Connect with us

Sports

बवुमा विवाद पर बुमराह–पंत की टिप्पणी से बड़ी सीख! क्या हम क्रिकेट में स्पोर्ट्समैनशिप खो रहे हैं?

स्टंप mic पर सुनाई दिए अपमानजनक शब्दों ने उठाए सवाल—क्या भारत जैसे क्रिकेट-प्रेमी देश में भाषा की मर्यादा लगातार टूट रही है?

Published

on

Bumrah-Pant’s Comment on Temba Bavuma Sparks Big Sportsmanship Debate
बुमराह–पंत की बवुमा पर टिप्पणी ने छेड़ी बहस—क्या भारतीय क्रिकेट में सम्मान की संस्कृति कमजोर हुई?

कोलकाता में खेले गए भारत–दक्षिण अफ्रीका के पहले टेस्ट मैच में जहां दक्षिण अफ्रीका ने 14 साल बाद भारत में टेस्ट जीतकर इतिहास रचा, वहीं इस मैच की असली चर्चा कुछ और ही रही—जसप्रीत बुमराह** और ऋषभ पंत द्वारा टेम्बा बवुमा पर की गई कथित बॉडी-शेमिंग टिप्पणी।

स्टंप mic पर कैद हुई आवाज़ों में बुमराह और पंत ने बवुमा को “छोटा”, “bauna” जैसे शब्द कहे, जिसने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। सवाल सिर्फ एक—क्या भारत जैसे क्रिकेट-प्रेमी देश में भाषा की मर्यादा टूटती जा रही है?


हार–जीत खेल का हिस्सा, लेकिन शब्दों की मर्यादा?

टेस्ट मैच तीन दिन में खत्म हो गया, भारत हारा, लेकिन इस हार से ज्यादा चर्चा बुमराह और पंत के व्यवहार की हुई। कई फैन्स ने इसे ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की तरह sledging बताया, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों चीज़ें अलग हैं।

  • Sledging रणनीति का हिस्सा
  • Body-Shaming अपमान और सामाजिक हानि का रूप

ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर और लेखक शाह आलम खान, जिनका यह विश्लेषण वायरल हुआ, कहते हैं—
“दुर्व्यवहार भाषा में शुरू होता है, फिर व्यवहार तक पहुँचता है। यह सिर्फ क्रिकेट की बात नहीं, समाज की मानसिकता का प्रतिबिंब है।”


क्या यह ‘नई इंडिया’ की नई समस्या है?

ट्वीट्स, टीवी डिबेट्स, राजनीतिक बयानबाज़ी—हर जगह भाषा की गरिमा गिरती दिखती है।
लेख में यह भी कहा गया कि—

  • संसद में बदज़ुबानी का चलन बढ़ा
  • सोशल मीडिया पर गाली-गलौज सामान्य हो गई
  • युवा अपने आइडल्स से व्यवहार सीखते हैं

जब विराट कोहली**, रोहित शर्मा या बुमराह-पंत जैसे बड़े खिलाड़ी कुछ कहते हैं, तो उसका असर करोड़ों युवाओं पर पड़ता है।

इसीलिए खेल सिर्फ मैदान पर नहीं, चरित्र निर्माण का भी माध्यम होता है।


बवुमा क्यों बने इस बहस का केंद्र?

टेम्बा बवुमा, जो दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत टेस्ट कप्तान हैं, अक्सर नस्लीय और सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करते रहे हैं।
उनके खिलाफ बॉडी-शेमिंग ने कई लोगों को आहत किया क्योंकि यह:

  • एक कप्तान का अपमान
  • एक अफ्रीकी खिलाड़ी के संघर्षों का मज़ाक
  • और खेल भावना पर प्रश्न

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि स्टंप mic पर सब साफ़ सुनाई देने के बावजूद खिलाड़ियों ने कोई सफाई नहीं दी।

bumrah and pant 1763106235085

स्पोर्ट्समैनशिप सिर्फ एक शब्द नहीं—एक संस्कृति है

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में:

  • कट्टरता
  • नफ़रत भरी भाषा
  • सामाजिक विभाजन

काफी बढ़ गया है।
ऐसे में एक लेखक का यह सवाल वाजिब है—
“जब हमारे हीरो सम्मान नहीं दिखाते, तो समाज कैसे सीखेगा?”


हार से ज्यादा बड़ी जीत—गलती स्वीकारना होता

26 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका ने सीरीज़ जीत ली।
पर लेख के मुताबिक—

“एक क्रिकेट प्रेमी को हार का दुख हुआ, लेकिन एक खेल प्रेमी को खुशी… क्योंकि जीत ने अहंकार और अभद्रता को धोकर रख दिया।”

यह संदेश सिर्फ बुमराह–पंत के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट समुदाय और राजनीतिक वर्ग के लिए भी है।

और अंत में, प्रसिद्ध लेखक एदुआर्दो गालेआनो की किताब Football in Sun and Shadow का उद्धरण—
“कभी-कभी मूर्ति एकदम नहीं टूटती, लेकिन जब टूटती है, तो लोग उसके टुकड़े भी चबा जाते हैं।”

इशारा साफ़ था—
खेल में सम्मान खोना, किसी भी हार से बड़ा नुकसान है।

और पढ़ें DAINIK DIARY

Continue Reading
1 Comment

1 Comment

  1. Pingback: Vaibhav Suryavanshi का धमाका! T20 में रचा ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड जो आज तक कोई बल्लेबाज नहीं कर पाया - Dainik Diary - Authentic Hindi News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *