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डॉलर के सामने रुपये की सबसे बड़ी गिरावट! 90 पार होते ही बाजार में हड़कंप, क्या US–India ट्रेड डील फंसी?
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर 90.16 पर—FPIs की बिकवाली, ट्रेड डील का संकट और RBI की सीमित दखलअंदाज़ी से बढ़ी चिंता
भारतीय रुपया बुधवार सुबह इतिहास के सबसे निचले स्तर पर फिसल गया। पहली बार डॉलर के मुकाबले 90 का स्तर टूट गया, जिससे वित्तीय बाजारों में हलचल तेज़ हो गई। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, US–India Trade Deal में जारी अनिश्चितता और डॉलर की मांग में कमी ने रुपये पर जबरदस्त दबाव डाला है।
सुबह के कारोबार में रुपया 89.96 पर खुला और कुछ ही मिनटों में 90.16 के रिकॉर्ड लो तक पहुंच गया। मुद्रा बाज़ार के विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति फिलहाल स्थिर होने की बजाय और अस्थिर हो सकती है।
कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी हेड अनींद्य बनर्जी (Kotak Securities – ने कहा—
“इंडो–US ट्रेड डील पर स्पष्टता न होना निवेशकों की भावनाओं को कमजोर बना रहा है। FPIs की भारी बिकवाली और जापानी येन से जुड़े कैरी ट्रेड में गिरावट रुपये पर दबाव बढ़ा रही है।”
FPIs की बड़ी बिकवाली से रुपये पर बोझ
2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लगभग 1.48 लाख करोड़ की इक्विटी बेच दी गई है। दिसंबर के पहले दो दिनों में ही उन्होंने 4,335 करोड़ की निकासी कर दी। यह तेज़ आउटफ्लो रुपये को और कमजोर बना रहा है।
दुनिया भर में जोखिम बढ़ने के चलते निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर भाग रहे हैं, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं दबाव में हैं।
क्या RBI गिरावट को रोक रहा है?
मुद्रा बाज़ार में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि Reserve Bank of India (RBI — धीरे-धीरे हस्तक्षेप कर रहा है, लेकिन बहुत आक्रामक तरीके से नहीं।
एक मार्केट विश्लेषक ने कहा—
“RBI किसी खास स्तर को बचाने की कोशिश नहीं कर रहा, वह सिर्फ तेज़ उतार-चढ़ाव को रोकने की कोशिश कर रहा है।”
इसका मतलब यह हो सकता है कि केंद्रीय बैंक रुपये को बाज़ार के हिसाब से एडजस्ट होने देगा।
90 पार करने के बाद हेजिंग महंगी—कॉरपोरेट्स दबाव में
रुपये की गिरावट ने हेजिंग कॉस्ट को कई महीनों के उच्च स्तर पर पहुंचा दिया है।
- 1-year USD/INR प्रीमियम 12 bps बढ़ा
- 1-month प्रीमियम 19.5 पैसे तक चढ़ा
Mecklai Financial Services की CEO दीप्ति चितले का कहना है—
“मांग बढ़ी है क्योंकि कंपनियां और ट्रेडर्स आगे की कमजोरी से बचना चाहते हैं। बाजार को लग रहा है कि RBI रुपये को गहराई तक गिरने दे सकता है।”

US–India Yield Gap 250 bps तक फैला—विदेशी निवेश कम होने का डर
भारत और अमेरिका के 10-year बॉन्ड में यील्ड का अंतर 250 bps तक बढ़ गया है, जो लगभग एक साल का उच्चतम अंतर है। इसका मतलब विदेशी निवेशक भारत में निवेश करते समय ज्यादा मुद्रा जोखिम देख रहे हैं।
Bank of Baroda के चीफ इकोनॉमिस्ट Madan Sabnavis के अनुसार,
“रुपये की गिरावट से एक्सपोर्टर्स को थोड़ा फायदा होगा लेकिन इम्पोर्टर्स और आम जनता के लिए महंगाई बढ़ सकती है।”
RBI पॉलिसी पर टिकी नज़र—क्या 90 से वापस 88 जा सकता है रुपया?
5 दिसंबर को RBI की मॉनेटरी पॉलिसी आने वाली है। बाज़ार को उम्मीद है कि इसमें रुपये को स्थिर करने के लिए कुछ संकेत मिल सकते हैं।
LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी का कहना है—
“बाज़ार 91 के स्तर की चर्चा कर रहा है। लेकिन RBI पॉलिसी की घोषणा के बाद संभव है कि रुपये में 88–89 तक सुधार देखने को मिल जाए।”
हालांकि यह केवल बाज़ार की अटकलें हैं—कोई भी दिशा अभी निश्चित नहीं।
आगे क्या?
- ट्रेड डील पर प्रगति होगी तो रुपया तेज़ी से सुधर सकता है
- FPIs की बिकवाली जारी रही तो 91 भी दूर नहीं
- तेल की कीमतें और US ब्याज दरें भी अगले हफ्तों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद, ग्लोबल दबावों के बीच रुपये की यात्रा फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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