Economy
EMI में भारी राहत क्यों? RBI ने रेपो रेट घटाया 25 बेसिस प्वाइंट… जानें आपके लोन पर कितना असर पड़ेगा
RBI के बड़े फैसले से होम लोन, कार लोन और एजुकेशन लोन की EMI में आएगी सीधी कटौती—बैंक जल्द घटा सकते हैं ब्याज दरें, आम जनता को बड़ी राहत।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आज एक बड़ा आर्थिक फैसला लेकर आम जनता की जेब में राहत डाल दी है। लगातार कई महीनों की महंगाई और वैश्विक बाज़ार में अस्थिरता के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी गई है। यह निर्णय सिर्फ आंकड़ों में बदलाव नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की EMI में तात्कालिक राहत लेकर आएगा।
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि “बीते कुछ महीनों में घरेलू मांग बढ़ी है, लेकिन महंगाई का दबाव भी उतना ही बना हुआ था। ऐसे में हम आर्थिक वृद्धि और जनता की वित्तीय क्षमता—दोनों को संतुलित करने की दिशा में यह कदम उठा रहे हैं।”
अब कितना हुआ नया रेपो रेट?
नई घोषणा के बाद रेपो रेट अब 5.50% से कम होकर 5.25% पर आ गया है। बैंकिंग सिस्टम में यह बदलाव लागू होते ही होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कमी दिखाई देगी। कई बड़े बैंक जैसे SBI, HDFC Bank और ICICI Bank ब्याज दरों में संशोधन की तैयारी में हैं।
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कैसे घटेगी आपकी EMI?
यदि आपका ₹30 लाख का होम लोन 20 साल की अवधि के लिए चल रहा है, तो ब्याज दर में 0.25% की कमी से आपकी EMI करीब 450–600 तक कम हो सकती है। बड़े लोन वालों को यह राहत और ज्यादा महसूस होगी।
उदाहरण के लिए:
- कार लोन में महीना 150–250 की राहत
- पर्सनल लोन में 200–300 की राहत
- एजुकेशन लोन में लंबी अवधि होने के कारण EMI में अच्छी कमी
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
RBI का कहना है कि बीते कुछ महीनों में तेल की कीमतें, ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और अनाज की कीमतों ने महंगाई को बढ़ाया है। ऐसे में आर्थिक विकास को सुचारू रखने के लिए रेपो रेट में कमी ज़रूरी थी।
दूसरी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 8.2% दर्ज की गई है, जो उम्मीद से बेहतर है। इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सस्ते कर्ज बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं।

बाज़ार पर क्या असर?
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से:
- रियल एस्टेट सेक्टर में बुकिंग बढ़ेगी
- ऑटो सेक्टर में नई कारों की बिक्री में उछाल आएगा
- स्टार्टअप और MSME को लोन लेना आसान होगा
- आम आदमी की खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी
शेयर मार्केट में भी इस फैसले का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में शुरुआती बढ़त दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भारत की मजबूत स्थिति
डॉलर-रुपया विनिमय दर में भी स्थिरता दिख रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक RBI का यह कदम भारत की वित्तीय विश्वसनीयता को और मजबूत करता है। विदेशी निवेशकों के लिए भी यह माहौल अनुकूल बनेगा।
