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Virat Kohli ने तोड़ी चुप्पी: ‘मैं तैयारी का बड़ा believer नहीं’—52वां शतक जमाकर दिए कई बड़े संकेत
रांची ODI में कोहली का तूफानी शतक, BCCI की domestic demand पर दिया करारा जवाब—कहा, मानसिक तैयारी ही काफी
रांची के JSCA स्टेडियम में रविवार की शाम कुछ अलग ही थी। हर तरफ “कोहली–कोहली” की गूंज थी, और बीच मैदान में खड़े थे टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी—विराट कोहली। 37 की उम्र में भी 25 साल के खिलाड़ी जैसी फुर्ती, 52वां ODI शतक और गेंद पर वैसी ही पकड़ जैसी उनके सुनहरे दौर में दिखती थी। लेकिन इस शतक से भी ज्यादा चर्चा में रही वो बातें, जो कोहली ने मैच के बाद कही।
पिछले कुछ दिनों से लगातार ऐसी खबरें आ रही थीं कि BCCI सीनियर खिलाड़ियों—खासकर विराट कोहली और रोहित शर्मा—से टेस्ट रिटायरमेंट वापस लेने और घरेलू क्रिकेट खेलने पर जोर दे रहा है। लेकिन रांची ODI के बाद कोहली ने साफ कर दिया—वो केवल ODIs पर ही फोकस करेंगे और अपनी तैयारी के तरीके से बिल्कुल खुश हैं।
“मैं तैयारी का बहुत बड़ा believer नहीं हूं” — विराट कोहली
पोस्ट मैच सेरेमनी में कोहली ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा:
“I’ve never been a big believer of lot of preparation… जब तक मैं मानसिक रूप से अच्छा महसूस करता हूं, मैं खेल सकता हूं।”
उनका ये बयान साफ संकेत है कि चाहे BCCI चाहे या फैंस—कोहली अपनी बॉडी और अपने गेम को खुद सबसे बेहतर समझते हैं।
क्या वो दिल्ली के लिए Vijay Hazare खेलेंगे?
यह एक बड़ा सवाल रहा है, इसलिए कोहली ने इस पर भी अप्रत्यक्ष जवाब दिया। मीडिया में जो ये चर्चा है कि ‘लंदन में रहने वाला खिलाड़ी सीधे भारत के लिए कैसे खेल सकता है?’—कोहली ने अपनी बात से उन सभी संकेतों को क्लियर कर दिया।
उन्होंने बताया कि—
“मैं हर दिन बहुत मेहनत करता हूं। मेरी फिटनेस क्रिकेट पर नहीं, मेरी लाइफस्टाइल पर आधारित है।”
यानी घरेलू क्रिकेट खेलना या न खेलना—ये फैसला पूरी तरह उनके मुताबिक होगा।
रांची का शतक — उम्र को मात देने वाली पारी
कोहली का 135 रन (120 गेंद) सिर्फ शतक नहीं था, बल्कि एक तरह का बयान था कि वो क्यों अब भी भारत की ODI टीम की रीढ़ हैं। रनिंग बिटवीन द विकेट्स, गेंद की टाइमिंग और मैदान पर ऊर्जा—सबकुछ वैसे ही जैसे 2008 में जब उन्होंने U-19 वर्ल्ड कप जिताया था।
उनकी एक भी चाल ऐसी नहीं लगी कि वो उम्र या फिटनेस के दबाव में हों।
2027 विश्व कप तक खेल पाएंगे?
यह सवाल हर चर्चा में है। क्या कोहली 2027 विश्व कप तक उसी अंदाज़ में खेलते रहेंगे?
हर्षा भोगले ने जब उनसे पूछा—
“आप कैसे सुनिश्चित करते हैं कि आप पर्याप्त क्रिकेट खेलते हैं ताकि इस तरह की परफॉर्मेंस देते रहें?”
कोहली का जवाब बेहद सटीक था—
“मैंने 300 ODI खेले हैं। अगर आप नेट में डेढ़–दो घंटे लगातार बल्लेबाज़ी कर सकते हैं, तो आप बिल्कुल तैयार हैं।”
यानी अनुभव, फिटनेस और मानसिक ताकत—तीनों अभी भी 100% हैं।

क्यों यह innings ‘special’ थी?
कोहली ने कहा कि पहली 20–25 ओवर पिच बेहतरीन थी, इसलिए उनका इरादा था—
“बस गेंद को देखना है और खेलना है—ज्यादा सोचना नहीं।”
इसी ‘कम सोचना, ज्यादा महसूस करना’ वाले एप्रोच ने उन्हें 52वां शतक दिलाया।
37 की उम्र पर मज़ेदार जवाब
कोहली ने कहा कि मैच से एक दिन पहले उन्होंने आराम लिया था—
“क्योंकि मैं 37 का हूं, रिकवरी ज़रूरी है।”
हर्षा भोगले ने चुटकी ली—“आप 37 को बहुत युवा बना रहे हैं,”
कोहली ज़ोर से हंस पड़े।
वो हंसी किसी ‘last laugh’ की तरह लगी—जैसे बताना चाहते हों कि बात उम्र की नहीं, जुनून की है।
BCCI की domestic push पर ‘परफेक्ट रिप्लाई’
BCCI के आंतरिक संदेशों के बीच कोहली का यह शतक और बयान कई सवालों के जवाब जैसा है:
- वो ODI पर ही ध्यान देंगे
- घरेलू क्रिकेट खेले या न खेले—उनका गेम प्रभावित नहीं होगा
- उनकी तैयारी मानसिक और विज़ुअलाइजेशन पर आधारित है
- उनकी फिटनेस अभी भी दुनिया में बेस्ट है
रांची की भीड़ और उनके 52वें शतक ने यह साबित कर दिया कि कोहली जिस रास्ते पर हैं, वो अभी भी भारतीय क्रिकेट का सबसे भरोसेमंद नाम हैं।
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