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भारत की तीसरी परमाणु पनडुब्बी जल्द Navy में शामिल होगी—INS Aridaman से और मजबूत होगा Nuclear Triad
Navy Chief दीनेश के. त्रिपाठी का बड़ा बयान—INS Aridaman ट्रायल्स के अंतिम चरण में, Project 75-India पर फैसला भी जल्द; 2028 में मिलेंगे पहले Rafale-M.
भारत अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए तैयार है। Navy Day से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दीनेश के. त्रिपाठी ने घोषणा की कि देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित पनडुब्बी INS Aridaman बहुत जल्द नौसेना में शामिल की जाएगी।
यह पनडुब्बी भारत के nuclear triad—जमीनी, हवाई और समुद्री परमाणु क्षमता—को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
INS Aridaman — ट्रायल्स पूरे, जल्द होगी कमीशन
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि:
“INS Aridaman अपने अंतिम ट्रायल चरण में है और जल्द ही नौसेना में शामिल कर ली जाएगी।”
यह पनडुब्बी भारत की SSBN (Ship Submersible Ballistic Nuclear) परियोजना का तीसरा चरण है, जिसमें पहले शामिल हैं:

INS Arihant- INS Arighat
यह कार्यक्रम भारत के nuclear deterrence के सबसे अहम स्तंभों में से एक है।
INS Arihant को 2009 में लॉन्च किया गया था और 2016 में चुपचाप कमीशन किया गया था।
इसके साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हैं—
अमेरिका, रूस, यूके, फ्रांस और चीन।
Project 75-India — छह नई स्टेल्थ सबमरीन पर फैसला करीब
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि:
- छह स्टेल्थ सबमरीन खरीदने के लिए Project 75-India का निर्णय अंतिम चरण में है
- यह भारतीय नौसेना की अंडरवॉटर पावर को कई गुना बढ़ा देगा
2028 में मिलेंगे Rafale-M — एयर पावर भी होगी और मजबूत
भारत ने अप्रैल 2025 में ₹64,000 करोड़ की डील के तहत फ्रांस से 26 Rafale-M जेट खरीदने पर सहमति जताई थी।
एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार:
“पहले चार Rafale-M 2028 में नौसेना को मिलेंगे।”
ये लड़ाकू विमान भारतीय विमानवाहक पोतों की मारक क्षमता को बढ़ाएंगे।
Operation Sindoor — Pakistan Navy को पोर्ट्स में रोके रखा
एडमिरल त्रिपाठी ने पहली बार खुलकर Operation Sindoor के प्रभाव की बात की। उन्होंने कहा कि:
- भारत की आक्रामक नौसैनिक तैनाती ने Pakistan Navy को अपने पोर्ट्स और Makran Coast तक सीमित कर दिया
- पिछले 7–8 महीनों में पश्चिमी अरब सागर में भारतीय नौसेना ने लगातार हाई ऑपरेशनल रेडीनेस रखी
- पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा, क्योंकि merchant ships ने देश की ओर जाना कम कर दिया
- बीमा लागत बढ़ने से पाकिस्तान को वित्तीय झटका लगा
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन अभी भी “जारी है”।

भारत की परमाणु नीति — No First Use पर कायम
भारत ने हमेशा वैश्विक मंच पर परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन किया है।
1998 के Pokhran-II परीक्षणों के बाद भी भारत ने यह स्पष्ट किया कि:
- उसकी नीति Credible Minimum Deterrence पर आधारित है
- और वह “No First Use” के सिद्धांत का पालन करता रहेगा
2003 में जारी आधिकारिक Nuclear Doctrine में यह नीति स्पष्ट रूप से दर्ज है।
क्यों INS Aridaman भारत के लिए गेम-चेंजर होगी?
- भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को तीसरा स्तंभ मिलेगा
- लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने में सक्षम
- दुश्मन देशों की निगरानी और रोकथाम क्षमता बढ़ेगी
- भारतीय नौसेना की वैश्विक ताकत में इजाफा
INS Aridaman के कमीशन होते ही भारत का SSBN कार्यक्रम और परिपक्व होगा, जिससे देश की रणनीतिक सुरक्षा एक नई ऊंचाई पर पहुंचेगी।
