy में
11 में से 9 खिलाड़ी बाहर के राज्यों से थे—लेकिन कागजों पर ‘लोकल’।
Ranji Trophy 2025-26 में एक भी स्थानीय खिलाड़ी शुरुआती मैचों में शामिल नहीं था।
स्थानीय खिलाड़ियों का दर्द
पांच स्थानीय खिलाड़ियों को तब बैन कर दिया गया जब उन्होंने PPL में बाहरी खिलाड़ियों के बढ़ते दखल का विरोध किया।
‘कोच से डील करके अगले दिन मैदान में उतर जाओ’ – पूर्व खिलाड़ी की बड़ी बात
पूर्व तेज़ गेंदबाज़ संतमोorthy ने खुलकर आरोप लगाया:
“उत्तर भारत से कई खिलाड़ी आते हैं, पैसे देते हैं और अगले दिन खेल जाते हैं… न कोई रेज़िडेंसी, न कोई नियम।”
संतमोorthy वह खिलाड़ी हैं जिन्होंने 41 साल की उम्र में पहली ही मैच में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट का दुनिया का सबसे उम्रदार 5 विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया था।
उनके अनुसार, कुछ निजी कोच खिलाड़ी लाते हैं, पैसा लेते हैं और दस्तावेज़ “मैनेज” कर देते हैं।
निजी अकादमियां—सबसे बड़ा ‘गेटवे’
जगथ अकादमी जैसे निजी कोचिंग सेंटर्स पर आरोप लगा है कि वे खिलाड़ियों को CAP टीमों में फ़ास्ट-ट्रैक एंट्री दिलवा रहे हैं।
हालाँकि इस आरोप से कई कोचेस इंकार करते हैं, लेकिन तथ्य इससे उलट कहानी बताते हैं।
पढ़ाई का खेल: बंद ITI कॉलेज, हवा में चल रही क्लासें
जांच में कई खिलाड़ियों के दस्तावेज़ Sri Vivekananda ITI से जुड़े मिले।
जब रिपोर्टर वहाँ पहुँचे, तो मिला:
- टूटी, जंग लगी टिन की छत
- बंद पड़ा परिसर
- कॉलेज 2021 में ही शिफ्ट हो चुका था
फिर भी खिलाड़ियों का रिकॉर्ड इसी कॉलेज से “चालू पढ़ाई” दिखा रहा था।
BCCI नियम… और कैसे तोड़े जा रहे हैं
नियम कहता है:
- एक वर्ष की वैध रेज़िडेंसी
- एक वर्ष का शिक्षा रिकॉर्ड या नौकरी
- पूरा दस्तावेज़ी सबूत
लेकिन पुदुच्चेरी में यह पूरा सिस्टम कागजों पर पूरा कर लिया जाता है—जमीन पर नहीं।
समाधान क्या?
पूर्व खिलाड़ियों का सुझाव है कि विदर्भ क्रिकेट मॉडल अपनाया जाए—
जहाँ लोकल खिलाड़ी के लिए 3 साल की शिक्षा या क्लब रिकॉर्ड अनिवार्य है।
इससे बाहरी खिलाड़ियों की ‘जंप’ पर रोक लगेगी और स्थानीय प्रतिभाएं उभर सकेंगी।
नतीजा: क्रिकेट की साख दांव पर
भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं—एक भावना, सम्मान और अवसर है।
लेकिन पुदुच्चेरी में चल रहा यह ‘पैकेज सिस्टम’ युवा खिलाड़ियों के दिल तोड़ रहा है, और उन परिवारों का भरोसा भी, जो अपने बच्चों को क्रिकेट में नाम दिलाने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देते हैं।
BCCI के लिए यह सिर्फ एक जांच का विषय नहीं—यह भविष्य की प्रतिभाओं को बचाने का मुद्दा है।
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