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“हमने अंधेरे दिन देखे” बावुमा का जीत मंत्र जिसने भारत को हराया – आखिर Team India में कमी कहाँ?
दक्षिण अफ्रीका ने गुवाहाटी में 2-0 सीरीज जीतकर भारत को चौंकाया, कप्तान टेंबा बावुमा ने टीम की मानसिकता और तैयारी को सफलता का राज बताया
गुवाहाटी में खेले गए दूसरे टेस्ट के पांचवें दिन भारत की बल्लेबाज़ी ऐसे ढह गई जैसे दबाव में खड़ी रेत की दीवार। भारी लक्ष्य का पीछा करते हुए टीम इंडिया लंच से पहले ही 172 रन पर ढेर हो गई, और दक्षिण अफ्रीका ने 2-0 से सीरीज अपने नाम कर ली। यह हार सिर्फ स्कोरबोर्ड पर नहीं, बल्कि टीम इंडिया की मानसिकता, तकनीक और तैयारी पर बड़े सवाल छोड़ गई।
दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा ने इस जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। चोट से उभरकर लौटने वाले बावुमा ने कहा कि टीम ने “अंधेरे दिन” देखे, लेकिन उनकी एकता, स्पष्ट सोच और तैयारी ने उन्हें मजबूत बनाया।
बावुमा ने मैच के बाद कहा:
“यह सीरीज हमारे लिए बहुत खास है। हम एक समूह के रूप में कई कठिन समय से गुजरे हैं। मानसिकता में बदलाव और टीम योगदान ही हमारी असली ताकत है। भारत में आकर 2-0 जीत लेना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता।”
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दक्षिण अफ्रीका की जीत का असली आधार उनकी स्पिन जोड़ी रही – केशव महाराज और साइमन हार्मर। दोनों ने भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ ऐसी लाइन-लेंथ और फ्लाइट का संयोजन दिखाया कि अनुभवी खिलाड़ियों तक की तकनीक खुलकर सामने आ गई। अंतिम दिन स्पिनर्स ने भारतीय बल्लेबाज़ों को कभी टिकने ही नहीं दिया।
बावुमा ने विशेष रूप से साइमन हार्मर की तारीफ़ करते हुए कहा:
“साइमन के पास 2015 भारत दौरे का अनुभव है। वह केशव को बेहतरीन तरीके से कंप्लीमेंट करते हैं। कई बार गेंद उनके हाथ से निकालना मुश्किल हो जाता है। इस सीरीज में वे हमारे असली मैच-विनर रहे।”
भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह बल्लेबाज़ी रही। पहले टेस्ट से लेकर दूसरे टेस्ट के अंतिम दिन तक किसी खिलाड़ी ने बड़ा स्कोर नहीं बनाया। बल्लेबाजों की वही गलती दोहराई गई – खराब शॉट चयन, दबाव में घबराहट और रिवर्स स्पिन संभालने की कमी।
विराट कोहली के जाने के बाद मिडिल ऑर्डर की निर्भरता बढ़ गई है, लेकिन युवा खिलाड़ियों ने मौके का फायदा नहीं उठाया। रोहित शर्मा और केएल राहुल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की असफलता ने भी टीम को मुश्किल में डाल दिया।
दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका की टीम ने किसी बल्लेबाज से शतक नहीं देखा, लेकिन 4-5 खिलाड़ियों के 30-40 रन के योगदान ने मैच का रुख बदल दिया। वहीं भारत इस तरह के ‘कलेक्टिव कंट्रीब्यूशन’ से दूर दिखा।

यह वही चीज़ है जिस पर दुनिया की सफल टेस्ट टीमें टिकती हैं, जैसे –
- 2021 लॉर्ड्स टेस्ट में ओलिवर पोप का 34 रन, जिसने इंग्लैंड को मैच में बनाए रखा
- ऑस्ट्रेलिया के 2023 एशेज में मिडिल ऑर्डर के छोटे लेकिन प्रभावी योगदान
दक्षिण अफ्रीका की टीम इसी मॉडल पर काम कर रही है।
अब सवाल उठता है – टीम इंडिया क्या बदलेगी?
ODI सीरीज से पहले चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा:
क्या मानसिक तैयारी की कमी है?
क्या घरेलू पिचों पर आसान क्रिकेट की वजह से खिलाड़ी संघर्ष कर रहे हैं?
क्या भारत को नई स्पिन रणनीति की जरूरत है?
पूर्व क्रिकेटर और कोच राहुल द्रविड़ की कोचिंग में टीम में स्थिरता आई है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि खिलाड़ी मानसिक रूप से तैयार नहीं दिखे। सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं कि टीम इंडिया में फाइटिंग स्पिरिट क्यों कम हुई है।
बावुमा के शब्द टीम इंडिया के लिए एक चेतावनी हो सकते हैं:
“हर खिलाड़ी टीम के लिए मैच जीतने की चाह रखता है। यही हमें आगे ले जा रहा है।”
भारत के पास प्रतिभा की कमी नहीं, लेकिन टीम क्रिकेट का यह नया मॉडल – योगदान आधारित, मानसिक रूप से मजबूत और सामूहिक प्रयास – शायद वह चीज़ है जिसकी जरूरत आज सबसे ज्यादा है।
